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Firozabad News: पार्षद 15 लाख रुपये तक के वार्डों में करा सकेंगे काम

संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Sun, 29 Mar 2026 11:22 PM IST
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Councillors can get work done in their wards up to Rs 15 lakh.
बोर्ड बैठक के दौरान मंचासीन सभापति महापौर व नगर आयुक्त। संवाद - फोटो : बोर्ड बैठक के दौरान मंचासीन सभापति महापौर व नगर आयुक्त। संवाद
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फिरोजाबाद। नगर निगम के जीवाराम हॉल में रविवार को आयोजित बोर्ड बैठक में विकास की नई इबारत लिखी गई। तमाम शोर-शराबे और तीखी नोकझोंक के बीच महापौर कामिनी राठौर की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 6.33 अरब रुपये का बजट पास किया गया। सदन ने आगामी वर्ष में 8 अरब 55 करोड़ 9 लाख रुपये की आय का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इसके अतिरिक्त, कर निर्धारण एवं अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं से संबंधित कुल 19 प्रस्ताव सदन के पटल पर रखे गए। चर्चा के बाद इन सभी प्रस्तावों को भी सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान कर दी गई। राज्य वित्त के 5 करोड़ के बजट को बढ़ाकर 25 करोड़ कर दिया गया है। प्रत्येक पार्षद को अपने क्षेत्र में 15 लाख तक के विकास कार्यों का प्रस्ताव देने का अधिकार दिया गया।
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बैठक की शुरुआत नवनियुक्त नामित पार्षदों के शपथ ग्रहण के साथ हुई। शपथ के तुरंत बाद विपक्षी पार्षदों ने महिला पार्षदों को सदन की अगली पंक्तियों में न बैठाने पर विरोध जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सदन में महिला सम्मान के नारों के बीच कुछ देर तक कार्यवाही बाधित रही। महापौर के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद ही बजट पर चर्चा शुरू हो सकी।
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नगर निगम ने शहरवासियों को बड़ी सौगात देते हुए 31 मार्च 2026 तक बकाया जल मूल्य और संपत्ति कर जमा करने पर 20 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पालीवाल हॉल का किराया भी संशोधित किया गया है। अब सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए 11 हजार और अन्य निजी आयोजनों के लिए 21 हजार रुपये शुल्क देय होगा। सदन में सफाई व्यवस्था को लेकर पार्षदों ने अधिकारियों को जमकर घेरा। वार्ड 20 सहित कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि सफाई निरीक्षक फोन नहीं उठाते और कर्मचारी गलियों में नहीं पहुंचते। इस पर महापौर ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि प्रतिदिन सुबह 7 बजे अधिकारी स्वयं वार्डों में जाकर अटेंडेंस चेक करेंगे। वहीं, पार्षदों के रिश्तेदार कई पदों पर अवैध कब्जे की शिकायत पर नगर आयुक्त प्रशांत नागर ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। देर शाम 7:30 बजे तक चली बैठक में भाजपा पार्षदों की एकजुटता के कारण बजट बिना किसी कटौती के पास हो गया।
नगर आयुक्त प्रशांत नागर और महापौर कामिनी राठौर ने अंत में आश्वासन दिया कि बजट की पाई-पाई शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में खर्च की जाएगी। नगर आयुक्त ने बताया कि अटल पार्क और भूल-भुलैया के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बैठक में भाजपा पार्षद बजट के समर्थन में एकमत नजर आए, जिससे विपक्ष को घेरने का अधिक मौका नहीं मिला।










क्लीन एयर प्रोजेक्ट:

प्रदूषण कम करने और धूल मुक्त सड़कों के लिए 50 करोड़ रुपये राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत आवंटित किए गए।



स्मार्ट सिटी व सीएम ग्रिड:

स्मार्ट सिटी योजनाओं के लिए 50 करोड़ और सीएम ग्रिड योजना (मुख्य सड़कों के सुदृढ़ीकरण) के लिए 72 करोड़ रुपये मंजूर हुए।



सोलर सिटी:

शहर के चौराहों और प्रमुख स्थानों को रोशन करने के लिए 3 करोड़ रुपये की सोलर लाइटें लगाई जाएंगी।




संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करने की मांग

नामित पार्षद उदय प्रताप सिंह ने रसूलपुर स्मार्ट रोड का कार्य 2 साल से अधूरा होने पर कड़ी आपत्ति जताई। सदन में मांग उठी कि कार्य में देरी करने वाली संस्थाओं को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही, शहर में आवारा कुत्तों और बंदरों के आतंक तथा घंटाघर जैसे ऐतिहासिक स्मारकों की बदहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से गूंजा।




9 नामित पार्षदों ने ली शपथ, एक अनुपस्थित

नामित पार्षद शिलांत जैन, पंकज अग्रवाल, सूरज पाल, मनोरमा प्रजापति, केशवदेव शंखवार, उदयप्रताप सिंह, दिलीप कठेरिया, हरिओम वर्मा और निर्मल शर्मा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। नामित पार्षद मधुरिमा गुप्ता बैठक में अनुपस्थित रहीं।








अब आसान होगा नाम परिवर्तन, नगर निगम ने जारी की पारदर्शी शुल्क तालिका

- संपत्ति के क्षेत्रफल और मूल्य के आधार पर तय हुआ प्रभार, बिचौलियों से मिलेगी मुक्ति

- नगर आयुक्त को गलत तथ्यों पर संशोधन निरस्त करने का अधिकार, पारदर्शिता पर जोर

संवाद न्यूज एजेंसी

फिरोजाबाद। नगर निगम ने आम जनता की सुविधा और राजस्व प्रणाली में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से नाम परिवर्तन (म्यूटेशन) और कर निर्धारण सूची में संशोधन के लिए नई प्रभार दरें लागू कर दी हैं। बोर्ड बैठक में पारित इन नई दरों से अब नागरिकों को अपनी संपत्ति के हस्तांतरण या विवरण में सुधार के लिए स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी, जिससे कार्यालयों के चक्कर काटने और बिचौलियों के चंगुल से राहत मिलेगी।

यदि कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों की संपत्ति का नाम परिवर्तन विधिक उत्तराधिकार या पंजीकृत वसीयत के आधार पर कराना चाहता है, तो उसे क्षेत्रफल के अनुसार शुल्क देना होगा। 1000 वर्गफीट तक के लिए मात्र 1000 रुपये, 1001 से 2000 वर्ग फीट तक के लिए 2000 रुपये, 2001 से 3000 वर्ग फीट तक के लिए 3000 रुपये और 3000 वर्ग फीट से अधिक पर 5000 रुपये फीस देय होगी।

संपत्ति के क्रय-विक्रय या अन्य माध्यमों से नाम परिवर्तन कराने पर संपत्ति के मूल्य (सर्किल रेट या रजिस्ट्री मूल्य) के आधार पर प्रभार देय होगा। 5 लाख रुपये तक की संपत्ति पर 1000 रुपये, 5 लाख से 10 लाख रुपये तक 2000 रुपये, 10 लाख से 15 लाख रुपये तक 3000 रुपये, 15 लाख से 50 लाख रुपये तक 5000 रुपये, 50 लाख रुपये से ऊपर की संपत्ति पर 10000 रुपये फीस देय होगी। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी संपत्ति के नाम परिवर्तन में पहले के कई हस्तांतरण लंबित हैं तो प्रत्येक मध्यवर्ती विक्रय पर निर्धारित धनराशि का 25 फीसदी अतिरिक्त प्रभार देना होगा।

नया नियम नगर निगम को यह शक्ति प्रदान करता है कि यदि कोई व्यक्ति गलत तथ्यों या छल-कपट से नाम परिवर्तन कराता है, तो नगर आयुक्त उसे निरस्त कर सकते हैं। वहीं, यदि कोई नागरिक नगर आयुक्त के निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो उसे 30 दिन के भीतर अपील करने का अधिकार भी दिया गया है।



पुलिस रही सक्रिय, महिला पार्षद ने दी थी पेट्रोल उड़ेलने की धमकी

एक महिला पार्षद द्वारा हंगामे की सूचना पर पुलिस ने उसे निगरानी में रखा। सदन तक निगरानी में लाया गया। दरअसल, भाजपा से जुड़ी महिला पार्षद ने एलान किया था कि उसके वार्ड में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। इस पर उसने खुद पर पेट्रोल डालने की धमकी दी थी। इसके मद्देनजर पुलिस व एलआईयू सक्रिय रही। हालांकि जांच एजेंसियों की बात में यह भी सामने आया है कि महिला पार्षद को एक पार्षद व उसके गुट के लोगों ने बहकाया था। इधर, हंगामे की स्थिति को देखते हुए इंस्पेक्टर अंजीश कुमार सिंह खुद फोर्स के साथ तैनात रहे।



काम रुकवाने की परंपरा खत्म करने पर नगर आयुक्त की सराहना
पार्षद नरेश शर्मा नीटू ने सदन में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में नगर आयुक्त के प्रयासों की सराहना की, वहीं दूसरी ओर कुछ अधीनस्थ अधिकारियों पर सदन में झूठ बोलने और जांच को दबाने का सीधा आरोप लगाया। कहा कि पूर्व में अधिकारी अक्सर काम टाल देते थे, लेकिन वर्तमान नगर आयुक्त के आने के बाद यह प्रथा बंद हुई है। सदन में चर्चा के दौरान पार्षद ने जेई गोविंद पर तीन फर्मों के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया।
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