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हत्या का मास्टरमाइंड निकला पड़ोसी: छाती में घोंपा सूजा, हाथ-पैर बांधकर उतारे जेवर; दो मुठभेड़ में गिरफ्तार
Tue, 04 Aug 2026 06:01 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: Arun Parashar
Updated Tue, 04 Aug 2026 06:01 AM IST
सार
सरोज देवी अपने घर के पास खाली दुकान और कमरा किराए पर देना चाहती थीं। सराफा कारोबारी आकाश को इस बात का पता था। उसने अपने रिश्तेदार के दोस्त मोहित और उसके साथी लक्की को साथ मिलाकर लूट की योजना बनाई। आकाश दोनों आरोपियों को किराएदार बनाकर सरोज देवी के घर ले गया।
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मृतक का फाइल फोटो व पकड़े गए आरोपी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
फिरोजाबाद के मक्खनपुर थाना क्षेत्र में स्टेशन रोड निवासी 52 वर्षीय विधवा सरोज देवी की 23 जुलाई को हुई सनसनीखेज लूट और हत्या की वारदात का मास्टरमाइंड मृतका का पड़ोसी सराफा कारोबारी ही निकला। उसने आगरा में रहने वाले एक पुलिसकर्मी (दीवान) के बेटे और उसके ढाबा संचालक दोस्त के साथ मिलकर इस खूनी खेल की पटकथा रची थी। रविवार देर रात बिल्टीगढ़ी चौराहे के पास हुई मुठभेड़ के बाद पुलिस ने सराफा कारोबारी और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया। जवाबी कार्रवाई में दोनों के पैरों में गोली लगी है, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, मुख्य हत्यारोपी पुलिसकर्मी का बेटा मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
एसएसपी आदित्य लांग्हे ने बताया कि रविवार देर रात मक्खनपुर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि वारदात में शामिल बदमाश बिल्टीगढ़ी चौराहे के पास मौजूद हैं। पुलिस ने घेराबंदी की तो बिना नंबर की बाइक पर सवार बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में कालिंदी विहार, टेढ़ी बगिया, आगरा निवासी ढाबा संचालक लक्की और मक्खनपुर के सदर बाजार निवासी सराफा कारोबारी आकाश उर्फ हनुमान के पैर में गोली लगी और वे धर दबोचे गए। इनका तीसरा साथी मोहित हाल निवासी टेढ़ी बगिया, आगरा व मूल निवासी इटावा शहर फरार है। मोहित के पिता कानपुर देहात में पुलिस विभाग में दीवान के पद पर तैनात हैं।
किराएदार बनने का ढोंग रच दिया था वारदात को अंजाम
मुठभेड़ के बाद इंस्पेक्टर चमन शर्मा द्वारा अस्पताल में जाकर की गई पूछताछ में सराफा कारोबारी आकाश ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि मृतका सरोज देवी के पति दिवंगत रामवकील स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट थे। उनकी मौत के बाद उनके बेटे अभय प्रताप को खैरगढ़ सीएचसी में नौकरी मिल गई थी। बेटा पत्नी संग वहीं किराए पर रहता है और सरोज देवी घर में अकेली रहती थीं। सरोज देवी अपने घर के पास खाली दुकान और कमरा किराए पर देना चाहती थीं। सराफा कारोबारी आकाश को इस बात का पता था। उसने अपने रिश्तेदार के दोस्त मोहित और उसके साथी लक्की को साथ मिलाकर लूट की योजना बनाई। आकाश दोनों आरोपियों को किराएदार बनाकर सरोज देवी के घर ले गया।
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एसएसपी आदित्य लांग्हे ने बताया कि रविवार देर रात मक्खनपुर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि वारदात में शामिल बदमाश बिल्टीगढ़ी चौराहे के पास मौजूद हैं। पुलिस ने घेराबंदी की तो बिना नंबर की बाइक पर सवार बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में कालिंदी विहार, टेढ़ी बगिया, आगरा निवासी ढाबा संचालक लक्की और मक्खनपुर के सदर बाजार निवासी सराफा कारोबारी आकाश उर्फ हनुमान के पैर में गोली लगी और वे धर दबोचे गए। इनका तीसरा साथी मोहित हाल निवासी टेढ़ी बगिया, आगरा व मूल निवासी इटावा शहर फरार है। मोहित के पिता कानपुर देहात में पुलिस विभाग में दीवान के पद पर तैनात हैं।
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किराएदार बनने का ढोंग रच दिया था वारदात को अंजाम
मुठभेड़ के बाद इंस्पेक्टर चमन शर्मा द्वारा अस्पताल में जाकर की गई पूछताछ में सराफा कारोबारी आकाश ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि मृतका सरोज देवी के पति दिवंगत रामवकील स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट थे। उनकी मौत के बाद उनके बेटे अभय प्रताप को खैरगढ़ सीएचसी में नौकरी मिल गई थी। बेटा पत्नी संग वहीं किराए पर रहता है और सरोज देवी घर में अकेली रहती थीं। सरोज देवी अपने घर के पास खाली दुकान और कमरा किराए पर देना चाहती थीं। सराफा कारोबारी आकाश को इस बात का पता था। उसने अपने रिश्तेदार के दोस्त मोहित और उसके साथी लक्की को साथ मिलाकर लूट की योजना बनाई। आकाश दोनों आरोपियों को किराएदार बनाकर सरोज देवी के घर ले गया।
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22 जुलाई को हत्या की मंशा थी, लेकिन पड़ोसियों की आवाजाही के कारण मौका नहीं मिला। 23 जुलाई की सुबह 11:40 बजे फिर पहुंचे। पहचान होने के कारण सरोज देवी ने तुरंत दरवाजा खोल दिया। अंदर घुसते ही गेट बंद कर दिया। लक्की ने सरोज देवी का मुंह दबाया और मोहित ने सूजा उनकी छाती में घोंप दिया। इसके बाद उनके हाथ-पैर बांधकर पहने हुए जेवर उतार लिए। ऊपरी मंजिल पर खुली तिजोरी से 7 हजार रुपये नकदी व अन्य जेवर समेट लिए। लूट के बाद सराफा कारोबारी की दुकान के सामने से नया ताला खरीदा और सरोज देवी के मुख्य द्वार पर लटका दिया ताकि किसी को तुरंत शक न हो। आकाश ने बताया कि 24 जुलाई को जब सरोज देवी के घर पुलिस पहुंची, तो सराफा कारोबारी उसने अपने साथियों को आगाह कर दिया था। मोहित इटावा भाग गया और लक्की आगरा में छिप गया। रविवार रात मक्खनपुर इलाके में लूट के माल और नकदी के बंटवारे के लिए इकट्ठा हुए थे, तभी पुलिस की गिरफ्त में आ गए।
यह हुई बरामदगी
मृतका के 2 सोने के कंगन और 2 अंगूठियां, एसबीआई का एटीएम कार्ड और मृतका का पहचान पत्र, 2 तमंचे, 3 कारतूस खोखा और 2 कारतूस, वारदात में इस्तेमाल बिना नंबर प्लेट की बाइक।
मृतका के 2 सोने के कंगन और 2 अंगूठियां, एसबीआई का एटीएम कार्ड और मृतका का पहचान पत्र, 2 तमंचे, 3 कारतूस खोखा और 2 कारतूस, वारदात में इस्तेमाल बिना नंबर प्लेट की बाइक।
महंगे शौक और जल्द अमीर बनने की चाहत ने बनाया कातिल
सरोज देवी को चाची कहने वाला पड़ोसी सराफा कारोबारी आकाश उर्फ हनुमान कितना शातिर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वारदात के बाद वह उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुआ और वहां सबसे ज्यादा रोने का नाटक किया, ताकि उस पर किसी को जरा भी शक न हो। आकाश बेहद लालची किस्म का है। वह पहले भी शातिर चोरों से सस्ते दामों में चोरी का माल खरीदने के मामले में पुलिस की रडार पर आ चुका था। उसे पूरा यकीन था कि सरोज देवी के घर से भारी मात्रा में नकदी और सोने-चांदी के जेवरात मिलेंगे। मोहित, पुलिसकर्मी का बेटा है। आगरा के टेढ़ी बगिया में पत्नी और बच्चों के साथ रहता है। मोहित वर्तमान में कोई काम-धंधा नहीं करता था। हालांकि, शराब और महंगे शौकों की लत ने उसे अपराध की दलदल में धकेल दिया। लक्की ढाबा संचालक है और आगरा के 100 फुटा रोड, कालिंदी बिहार में किराए का ढाबा चलाकर हर महीने 50 से 60 हजार रुपये की अच्छी-खासी कमाई कर रहा था। इसके बावजूद रातों-रात अमीर बनने के लालच में वह इस खूनी साजिश का हिस्सा बन गया।
सरोज देवी को चाची कहने वाला पड़ोसी सराफा कारोबारी आकाश उर्फ हनुमान कितना शातिर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वारदात के बाद वह उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुआ और वहां सबसे ज्यादा रोने का नाटक किया, ताकि उस पर किसी को जरा भी शक न हो। आकाश बेहद लालची किस्म का है। वह पहले भी शातिर चोरों से सस्ते दामों में चोरी का माल खरीदने के मामले में पुलिस की रडार पर आ चुका था। उसे पूरा यकीन था कि सरोज देवी के घर से भारी मात्रा में नकदी और सोने-चांदी के जेवरात मिलेंगे। मोहित, पुलिसकर्मी का बेटा है। आगरा के टेढ़ी बगिया में पत्नी और बच्चों के साथ रहता है। मोहित वर्तमान में कोई काम-धंधा नहीं करता था। हालांकि, शराब और महंगे शौकों की लत ने उसे अपराध की दलदल में धकेल दिया। लक्की ढाबा संचालक है और आगरा के 100 फुटा रोड, कालिंदी बिहार में किराए का ढाबा चलाकर हर महीने 50 से 60 हजार रुपये की अच्छी-खासी कमाई कर रहा था। इसके बावजूद रातों-रात अमीर बनने के लालच में वह इस खूनी साजिश का हिस्सा बन गया।