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Farrukhabad News: महिला डॉक्टरों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
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फर्रुखाबाद। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बावजूद महिलाओं को पूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। महिला डॉक्टरों की भारी कमी के कारण सात सीएचसी में प्रसव सेवाएं स्टाफ नर्सों के भरोसे चल रही हैं। दुष्कर्म पीड़िताओं को मेडिकल परीक्षण के लिए लोहिया अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
जनपद में सिविल अस्पताल लिंजीगंज सहित कुल दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से कायमगंज, कमालगंज और राजेपुर को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) बनाया गया है, जहां ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा होनी चाहिए। हालांकि, सीएचसी राजेपुर में महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है और प्रसव स्टाफ नर्सों द्वारा कराए जा रहे हैं। सिविल अस्पताल लिंजीगंज में तैनात ममता अरुण को राजेपुर से संबद्ध किया गया है, लेकिन वह अपनी मूल तैनाती पर ही सेवाएं दे रही हैं।
मोहम्मदाबाद, नवाबगंज और शमसाबाद सीएचसी में भी महिला डॉक्टर नहीं हैं। इस कारण यहां आने वाली दुष्कर्म पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण नहीं किया जाता और उन्हें लोहिया अस्पताल भेजा जाता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के पास स्थित सीएचसी फतेहगढ़ में भी आपातकालीन सेवाएं शुरू नहीं की गई हैं। यहां भी महिला डॉक्टर की कमी है और स्टाफ नर्सें दो-चार माह में एक-दो प्रसव कराकर औपचारिकता पूरी कर रही हैं। बरौन सीएचसी में भी महिला डॉक्टर न होने से प्रसव स्टाफ नर्सों के भरोसे हैं, और यहां न तो आपातकालीन सेवा है और न ही आपराधिक मामलों में मेडिकल परीक्षण किए जाते हैं।
सीएचसी कंपिल की व्यवस्थाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी बदतर हैं। पुलिस थाना होने के बावजूद मेडिकल परीक्षण के लिए पीड़ितों को सीएचसी कायमगंज ले जाया जाता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी अवनींद्र कुमार ने बताया कि जिले में महिला डॉक्टरों की भारी कमी है, जिसके कारण किसी तरह काम चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिला डॉक्टर उपलब्ध होने पर उनकी सीएचसी में तैनाती की जाएगी।
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जनपद में सिविल अस्पताल लिंजीगंज सहित कुल दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से कायमगंज, कमालगंज और राजेपुर को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) बनाया गया है, जहां ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा होनी चाहिए। हालांकि, सीएचसी राजेपुर में महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है और प्रसव स्टाफ नर्सों द्वारा कराए जा रहे हैं। सिविल अस्पताल लिंजीगंज में तैनात ममता अरुण को राजेपुर से संबद्ध किया गया है, लेकिन वह अपनी मूल तैनाती पर ही सेवाएं दे रही हैं।
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मोहम्मदाबाद, नवाबगंज और शमसाबाद सीएचसी में भी महिला डॉक्टर नहीं हैं। इस कारण यहां आने वाली दुष्कर्म पीड़िताओं का मेडिकल परीक्षण नहीं किया जाता और उन्हें लोहिया अस्पताल भेजा जाता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के पास स्थित सीएचसी फतेहगढ़ में भी आपातकालीन सेवाएं शुरू नहीं की गई हैं। यहां भी महिला डॉक्टर की कमी है और स्टाफ नर्सें दो-चार माह में एक-दो प्रसव कराकर औपचारिकता पूरी कर रही हैं। बरौन सीएचसी में भी महिला डॉक्टर न होने से प्रसव स्टाफ नर्सों के भरोसे हैं, और यहां न तो आपातकालीन सेवा है और न ही आपराधिक मामलों में मेडिकल परीक्षण किए जाते हैं।
सीएचसी कंपिल की व्यवस्थाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी बदतर हैं। पुलिस थाना होने के बावजूद मेडिकल परीक्षण के लिए पीड़ितों को सीएचसी कायमगंज ले जाया जाता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी अवनींद्र कुमार ने बताया कि जिले में महिला डॉक्टरों की भारी कमी है, जिसके कारण किसी तरह काम चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिला डॉक्टर उपलब्ध होने पर उनकी सीएचसी में तैनाती की जाएगी।