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Firozabad News: एलपीजी संकट के बीच ओटीपी के नए नियम से उपभोक्ता परेशान
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फिरोजाबाद। एलपीजी गैस संकट के बीच अब सिलिंडर डिलीवरी के लिए लागू किया गया ओटीपी का नया नियम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। गैस पंजीकरण में दर्ज पुराने और बंद हो चुके मोबाइल नंबरों के कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दौलतपुर (नई आबादी) निवासी मनोज कुमार ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनका गैस कनेक्शन करीब 10 साल पुराना है। कनेक्शन लेते वक्त जो मोबाइल नंबर था, वही उनके खाते से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में रिचार्ज न होने के अभाव में वह नंबर बंद हो चुका था। अब सिर्फ गैस सिलिंडर का ओटीपी प्राप्त करने के लिए उन्हें जबरन 350 रुपये का मोबाइल रिचार्ज कराना पड़ा, क्योंकि बिना ओटीपी दिए गैस एजेंसी से सिलिंडर नहीं दिया जा रहा था।
द्वारिकापुरी निवासी पप्पू सिंह ने बताया कि उन्हें ठीक से मोबाइल चलाना भी नहीं आता है, ऐसे में वह खुद ओटीपी निकालकर कैसे दें। गैस एजेंसी पर आने के बाद उन्होंने अपना मोबाइल वहां के संचालक को सौंपा, तब संचालक ने खुद मोबाइल से ओटीपी निकाली और इसके बाद ही उन्हें गैस सिलिंडर मिल सका।
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वहीं, रानी नगर निवासी आरती ने बताया कि उनके गैस कनेक्शन में पति गोविंद का मोबाइल नंबर दर्ज है, जो वर्तमान में गुजरात में रहकर नौकरी करते हैं। मोबाइल भी उन्हीं के पास रहता है। रात में ड्यूटी करने के कारण वे दिन में सो गए, जिसके चलते उनके फोन पर आया ओटीपी नहीं मिल सका। इस वजह से आरती को तीन घंटे तक गैस एजेंसी पर सिर्फ ओटीपी के लिए परेशान होना पड़ा। गैस एजेंसी संचालक प्रकाश निधि गर्ग, अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि उपभोक्ताओं की खातिर प्रशासन और गैस कंपनियों से इस जटिल व्यवस्था को सरल बनाने की अपील है।
दौलतपुर (नई आबादी) निवासी मनोज कुमार ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनका गैस कनेक्शन करीब 10 साल पुराना है। कनेक्शन लेते वक्त जो मोबाइल नंबर था, वही उनके खाते से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में रिचार्ज न होने के अभाव में वह नंबर बंद हो चुका था। अब सिर्फ गैस सिलिंडर का ओटीपी प्राप्त करने के लिए उन्हें जबरन 350 रुपये का मोबाइल रिचार्ज कराना पड़ा, क्योंकि बिना ओटीपी दिए गैस एजेंसी से सिलिंडर नहीं दिया जा रहा था।
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द्वारिकापुरी निवासी पप्पू सिंह ने बताया कि उन्हें ठीक से मोबाइल चलाना भी नहीं आता है, ऐसे में वह खुद ओटीपी निकालकर कैसे दें। गैस एजेंसी पर आने के बाद उन्होंने अपना मोबाइल वहां के संचालक को सौंपा, तब संचालक ने खुद मोबाइल से ओटीपी निकाली और इसके बाद ही उन्हें गैस सिलिंडर मिल सका।
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