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Gonda News: सरयू में छोड़ा 66,860 क्यूसेक पानी, बढ़ी चिंता
Sat, 11 Jul 2026 01:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 11 Jul 2026 01:24 AM IST
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पानी के बीच से होकर गुजरते लोग।
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करनैलगंज/गोंडा। बारिश व बैराजों से छोड़े जा रहे हजारों क्यूसेक पानी से सरयू नदी उफान पर है। सरयू नदी का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर मामूली घटा है, लेकिन कटान ने तटवर्ती गांवों में चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अभी नदी किसानों की उपजाऊ जमीन को लील रही है जिससे तटबंध को कोई खतरा नहीं है। बाढ़ खंड का दावा है कि फिलहाल तटबंध सुरक्षित है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 104.89 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.07 मीटर से 1.18 मीटर नीचे है। बृहस्पतिवार की तुलना में जलस्तर में दो सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर अयोध्या में जलस्तर 90.90 मीटर से बढ़कर 91.04 मीटर पहुंच गया।
यहां 14 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि यह अभी भी खतरे के निशान से 1.69 मीटर नीचे है। शुक्रवार सुबह नदी का कुल डिस्चार्ज 66,860 क्यूसेक रहा। इसमें गिरिजा बैराज से 48,500 क्यूसेक, शारदा बैराज से 18,110 क्यूसेक और सरयू बैराज से 250 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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करनैलगंज के बहुवन मदार माझा में तटीय किसानों की कृषि योग्य भूमि नदी में समा रही है, जिससे ग्रामीण चिंतित है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड संवेदनशील स्थलों पर परक्यूपाइन लगाने और मैटी डालने का काम कर रहा है। बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता जय सिंह ने बताया कि फिलहाल नदी तटबंध से सुरक्षित दूरी पर है और बांध को तत्काल कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद विभाग पूरी सतर्कता के साथ बचाव कार्य करा रहा है तथा संवेदनशील स्थलों की लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ की सुरक्षा से जुड़े कार्यों में ढिलाई पर प्रमुख सचिव बिफरीं
गोंडा। प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा यू ने बाढ़ की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील प्रदेश के 18 जिलों में राहत एवं बचाव तैयारियों की समीक्षा करते हुए तटबंधों पर चल रहे कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि करीब 70 प्रतिशत कार्य ही पूरे हुए हैं, जबकि बाढ़ का खतरा सामने है। उन्होंने बैठक में मौजूद अफसरों को एक सप्ताह के भीतर सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए।शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार में प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा यू की अध्यक्षता तथा राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद की मौजूदगी में देवीपाटन, अयोध्या, लखनऊ, बस्ती, गोरखपुर और आजमगढ़ मंडलों के 18 बाढ़ संभावित जिलों में बाढ़ से पूर्व तैयारियों की समीक्षा की गई।
प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रदेश के 44 जिले व 118 तहसीलें बाढ़ से प्रभावित होती हैं, जिनमें 18 जिले अतिसंवेदनशील हैं। कहा कि अगले तीन दिनों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है। उन्होंने चेताया कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। बैठक में आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल, जिलाधिकारी गोंडा प्रियंका निरंजन, पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल, मुख्य विकास अधिकारी दयानंद प्रसाद, डीएम बलरामपुर विपिन चंद्र जैन सहित 18 बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रशासनिक अफसर माैजूद रहे।
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर 104.89 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 106.07 मीटर से 1.18 मीटर नीचे है। बृहस्पतिवार की तुलना में जलस्तर में दो सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर अयोध्या में जलस्तर 90.90 मीटर से बढ़कर 91.04 मीटर पहुंच गया।
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यहां 14 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि यह अभी भी खतरे के निशान से 1.69 मीटर नीचे है। शुक्रवार सुबह नदी का कुल डिस्चार्ज 66,860 क्यूसेक रहा। इसमें गिरिजा बैराज से 48,500 क्यूसेक, शारदा बैराज से 18,110 क्यूसेक और सरयू बैराज से 250 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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करनैलगंज के बहुवन मदार माझा में तटीय किसानों की कृषि योग्य भूमि नदी में समा रही है, जिससे ग्रामीण चिंतित है। कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड संवेदनशील स्थलों पर परक्यूपाइन लगाने और मैटी डालने का काम कर रहा है। बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता जय सिंह ने बताया कि फिलहाल नदी तटबंध से सुरक्षित दूरी पर है और बांध को तत्काल कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद विभाग पूरी सतर्कता के साथ बचाव कार्य करा रहा है तथा संवेदनशील स्थलों की लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ की सुरक्षा से जुड़े कार्यों में ढिलाई पर प्रमुख सचिव बिफरीं
गोंडा। प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा यू ने बाढ़ की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील प्रदेश के 18 जिलों में राहत एवं बचाव तैयारियों की समीक्षा करते हुए तटबंधों पर चल रहे कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि करीब 70 प्रतिशत कार्य ही पूरे हुए हैं, जबकि बाढ़ का खतरा सामने है। उन्होंने बैठक में मौजूद अफसरों को एक सप्ताह के भीतर सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए।शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार में प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा यू की अध्यक्षता तथा राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद की मौजूदगी में देवीपाटन, अयोध्या, लखनऊ, बस्ती, गोरखपुर और आजमगढ़ मंडलों के 18 बाढ़ संभावित जिलों में बाढ़ से पूर्व तैयारियों की समीक्षा की गई।
प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रदेश के 44 जिले व 118 तहसीलें बाढ़ से प्रभावित होती हैं, जिनमें 18 जिले अतिसंवेदनशील हैं। कहा कि अगले तीन दिनों में बाढ़ की स्थिति बन सकती है। उन्होंने चेताया कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। बैठक में आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल, जिलाधिकारी गोंडा प्रियंका निरंजन, पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल, मुख्य विकास अधिकारी दयानंद प्रसाद, डीएम बलरामपुर विपिन चंद्र जैन सहित 18 बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रशासनिक अफसर माैजूद रहे।