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Firozabad News: पहली अर्जी खारिज होने की बात छुपाकर दोबारा मांगी अग्रिम जमानत, कोर्ट ने किया निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 19 May 2026 11:36 PM IST
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फिरोजाबाद। न्यायालय सत्र न्यायाधीश डा. बब्बू सारंग की कोर्ट ने डिलाइट ग्लास इंडस्ट्रीज की संपत्ति हड़पने और धोखाधड़ी के मामले में आरोपी सुनील शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका को सख्त रुख अपनाते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने पाया कि आरोपी ने अपनी पहली अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने की बात छुपाकर, कोर्ट में झूठा शपथ पत्र देकर इसे अपनी प्रथम याचिका बताया था।
वादी किशोर शर्मा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के माध्यम से थाना दक्षिण में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि वह अपने पिता द्वारा स्थापित डिलाइट ग्लास इंडस्ट्रीज का भागीदार व वारिस है। इस फर्म में उसके साथ अनिल कुमार शर्मा और आरोपी सुनील शर्मा भी भागीदार थे। पिता की मृत्यु के बाद, आरोपी सुनील शर्मा ने कथित रूप से धोखाधड़ी और षड्यंत्र रचते हुए जीएसटी विभाग से खुद को प्रोपराइटर दर्शाकर एक फर्जी जीएसटी नंबर प्राप्त कर लिया ताकि फर्म को हड़पा जा सके। फर्जी नंबर के आधार पर आरोपी ने आईडीबीआई बैंक में खाता खोला और वादी व अन्य हिस्सेदारों की अनुमति के बिना फर्म के व्यापारियों से लाखों रुपये अपने खाते में मंगाकर हड़प लिए। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी की पहली अग्रिम जमानत याचिका एडीजे-1 द्वारा 6 नवंबर 2025 को ही खारिज की जा चुकी है। इसके बावजूद आरोपी ने मौजूदा याचिका के शपथ पत्र में यह झूठ लिखा कि यह उसकी पहली अर्जी है और कहीं कोई अन्य याचिका खारिज या विचाराधीन नहीं है। सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग ने अपने आदेश में कहा, केस डायरी के साक्ष्य और पुलिस की चार्जशीट से स्पष्ट है कि आरोपी पर गंभीर प्रकृति के आरोप हैं। आरोपी द्वारा पहली याचिका खारिज होने की बात छुपाना और विचारण न्यायालय के मामले में सहयोग न करना यह दर्शाता है कि अग्रिम जमानत देने से मामले के और लंबित होने की संभावना बढ़ेगी। जमानत का कोई पर्याप्त आधार नहीं है।
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