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Farrukhabad News: आलू के भाव गिरे, किसान भंडारण से बच रहे, शीतगृहों का भरना मुश्किल
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फोटो-17 कमालगंज क्षेत्र में खेत में बोरों में भरा जा रहा आलू। संवाद
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फर्रुखाबाद। जिले की मुख्य सातनपुर मंडी में आलू की आवक आधी रह गई है, जिसके बावजूद भाव बढ़ने के बजाय कम हुए हैं। इससे चिंतित शीतगृह संचालक किसानों को आलू भंडारण के लिए 100 रुपये प्रति पैकेट ऋण और बारदाना दे रहे हैं। पिछले साल की मंदी के कारण किसान इस बार भंडारण से बच रहे हैं, जिससे शीतगृहों को भरना मुश्किल हो रहा है।
फरवरी में जब भंडारण सत्र शुरू हुआ था, तब अच्छे आलू का भाव 645 रुपये प्रति क्विंटल तक था। हालांकि, अब यह भाव 20 से 50 रुपये प्रति क्विंटल तक टूट चुका है। जिले में पिछले साल 109 शीतगृह थे, जिनकी संख्या इस बार बढ़कर 111 हो गई है। इसके बावजूद, अभी तक शीतगृह अपनी क्षमता का 50 फीसदी भी नहीं भर पाए हैं।
भंडारण को बढ़ावा देने के लिए किसानों और व्यापारियों को ऋण व बारदाना जैसे प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। पिछले सीजन में भारी मंदी के कारण कई किसानों ने अपना आलू शीतगृह में ही मुफ्त में छोड़ दिया था। इस बार मंदी और भी अधिक होने की आशंका से किसान सशंकित हैं। यही वजह है कि कई किसान शीतगृह के बजाय छायादार पेड़ों के नीचे आलू के ढेर लगा रहे हैं।
अच्छी साख वाले कुछ शीतगृह ही 50 फीसदी तक भर पाए हैं, जबकि कई अन्य में 30 से 40 फीसदी भंडारण हुआ है। सिलारचौरा खुदागंज के किसान व व्यापारी वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि उनके क्षेत्र में मुश्किल से 20-25 फीसदी आलू की खोदाई बची है, जो आठ-दस दिन में पूरी हो जाएगी। किसान पिछले अनुभवों के कारण इस बार शीतगृहों में आलू रखने से हिचक रहे हैं। वे दो माह बाद आलू बेचने की सोच रहे हैं, लेकिन शीतगृह के बजाय छायादार जगह में ढेर लगा रहे हैं।
चिप्सोना व नीदरलैंड आलू उत्पादक क्षेत्र ककरैया के किसान शरद कुमार का कहना है कि उनके यहां पक्की फसल बहुतायत में होती है। उनके क्षेत्र में अभी भी 35 से 40 फीसदी खोदाई बाकी है। उन्होंने बताया कि भाव में सुधार न होने से किसान भंडारण के बजाय खुले में आलू रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह स्थिति शीतगृह संचालकों के लिए चुनौती बनी हुई है।
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फरवरी में जब भंडारण सत्र शुरू हुआ था, तब अच्छे आलू का भाव 645 रुपये प्रति क्विंटल तक था। हालांकि, अब यह भाव 20 से 50 रुपये प्रति क्विंटल तक टूट चुका है। जिले में पिछले साल 109 शीतगृह थे, जिनकी संख्या इस बार बढ़कर 111 हो गई है। इसके बावजूद, अभी तक शीतगृह अपनी क्षमता का 50 फीसदी भी नहीं भर पाए हैं।
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भंडारण को बढ़ावा देने के लिए किसानों और व्यापारियों को ऋण व बारदाना जैसे प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। पिछले सीजन में भारी मंदी के कारण कई किसानों ने अपना आलू शीतगृह में ही मुफ्त में छोड़ दिया था। इस बार मंदी और भी अधिक होने की आशंका से किसान सशंकित हैं। यही वजह है कि कई किसान शीतगृह के बजाय छायादार पेड़ों के नीचे आलू के ढेर लगा रहे हैं।
अच्छी साख वाले कुछ शीतगृह ही 50 फीसदी तक भर पाए हैं, जबकि कई अन्य में 30 से 40 फीसदी भंडारण हुआ है। सिलारचौरा खुदागंज के किसान व व्यापारी वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि उनके क्षेत्र में मुश्किल से 20-25 फीसदी आलू की खोदाई बची है, जो आठ-दस दिन में पूरी हो जाएगी। किसान पिछले अनुभवों के कारण इस बार शीतगृहों में आलू रखने से हिचक रहे हैं। वे दो माह बाद आलू बेचने की सोच रहे हैं, लेकिन शीतगृह के बजाय छायादार जगह में ढेर लगा रहे हैं।
चिप्सोना व नीदरलैंड आलू उत्पादक क्षेत्र ककरैया के किसान शरद कुमार का कहना है कि उनके यहां पक्की फसल बहुतायत में होती है। उनके क्षेत्र में अभी भी 35 से 40 फीसदी खोदाई बाकी है। उन्होंने बताया कि भाव में सुधार न होने से किसान भंडारण के बजाय खुले में आलू रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह स्थिति शीतगृह संचालकों के लिए चुनौती बनी हुई है।