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Gonda News: मेडिकल कॉलेज में खुलेगा डे केयर कैंसर सेंटर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 25 Feb 2026 11:36 PM IST
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मेडिकल कॉलेज का भवन।
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गोंडा। कैंसर रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। अब इलाज के लिए उन्हें लखनऊ या दिल्ली जैसे बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। मेडिकल कॉलेज गोंडा में डे-केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। यहां प्रारंभिक चरण में मुंह (ओरल), सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) और ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों को कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
जिले और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के कैंसर मरीज इलाज के लिए लखनऊ, दिल्ली जैसे शहर जाते हैं। कीमोथेरेपी के लिए कई चक्रों में अस्पताल जाना पड़ता है, जिससे मरीज और उनके परिजनों पर आर्थिक व मानसिक बोझ बढ़ता है। नए सेंटर के शुरू होने से यात्रा खर्च में कमी आएगी। साथ ही बार-बार रेफरल की जरूरत घटेगी। समय पर इलाज शुरू होने के साथ ही मरीजों को स्थानीय स्तर पर निगरानी व परामर्श मिल सकेगा। मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक विभाग के रेजिडेंट डॉ. रजनीश प्रताप सिंह व डॉ. दीक्षा ने एनसीडी सेल के कर्मियों के साथ प्रस्तावित स्थल को लेकर मंथन किया है।
ऐसे काम करेगा डे-केयर कैंसर सेंटर
डे-केयर मॉडल के तहत मरीजों को दिन में कीमोथेरेपी दी जाएगी और निगरानी के बाद उन्हें घर भेज दिया जाएगा। केवल अत्यंत जटिल, सर्जरी या उन्नत रेडियोथेरेपी की आवश्यकता वाले मामलों को ही उच्च स्तरीय केंद्रों पर रेफर किया जाएगा। मास्टर ट्रेनर स्वास्थ्य कर्मियों को कीमोथेरेपी देने की तकनीक, दवाओं के सुरक्षित उपयोग, संभावित साइड इफेक्ट और आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण देंगे। इससे जिला स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस
ग्रामीण इलाकों में एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को कैंसर के शुरुआती लक्षणों जैसे मुंह में न भरने वाला घाव, स्तन में गांठ, असामान्य रक्तस्राव आदि की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। वे घर-घर जाकर जागरूकता फैलाएंगी और संदिग्ध मरीजों को समय पर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाने में मदद करेंगी। इससे बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान कर इलाज शुरू किया जा सकेगा।
बड़े केंद्रों का कम होगा दबाव
सरकार की मंशा है कि कैंसर जैसे गंभीर रोग का उपचार मरीज को घर के नजदीक उपलब्ध हो। डे-केयर कैंसर सेंटर की सफलता स्वास्थ्य कर्मियों के पूर्ण प्रशिक्षण और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। यह व्यवस्था लागू होने के बाद बड़े कैंसर संस्थानों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी।
डॉ. डीएन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक
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जिले और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के कैंसर मरीज इलाज के लिए लखनऊ, दिल्ली जैसे शहर जाते हैं। कीमोथेरेपी के लिए कई चक्रों में अस्पताल जाना पड़ता है, जिससे मरीज और उनके परिजनों पर आर्थिक व मानसिक बोझ बढ़ता है। नए सेंटर के शुरू होने से यात्रा खर्च में कमी आएगी। साथ ही बार-बार रेफरल की जरूरत घटेगी। समय पर इलाज शुरू होने के साथ ही मरीजों को स्थानीय स्तर पर निगरानी व परामर्श मिल सकेगा। मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक विभाग के रेजिडेंट डॉ. रजनीश प्रताप सिंह व डॉ. दीक्षा ने एनसीडी सेल के कर्मियों के साथ प्रस्तावित स्थल को लेकर मंथन किया है।
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ऐसे काम करेगा डे-केयर कैंसर सेंटर
डे-केयर मॉडल के तहत मरीजों को दिन में कीमोथेरेपी दी जाएगी और निगरानी के बाद उन्हें घर भेज दिया जाएगा। केवल अत्यंत जटिल, सर्जरी या उन्नत रेडियोथेरेपी की आवश्यकता वाले मामलों को ही उच्च स्तरीय केंद्रों पर रेफर किया जाएगा। मास्टर ट्रेनर स्वास्थ्य कर्मियों को कीमोथेरेपी देने की तकनीक, दवाओं के सुरक्षित उपयोग, संभावित साइड इफेक्ट और आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण देंगे। इससे जिला स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस
ग्रामीण इलाकों में एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को कैंसर के शुरुआती लक्षणों जैसे मुंह में न भरने वाला घाव, स्तन में गांठ, असामान्य रक्तस्राव आदि की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। वे घर-घर जाकर जागरूकता फैलाएंगी और संदिग्ध मरीजों को समय पर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाने में मदद करेंगी। इससे बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान कर इलाज शुरू किया जा सकेगा।
बड़े केंद्रों का कम होगा दबाव
सरकार की मंशा है कि कैंसर जैसे गंभीर रोग का उपचार मरीज को घर के नजदीक उपलब्ध हो। डे-केयर कैंसर सेंटर की सफलता स्वास्थ्य कर्मियों के पूर्ण प्रशिक्षण और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। यह व्यवस्था लागू होने के बाद बड़े कैंसर संस्थानों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी।
डॉ. डीएन सिंह, चिकित्सा अधीक्षक
