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Fatehpur News: 78 वर्ष से बरगदी को नहीं मिली सड़क, खेतों से कंधों पर ले गए शव
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फोटो-19-गेहूं की फसल में पानी भरे खेत से अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाते ग्रामीण। संवाद
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असोथर (फतेहपुर)। आजादी के 78 वर्ष बाद भी नगर पंचायत असोथर के वार्ड विधातीपुर स्थित बरगदी मोहल्ले को पक्की सड़क नहीं मिल सकी है। इसके कारण छात्रों, बुजुर्गों और महिलाओं समेत ग्रामीणों को खेत की मेड़ों से आना-जाना पड़ता है। रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें ग्रामीण पानी भरे गेहूं के खेतों से शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
बरगदी मोहल्ला निवासी मंतू निषाद (75) का शनिवार रात बीमारी के कारण निधन हो गया। सड़क न होने के कारण उनकी अंतिम यात्रा खेतों से होकर गुजरी। मंतू की पत्नी रमुइया देवी और बेटे रज्जन, सज्जन व रजोल निषाद ने बताया कि उनके पिता प्रधानमंत्री आवास योजना या शौचालय जैसी बुनियादी योजनाओं का लाभ भी नहीं ले पाए।
ग्रामीणों के अनुसार इस बस्ती में मछुआरा समुदाय के करीब 25 परिवार रहते हैं। इनकी कुल आबादी 120 है। आजादी के 78 वर्षों में भी इस बस्ती को पक्का रास्ता नहीं मिला। बच्चे खेत की मेड़ों से होकर स्कूल-कॉलेज जाते हैं और बीमारी या प्रसव के समय एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती।
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी हरिंगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। बरगदी मोहल्ले की समस्या पुरानी है और नगर पंचायत स्तर से जो भी संभव होगा वह किया जाएगा। संबंधित विभागों से समन्वय कर समाधान निकाला जाएगा।
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बरगदी मोहल्ला निवासी मंतू निषाद (75) का शनिवार रात बीमारी के कारण निधन हो गया। सड़क न होने के कारण उनकी अंतिम यात्रा खेतों से होकर गुजरी। मंतू की पत्नी रमुइया देवी और बेटे रज्जन, सज्जन व रजोल निषाद ने बताया कि उनके पिता प्रधानमंत्री आवास योजना या शौचालय जैसी बुनियादी योजनाओं का लाभ भी नहीं ले पाए।
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ग्रामीणों के अनुसार इस बस्ती में मछुआरा समुदाय के करीब 25 परिवार रहते हैं। इनकी कुल आबादी 120 है। आजादी के 78 वर्षों में भी इस बस्ती को पक्का रास्ता नहीं मिला। बच्चे खेत की मेड़ों से होकर स्कूल-कॉलेज जाते हैं और बीमारी या प्रसव के समय एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती।
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी हरिंगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। बरगदी मोहल्ले की समस्या पुरानी है और नगर पंचायत स्तर से जो भी संभव होगा वह किया जाएगा। संबंधित विभागों से समन्वय कर समाधान निकाला जाएगा।

फोटो-19-गेहूं की फसल में पानी भरे खेत से अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाते ग्रामीण। संवाद
