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Firozabad News: जिओ-स्टार का कंटेंट चुराकर परोस रहे थे बीओएस आईपीटीवी, प्राथमिकी दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Fri, 27 Mar 2026 11:21 PM IST
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सांकेतिक
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फिरोजाबाद। साइबर की दुनिया में सेंध लगाकर रिलायंस और स्टार जैसी दिग्गज कंपनियों को चूना लगाने वाले एक बड़े गिरोह का फिरोजाबाद कनेक्शन सामने आया है। बीओएस आईपीटीवी नाम से अवैध सेवा चलाकर जिओ-स्टार और जिओ-हॉटस्टार की कॉपीराइट सामग्री की चोरी करने वाले शातिर अपराधियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। इस गिरोह के तार फिरोजाबाद के साथ-साथ यूपी के कई जिलों और प्रदेशों तक जुड़े हुए हैं।
जिओ स्टार कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि हेमंत टंडन द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप है कि यह गिरोह बीओएस टीवी प्लेयर नाम से एक जाली एप के जरिए खेल, मनोरंजन और इन्फोटेनमेंट चैनलों का अवैध प्रसारण कर रहा था। विशेष रूप से आईसीसी पुरुष टी-20 विश्व कप 2026 के लाइव प्रसारण के अधिकार जो जिओ-स्टार के पास सुरक्षित थे, उन्हें यह गिरोह धड़ल्ले से स्ट्रीम कर रहा था। आरोपियों ने मात्र 400 रुपये में व्हाट्सएप के जरिए लॉगिन क्रेडेंशियल्स बेचकर करोड़ों की पायरेसी को अंजाम दिया।
विदेश में सर्वर और फिरोजाबाद में एजेंट
शिकायतकर्ता हेमंत टंडन ने प्राथमिकी में लिखाया है कि इस गैंग का जाल बहुत गहरा है। बीओएस आईपीटीवी के डिजिटल पदचिह्नों की जांच करने पर पता चला कि इसके डोमेन अमेरिका और सर्वर लक्जमबर्ग में होस्ट किए गए हैं। इस गैंग में फिरोजाबाद का विक्रम वफा मुख्य विक्रेता (आईपीटीवी सेलर) के रूप में काम कर रहा था। इसके अलावा अभिषेक निषाद, अफजल शेख और मधु दर्जी जैसे कई अन्य लोग भी इस अवैध नेटवर्क के अहम हिस्से हैं। हेमंत टंडन ने इनके मोबाइल नंबर और यूपीआई आईडी पुलिस को सौंप दिए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023, आईटी एक्ट और कॉपीराइट अधिनियम 1957 की संगीन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
ऐसे पकड़ा गया पायरेसी का यह खेल
जिओ-स्टार की टेक्निकल टीम ने ग्राहक बनकर गिरोह से संपर्क किया। व्हाट्सएप नंबर पर चैट की गई और यूपीआई के जरिए 400 रुपये भेजे। जैसे ही लॉगिन मिला, गिरोह के वित्तीय लेनदेन का कच्चा चिट्ठा पुलिस के हाथ लग गया। विशेषज्ञों ने कई उच्च-स्तरीय सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर नेटवर्क ट्रैफिक को जांचा। इसमें पाया गया कि एप सिर्फ एक मुखौटा है, जबकि कंटेंट अवैध सर्वरों से चोरी कर लाया जा रहा है। साइबर सेल अब आरोपियों के बैंक खातों और यूपीआई आईडी को फ्रीज करने की तैयारी में है। पुलिस उन सभी वेबसाइट्स को भी ब्लॉक करने पर काम कर रही है।
मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। जल्द ही इस गिरोह का खुलासा किया जाएगा।
- चंचल त्यागी, सीओ साइबर क्राइम
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जिओ स्टार कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि हेमंत टंडन द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप है कि यह गिरोह बीओएस टीवी प्लेयर नाम से एक जाली एप के जरिए खेल, मनोरंजन और इन्फोटेनमेंट चैनलों का अवैध प्रसारण कर रहा था। विशेष रूप से आईसीसी पुरुष टी-20 विश्व कप 2026 के लाइव प्रसारण के अधिकार जो जिओ-स्टार के पास सुरक्षित थे, उन्हें यह गिरोह धड़ल्ले से स्ट्रीम कर रहा था। आरोपियों ने मात्र 400 रुपये में व्हाट्सएप के जरिए लॉगिन क्रेडेंशियल्स बेचकर करोड़ों की पायरेसी को अंजाम दिया।
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विदेश में सर्वर और फिरोजाबाद में एजेंट
शिकायतकर्ता हेमंत टंडन ने प्राथमिकी में लिखाया है कि इस गैंग का जाल बहुत गहरा है। बीओएस आईपीटीवी के डिजिटल पदचिह्नों की जांच करने पर पता चला कि इसके डोमेन अमेरिका और सर्वर लक्जमबर्ग में होस्ट किए गए हैं। इस गैंग में फिरोजाबाद का विक्रम वफा मुख्य विक्रेता (आईपीटीवी सेलर) के रूप में काम कर रहा था। इसके अलावा अभिषेक निषाद, अफजल शेख और मधु दर्जी जैसे कई अन्य लोग भी इस अवैध नेटवर्क के अहम हिस्से हैं। हेमंत टंडन ने इनके मोबाइल नंबर और यूपीआई आईडी पुलिस को सौंप दिए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023, आईटी एक्ट और कॉपीराइट अधिनियम 1957 की संगीन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
ऐसे पकड़ा गया पायरेसी का यह खेल
जिओ-स्टार की टेक्निकल टीम ने ग्राहक बनकर गिरोह से संपर्क किया। व्हाट्सएप नंबर पर चैट की गई और यूपीआई के जरिए 400 रुपये भेजे। जैसे ही लॉगिन मिला, गिरोह के वित्तीय लेनदेन का कच्चा चिट्ठा पुलिस के हाथ लग गया। विशेषज्ञों ने कई उच्च-स्तरीय सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर नेटवर्क ट्रैफिक को जांचा। इसमें पाया गया कि एप सिर्फ एक मुखौटा है, जबकि कंटेंट अवैध सर्वरों से चोरी कर लाया जा रहा है। साइबर सेल अब आरोपियों के बैंक खातों और यूपीआई आईडी को फ्रीज करने की तैयारी में है। पुलिस उन सभी वेबसाइट्स को भी ब्लॉक करने पर काम कर रही है।
मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। जल्द ही इस गिरोह का खुलासा किया जाएगा।
- चंचल त्यागी, सीओ साइबर क्राइम