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लाभचंद मार्केट विवाद: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, डीएम समेत आठ अफसर फंसे; बचाव का रास्ता तलाशने में जुटी कमेटी

संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Sun, 12 Apr 2026 01:06 PM IST
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सार

आगरा के राजा की मंडी स्थित लाभचंद्र मार्केट विवाद में अधिकारी भी फंस गए हैं। शपथपत्र दे चुके अधिकारी पीछे हटने की भी स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में तीन सदस्यीय कमेटी के जरिये नक्शे की खोज से लेकर जमीन राज्य सरकार की होने और पट्टा निरस्त जैसी दलील तैयार की जा रही है।
 

Eight Officials Entangled in Agra Labhchand Market Dispute
लाभचंद मार्केट विवाद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

सर्वोच्च अदालत के आदेश की नाफरमानी में फंसे प्रशासनिक अधिकारियों को 4 मई को यह बताना है कि उन्होंने कोर्ट के अतिक्रमण ध्वस्त करने के आदेश को लागू क्यों नहीं किया? इस आदेश को लागू करने से पहले लापता पुराने रिकाॅर्ड की गुत्थी सुलझाने के लिए अब एडीएम स्तर के तीन अधिकारियों की एक कमेटी गठित की गई है। यह पुराने नक्शे से लेकर अन्य गायब दस्तावेज के बारे में रिपोर्ट तैयार करेगी। कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है। राजस्व बोर्ड से लेकर कलेक्ट्रेट के रिकाॅर्ड रूम के हर पन्ने को खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही किराया प्राधिकरण के लगातार दुकानों के किराया निर्धारित करने को लेकर भी जवाब तैयार किया जा रहा है। 
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दरअसल, राजा की मंडी स्थित लाभचंद्र मार्केट का रेंट कंट्रोल से जुड़ा मामला मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में अतिक्रमण हटाने पर पहुंच चुका है। चूंकि विवाद की शुरूआत किराया निर्धारण के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती तक गई और वहां से हारने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील पर पहुंच गई।
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अब शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप और डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी सहित आठ अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। जिलाधिकारी ने खुद ही 2 फरवरी को कोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर माना था कि विवादित भूमि सरकारी है और वहां फुटपाथ व रास्ते पर अवैध कब्जा है। इसके बावजूद प्रशासन 3 फरवरी को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस महादेवन की बेंच के कार्रवाई के आदेश दो हफ्ते में लागू नहीं करा सका।

 

इसके पीछे गायब नक्शे और दस्तावेज को वजह माना जा रहा है। हालांकि शपथपत्र दे चुके अधिकारी पीछे हटने की भी स्थिति में नहीं हैं। फिलहाल अधिकारी आधिकारिक रूप से नोटिस के मिलने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन असल में तीन सदस्यीय कमेटी के जरिये नक्शे की खोज से लेकर जमीन राज्य सरकार की होने और पट्टा निरस्त जैसी दलील तैयार की जा रही है। एडीएम नागरिक आपूर्ति अजय नारायण सिंह ने कहा कि अभी तक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उसके मिलने पर निर्धारित तिथि तक जवाब दाखिल किया जाएगा।

पैमाइश पर निशान लगाकर बैठ गए
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह नजूल भूमि सड़क के नाम दर्ज है। इस मामले में दुकानदार अमरजोत सूरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 3 फरवरी को आदेश दिया था कि दो सप्ताह के भीतर सड़क की पैमाइश कर अतिक्रमण हटाया जाए। आदेश के पालन की अंतिम तिथि 17 फरवरी थी। 10 फरवरी को एडीएम प्रोटोकॉल की अध्यक्षता वाली समिति ने पैमाइश कर निशान तो लगाए, लेकिन उसके बाद कोई ध्वस्तीकरण नहीं हुआ। आदेश के 26 दिन बीत जाने के बाद भी नतीजा शून्य रहने पर 24 फरवरी को अवमानना याचिका दायर कर दी गई।

 

इन अधिकारियों के विरुद्ध याचिका
अरविंद मल्लप्पा बंगारी (जिलाधिकारी), नगेंद्र प्रताप (मंडलायुक्त), अंकित खंडेलवाल (नगरायुक्त), पी. गुरु प्रसाद (प्रमुख सचिव, नगर नियोजन), प्रशांत तिवारी (एडीएम प्रोटोकॉल), अजय नारायण सिंह (एडीएम सिविल सप्लाई), सचिन राजपूत (एसडीएम सदर), श्रद्धा पांडेय (सहायक अपर नगरायुक्त)।


 
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