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Firozabad News: मनरेगा में अटका 80 करोड़ का भुगतान, सप्लायरों के साथ स्टाफ भी बेहाल
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 03 Feb 2026 12:52 AM IST
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मनरेगा योजना में काम करते श्रमिक। फाइल फोटो
- फोटो : मनरेगा योजना में काम करते श्रमिक। फाइल फोटो
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फिरोजाबाद। जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कराए गए विकास कार्यों का भुगतान पिछले तीन वर्षों से अधर में लटका हुआ है। करीब 80.93 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है, जिसके कारण निर्माण सामग्री की आपूर्ति करने वाले दुकानदारों और कार्यदायी संस्थाओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि योजना को जमीन पर उतारने वाले स्टाफ को भी पिछले कई महीनों से मानदेय नहीं मिल सका है।
मनरेगा के तहत गांवों में चकरोड, तालाब खुदाई और पौधारोपण जैसे कच्चे कार्यों के साथ-साथ नाली निर्माण, सीसी रोड, आंगनबाड़ी केंद्र और सरकारी दुकानों के भवन जैसे पक्के निर्माण भी कराए जाते हैं। इन पक्के कार्यों के लिए खरीदी गई ईंट, सीमेंट, बालू और सरिया का भुगतान अटक गया है। विभागीय के अनुसार, श्रमिकों (कच्चे काम) का भुगतान तो समय से किया जा रहा है, लेकिन सामग्री और मानदेय का बजट फंसा हुआ है।
वर्षवार बकाया धनराशि का विवरण
वर्ष 2023-24: 1.05 करोड़ रुपये
वर्ष 2024-25: 52.60 करोड़ रुपये
वर्ष 2025-26: 27.28 करोड़ रुपये
कुल बकाया: 80.93 करोड़ रुपये
6 माह से मानदेय को तरस रहा स्टाफ
विकास खंडों में तैनात मनरेगा स्टाफ की हालत भी खस्ता है। अधिकारियों और कर्मचारियों को पिछले करीब छह माह से मानदेय नहीं मिला है। इसके चलते विभागीय काम-काज पर भी असर पड़ रहा है। सप्लायर और संस्थाओं के प्रतिनिधि भुगतान की उम्मीद में रोजाना विकास भवन के चक्कर काट रहे हैं।
बोले जिम्मेदार
इस संबंध में उपायुक्त मनरेगा सुभाषचंद्र का कहना है कि श्रमिकों का भुगतान प्राथमिकता पर तत्काल किया जा रहा है। पोर्टल और डोंगल आदि की प्रणाली में तकनीकी बदलाव किए जाने के कारण पक्के कार्यों और कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान रुका है। बजट आवंटन होते ही भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराई जाएगी।
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मनरेगा के तहत गांवों में चकरोड, तालाब खुदाई और पौधारोपण जैसे कच्चे कार्यों के साथ-साथ नाली निर्माण, सीसी रोड, आंगनबाड़ी केंद्र और सरकारी दुकानों के भवन जैसे पक्के निर्माण भी कराए जाते हैं। इन पक्के कार्यों के लिए खरीदी गई ईंट, सीमेंट, बालू और सरिया का भुगतान अटक गया है। विभागीय के अनुसार, श्रमिकों (कच्चे काम) का भुगतान तो समय से किया जा रहा है, लेकिन सामग्री और मानदेय का बजट फंसा हुआ है।
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वर्षवार बकाया धनराशि का विवरण
वर्ष 2023-24: 1.05 करोड़ रुपये
वर्ष 2024-25: 52.60 करोड़ रुपये
वर्ष 2025-26: 27.28 करोड़ रुपये
कुल बकाया: 80.93 करोड़ रुपये
6 माह से मानदेय को तरस रहा स्टाफ
विकास खंडों में तैनात मनरेगा स्टाफ की हालत भी खस्ता है। अधिकारियों और कर्मचारियों को पिछले करीब छह माह से मानदेय नहीं मिला है। इसके चलते विभागीय काम-काज पर भी असर पड़ रहा है। सप्लायर और संस्थाओं के प्रतिनिधि भुगतान की उम्मीद में रोजाना विकास भवन के चक्कर काट रहे हैं।
बोले जिम्मेदार
इस संबंध में उपायुक्त मनरेगा सुभाषचंद्र का कहना है कि श्रमिकों का भुगतान प्राथमिकता पर तत्काल किया जा रहा है। पोर्टल और डोंगल आदि की प्रणाली में तकनीकी बदलाव किए जाने के कारण पक्के कार्यों और कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान रुका है। बजट आवंटन होते ही भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराई जाएगी।
