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Farrukhabad News: फर्जी बिल निरस्त कर विद्युत निगम पर लगाया हर्जाना
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फर्रुखाबाद। करीब 23 वर्ष पुराने मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की ओर से जारी 7,203 रुपये का बिल निरस्त कर दिया। आयोग ने विद्युत निगम को आदेश दिया कि वह क्षतिपूर्ति के रूप में परिवादी को 7,000 रुपये सात प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज सहित अदा करे।
जहानगंज थाना क्षेत्र के गांव ककरैया (मूसाखिरिया) निवासी जयंत कुमार ने वर्ष 2003 में आयोग में परिवाद दाखिल कर बताया था कि उसने वर्ष 1989 में बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था लेकिन विभाग ने न तो कनेक्शन दिया, न जमानत राशि जमा कराई और न ही कोई अनुबंध किया। इसके बावजूद वर्ष 2003 में 7,203 रुपये का बिल भेज दिया।
विद्युत निगम ने दावा किया कि परिवादी कटिया डालकर बिजली का उपयोग कर रहा था और उसका कनेक्शन नियमित किया गया था, लेकिन आयोग में इसके समर्थन में कोई दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। दूसरी ओर परिवादी ने शपथपत्रों और अभिलेखीय साक्ष्यों से साबित किया कि उसके घर तक बिजली लाइन ही नहीं पहुंची थी और उसने कभी बिजली का उपभोग नहीं किया।
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जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार तथा सदस्य विपिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने सुनवाई के दौरान माना कि बिना वैध कनेक्शन और बिजली उपभोग के बिल जारी करना अनुचित है। इसी आधार पर बिल को निरस्त करते हुए विद्युत निगम को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक क्षति के एवज में 7,000 रुपये ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया। यह राशि निर्णय की तिथि से 45 दिन के भीतर देने के निर्देश दिए गए हैं।
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जहानगंज थाना क्षेत्र के गांव ककरैया (मूसाखिरिया) निवासी जयंत कुमार ने वर्ष 2003 में आयोग में परिवाद दाखिल कर बताया था कि उसने वर्ष 1989 में बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था लेकिन विभाग ने न तो कनेक्शन दिया, न जमानत राशि जमा कराई और न ही कोई अनुबंध किया। इसके बावजूद वर्ष 2003 में 7,203 रुपये का बिल भेज दिया।
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विद्युत निगम ने दावा किया कि परिवादी कटिया डालकर बिजली का उपयोग कर रहा था और उसका कनेक्शन नियमित किया गया था, लेकिन आयोग में इसके समर्थन में कोई दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। दूसरी ओर परिवादी ने शपथपत्रों और अभिलेखीय साक्ष्यों से साबित किया कि उसके घर तक बिजली लाइन ही नहीं पहुंची थी और उसने कभी बिजली का उपभोग नहीं किया।
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जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष नरेश कुमार तथा सदस्य विपिन कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने सुनवाई के दौरान माना कि बिना वैध कनेक्शन और बिजली उपभोग के बिल जारी करना अनुचित है। इसी आधार पर बिल को निरस्त करते हुए विद्युत निगम को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक क्षति के एवज में 7,000 रुपये ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया। यह राशि निर्णय की तिथि से 45 दिन के भीतर देने के निर्देश दिए गए हैं।