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Gonda News: आग से बचाव के इंतजाम पर जम गई धूल
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 23 Jun 2026 12:10 AM IST
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कोचिंग के लिए इसी तंग सीढि़यों से आते-जाते हैं विद्यार्थी।
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गोंडा। लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में आग लगने की घटना के बाद जिले के लोग भी अपने बच्चों की सलामती को लेकर डरे हुए हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में शहर के कई कोचिंग सेंटरों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखे। कहीं आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही सीढ़ी है तो कहीं संकरे रास्तों से आवागमन होता मिला। ऐसे में अगर हादसा हुआ तो स्थिति भयावह हो सकती है। अधिकारी भी कागजों में सब कुछ दुरुस्त होने का दावा कर देते हैं पर हकीकत इससे इतर है।
जिले में 120 पंजीकृत कोचिंग सेंटर संचालित हैं। इसके अलावा कई अन्य बिना पंजीकरण के भी चल रहे हैं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं, बोर्ड कक्षाओं और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की तैयारी कराई जाती है। इसके अलावा लाइब्रेरी और कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र भी बड़ी संख्या में संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई संस्थान बहुमंजिला भवनों के ऊपरी तल पर चल रहे हैं, लेकिन वहां आग से बचाव के इंतजाम नहीं हैं।
नियम है कि आने-जाने के रास्ते अलग-अलग होने चाहिए लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई जगहों पर एक ही सीढ़ी से सैकड़ों छात्र चढ़ते व उतरते हैं। आपात स्थिति में यही व्यवस्था जानलेवा साबित हो सकती है। कई संस्थानों में अग्निशमन यंत्र तो लगे हैं, लेकिन उन पर धूल जमी है। रखरखाव, वैधता और उपयोग को लेकर कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश स्थानों पर इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर भी नहीं मिले।
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छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि कोचिंग संस्थानों में हर वर्ष सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए। पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी संस्थानों की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों की जांच नहीं हुई तो किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. रामचंद्र ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा प्राथमिकता है। अग्निशमन विभाग के साथ मिलकर संस्थानों का निरीक्षण कराया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।
जिले में 120 पंजीकृत कोचिंग सेंटर संचालित हैं। इसके अलावा कई अन्य बिना पंजीकरण के भी चल रहे हैं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं, बोर्ड कक्षाओं और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की तैयारी कराई जाती है। इसके अलावा लाइब्रेरी और कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र भी बड़ी संख्या में संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई संस्थान बहुमंजिला भवनों के ऊपरी तल पर चल रहे हैं, लेकिन वहां आग से बचाव के इंतजाम नहीं हैं।
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नियम है कि आने-जाने के रास्ते अलग-अलग होने चाहिए लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई जगहों पर एक ही सीढ़ी से सैकड़ों छात्र चढ़ते व उतरते हैं। आपात स्थिति में यही व्यवस्था जानलेवा साबित हो सकती है। कई संस्थानों में अग्निशमन यंत्र तो लगे हैं, लेकिन उन पर धूल जमी है। रखरखाव, वैधता और उपयोग को लेकर कोई जानकारी नहीं है। अधिकांश स्थानों पर इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर भी नहीं मिले।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि कोचिंग संस्थानों में हर वर्ष सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए। पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी संस्थानों की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों की जांच नहीं हुई तो किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. रामचंद्र ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा प्राथमिकता है। अग्निशमन विभाग के साथ मिलकर संस्थानों का निरीक्षण कराया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।