फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   The Ganga has surged again; with water entering homes, it has become difficult to light the stove.

Farrukhabad News: फिर उफनाई गंगा, घरों में पानी घुसने से चूल्हा जलाना मुश्किल

Tue, 11 Aug 2026 12:22 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2026 12:22 AM IST
विज्ञापन
The Ganga has surged again; with water entering homes, it has become difficult to light the stove.
फोटो -33, नाव से गांव उदयपुर को जाते छात्र छात्राएं व ग्रामीण। संवाद
अमृतपुर। गंगा का जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर किनारे बसे गांवों में मुश्किलें बढ़ गई हैं। सोमवार को गंगा का जलस्तर 136.95 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 137.10 मीटर से महज 15 सेंटीमीटर नीचे है। नरौरा बांध से गंगा में 1,53,173 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद ऊगरपुर, मंझा, करनपुर घाट, कुड़री सारंगपुर, अंबरपुर, चित्रकूट और अंबरपुर की मड़ैया समेत कई गांवों में घरों के अंदर पानी भर गया है।
विज्ञापन

ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या खाना बनाने की है। चूल्हा जलाने के लिए जगह नहीं बची है। ग्रामीणों का कहना है कि गैस सिलिंडर भराने के लिए रुपये नहीं हैं और लगातार बारिश के कारण लकड़ियां भीग गई हैं। बाढ़ से घिरे गांवों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को शौच के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
विज्ञापन

ग्रामीणों के मुताबिक पिछले साल बाढ़ के दौरान प्रशासन ने मोबाइल शौचालय उपलब्ध कराए थे, लेकिन इस बार अभी तक व्यवस्था नहीं की गई है। उदयपुर और मंझा गांव के लोग नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाव से आने-जाने में काफी समय लग रहा है। रोजमर्रा के काम और जरूरी सामान जुटाने के लिए बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अंबरपुर की मड़ैया निवासी तुलाराम, राजीव, रामसेवक, मुरारी और दलवीर ने बताया कि गांव के अधिकांश घरों में पानी भरा है। अभी तक गांव में राहत सामग्री का वितरण भी नहीं किया गया है।
=========
बाढ़ शरणालय में सन्नाटा, भोजन के समय पहुंच रहे ग्रामीण
फोटो-37, खाली पड़ा बाढ़ शरणालय । संवाद
- 35 से अधिक गांव प्रभावित, घर और सामान छोड़ने को तैयार नहीं बाढ़ पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतपुर। गंगा में आई बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों के लिए प्रशासन ने चित्रकूट स्थित रामनिवास महाविद्यालय में बाढ़ शरणालय बनाया है। शरणालय में रहने, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था होने के बावजूद बाढ़ पीड़ित यहां ठहरने के लिए तैयार नहीं हैं। दिनभर शरणालय में सन्नाटा पसरा रहता है। सुबह-शाम भोजन वितरण के समय ही ग्रामीण यहां पहुंचते हैं।
अंबरपुर और चित्रकूट के कई घरों में पानी भर गया है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीण बदायूं मार्ग पर चित्रकूट के पास पॉलिथीन डालकर रहने को मजबूर थे। प्रशासन ने इनसे बाढ़ शरणालय में रहने की अपील की थी। इसके बावजूद ग्रामीण रात में यहां रुकने के बजाय अपने घरों अथवा गांव के आसपास ही रहना पसंद कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि घर में रखा सामान छोड़कर कहां जाएं। सामान की सुरक्षा की चिंता के कारण वे शरणालय में नहीं रुक रहे हैं। सोमवार को शरणालय में एक सुरक्षा कर्मचारी, अमीन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही।

एसडीएम श्वेता साहू ने बताया कि शरणालय के आसपास ही गांव होने के कारण ग्रामीण भोजन के बाद अपने घरों की ओर चले जाते हैं। बाढ़ प्रभावित बच्चों को पढ़ाने लिए शरणालय में ड्यूटी लगाई गई है। कई विद्यालय के शिक्षकों को खंड शिक्षा अधिकारी ने अस्थायी संबद्ध किया है। सोमवार को शिक्षक 12 बजे ही चले गए।

फोटो -33, नाव से गांव उदयपुर को जाते छात्र छात्राएं व ग्रामीण। संवाद

फोटो -33, नाव से गांव उदयपुर को जाते छात्र छात्राएं व ग्रामीण। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed