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Gonda News: खेलते समय लापता हुए चार बच्चे, दूसरे दिन सरसों के खेत में मिले
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 17 Feb 2026 11:52 PM IST
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ढडुवा कुतुबजोत गांव में बच्चों के मिलने से खुश ग्रामीण व पुलिस, बच्चों को गोद में लिए पुलिसकर्म
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गौरा चौकी (गोंडा)। खोड़ारे के ढडुवा कुतुबजोत गांव में सोमवार शाम करीब 6:10 बजे मंदिर के पास खेल रहे चार बच्चे लापता हो गए। एसओजी समेत पुलिस की पांच टीमें पूरी रात तलाश में जुटी रहीं। देर रात तक पता नहीं चलने पर परिजनों ने मंगलवार सुबह अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई। मंगलवार दोपहर करीब 18 घंटे के बाद दोपहर 12 : 45 बजे बच्चे घर से लगभग 200 मीटर दूर सरसों के खेत में सुरक्षित मिले। मेडिकल के बाद उन्हें परिवार को सौंप दिया गया। पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के अनुसार बच्चों ने बताया कि डांट के डर से घर नहीं गए और सभी रात में खेत में ही सो गए।
गांव निवासी गोलू (11), विश्व प्रताप (7), रितेश शर्मा (6) व रिवांशु (6) सोमवार शाम मंदिर के पास खेल रहे थे। देर शाम तक जब वे घर नहीं पहुंचे, तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। बच्चों का पता नहीं चलने पर पुलिस को सूचना दी गई। एसपी विनीत जायसवाल ने ट्रेनी आईपीएस प्रदीप कुमार, सीओ तरबगंज डॉ. उमेश्वर प्रभात सिंह व एसओजी को मौके पर भेजा।
परिजनों से जानकारी लेने के बाद पुलिस टीम ने तलाश शुरू की। पूरी रात बच्चों का पता नहीं चला। इसपर विश्व प्रताप के बाबा ओमप्रकाश की तहरीर पर मंगलवार को अपहरण की प्राथमिकी दर्ज की गई। वहीं, पुलिस टीम ने बाग, आसपास के गांवों और संभावित मार्गों पर तलाशी जारी रखी। दोपहर में पुलिस टीम ने खेत में तलाश शुरू की तो चारों बच्चे घर से 200 मीटर की दूरी पर स्थित सरसों के खेत में मिल गए। उन्हें जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बभनजोत ले जाया गया। सीएचसी के डाॅ. अजय भारती ने बताया कि बच्चों की सेहत सही रही। मेडिकल के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया।
एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि सोमवार शाम बच्चों के लापता होने की सूचना पर टीमों को तलाश में लगाया। मंगलवार दोपहर में बच्चे सरसों के खेत से मिल गए। पुलिस टीम ने सोमवार पूरी रात काम किया। बच्चे स्वस्थ हैं। अपनों के बीच हैं।
तालाब में तलाशती रही एसडीआरएफ टीम
गांव के कुछ लोगों ने पुलिस को बताया कि बच्चे तालाब के पास खेलते देखे गए थे। इसके बाद रात में ही राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम बुलाई गई। पंपिंगसेट लगाकर तालाब का पानी कम कराया गया। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने तालाब में उतरकर तलाश की, लेकिन बच्चों का पता नहीं चला।
खेत में लगी मटर खाकर मिटाई भूख, हैंडपंप से पिया पानी
बच्चों की तलाश में जुटे इंस्पेक्टर यशवंत सिंह के मुताबिक कृष्णा उर्फ गोलू ने साथी बच्चों को बताया कि उसने पड़ोसी के बच्चे का खिलौना तोड़ दिया था, इसकी शिकायत पड़ोस वाली चाची ने उसकी अम्मा से की। अम्मा उससे नाराज हैं, इसलिए घर जाने पर उसकी पिटाई तय है। इसी डर से वह खुद तो खेत में रुका ही, साथ में तीनों बच्चों को भी रोक लिया। चारों ने खेत में लगी मटर खाकर भूख मिटाई और सरसों के खेत से 20 मीटर की दूरी पर आम के पेड़ के नीचे लगे हैंडपंप पर पानी पिया। इसके बाद खेत में ही सो गए। मंगलवार सुबह नींद खुली तो दोबारा मटर खाई। इसके बाद खेत में ही खेलने लगे।
सरसों के पीले फूलों के बीच से आवाज आई...बच्चे इधर हैं
गौरा चौकी। अनहोनी की आशंका के बीच मंगलवार दोपहर 12: 40 बजे तक ढडुवा कुतुबजोत गांव में सन्नाटा था, लेकिन लोग बेचैन थे। कोई मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा प्रार्थना कर रहा था, तो कोई खेत की मेड़ पर दूर तक नजरें गड़ाए था। 18 घंटे से लापता चार मासूमों की चिंता ने पूरे गांव को परिवार में बदल दिया था। तभी सरसों के पीले फूलों के बीच से एक आवाज आई...इधर हैं…बच्चे इधर हैं...।
आवाज सुनते ही लोग उधर दौड़ पड़े। खेत के बीचोंबीच चारों बच्चे बैठे थे। थके, लेकिन सुरक्षित। अगले ही पल ग्रामीणों की आंखें भर आईं। किसी ने रितेश को गोद में उठा लिया, कोई विश्व प्रताप को सीने से चिपकाए रो पड़ा। कृष्णा उर्फ गोलू और रिवांशु उर्फ शिवशांत की मां ने उन्हें गले से लगा लिया। सरसों के खेत में उस पल सिर्फ दहशत का अंत और राहत की शुरुआत दिख रही थी।
विश्व प्रताप की दादी सुंदरी की आवाज कांप रही थी। कहा कि खाना खाकर बाहर निकला था। बिजली चली गई… फिर वह नहीं दिखा। पूरी रात गांव-गांव खोजते रहे। आज मिला तो लगा भगवान ने सुन ली। रितेश के पिता अजय शर्मा की आंखें भीगी हैं, कहा कि सोचा नहीं था, घर से दो सौ मीटर दूर होगा हमारा लाल। बस भगवान का शुक्र है। रिवांशु की मां मोनी की आंखें भर आईं, कहा कि भगवान ने हमारी सुन ली।
पांच किलोमीटर के दायरे में सब कुछ खंगाला
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पांच किलोमीटर के दायरे में सब कुछ खंगाला। सीसीटीवी कैमरा खंगाला गया। हरेक बिंदु पर जांच की गई। एसपी विनीत जायसवाल खुद निगरानी करते रहे। गांव के हर घर से लेकर हरेक स्थल को खंगाला गया। इसके बाद दोपहर में खेतों में सर्च अभियान के दौरान बच्चे मिल गए। बच्चों को एसपी ने उपहार दिए।
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गांव निवासी गोलू (11), विश्व प्रताप (7), रितेश शर्मा (6) व रिवांशु (6) सोमवार शाम मंदिर के पास खेल रहे थे। देर शाम तक जब वे घर नहीं पहुंचे, तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। बच्चों का पता नहीं चलने पर पुलिस को सूचना दी गई। एसपी विनीत जायसवाल ने ट्रेनी आईपीएस प्रदीप कुमार, सीओ तरबगंज डॉ. उमेश्वर प्रभात सिंह व एसओजी को मौके पर भेजा।
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परिजनों से जानकारी लेने के बाद पुलिस टीम ने तलाश शुरू की। पूरी रात बच्चों का पता नहीं चला। इसपर विश्व प्रताप के बाबा ओमप्रकाश की तहरीर पर मंगलवार को अपहरण की प्राथमिकी दर्ज की गई। वहीं, पुलिस टीम ने बाग, आसपास के गांवों और संभावित मार्गों पर तलाशी जारी रखी। दोपहर में पुलिस टीम ने खेत में तलाश शुरू की तो चारों बच्चे घर से 200 मीटर की दूरी पर स्थित सरसों के खेत में मिल गए। उन्हें जांच के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बभनजोत ले जाया गया। सीएचसी के डाॅ. अजय भारती ने बताया कि बच्चों की सेहत सही रही। मेडिकल के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया।
एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि सोमवार शाम बच्चों के लापता होने की सूचना पर टीमों को तलाश में लगाया। मंगलवार दोपहर में बच्चे सरसों के खेत से मिल गए। पुलिस टीम ने सोमवार पूरी रात काम किया। बच्चे स्वस्थ हैं। अपनों के बीच हैं।
तालाब में तलाशती रही एसडीआरएफ टीम
गांव के कुछ लोगों ने पुलिस को बताया कि बच्चे तालाब के पास खेलते देखे गए थे। इसके बाद रात में ही राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम बुलाई गई। पंपिंगसेट लगाकर तालाब का पानी कम कराया गया। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम ने तालाब में उतरकर तलाश की, लेकिन बच्चों का पता नहीं चला।
खेत में लगी मटर खाकर मिटाई भूख, हैंडपंप से पिया पानी
बच्चों की तलाश में जुटे इंस्पेक्टर यशवंत सिंह के मुताबिक कृष्णा उर्फ गोलू ने साथी बच्चों को बताया कि उसने पड़ोसी के बच्चे का खिलौना तोड़ दिया था, इसकी शिकायत पड़ोस वाली चाची ने उसकी अम्मा से की। अम्मा उससे नाराज हैं, इसलिए घर जाने पर उसकी पिटाई तय है। इसी डर से वह खुद तो खेत में रुका ही, साथ में तीनों बच्चों को भी रोक लिया। चारों ने खेत में लगी मटर खाकर भूख मिटाई और सरसों के खेत से 20 मीटर की दूरी पर आम के पेड़ के नीचे लगे हैंडपंप पर पानी पिया। इसके बाद खेत में ही सो गए। मंगलवार सुबह नींद खुली तो दोबारा मटर खाई। इसके बाद खेत में ही खेलने लगे।
सरसों के पीले फूलों के बीच से आवाज आई...बच्चे इधर हैं
गौरा चौकी। अनहोनी की आशंका के बीच मंगलवार दोपहर 12: 40 बजे तक ढडुवा कुतुबजोत गांव में सन्नाटा था, लेकिन लोग बेचैन थे। कोई मंदिर की सीढ़ियों पर बैठा प्रार्थना कर रहा था, तो कोई खेत की मेड़ पर दूर तक नजरें गड़ाए था। 18 घंटे से लापता चार मासूमों की चिंता ने पूरे गांव को परिवार में बदल दिया था। तभी सरसों के पीले फूलों के बीच से एक आवाज आई...इधर हैं…बच्चे इधर हैं...।
आवाज सुनते ही लोग उधर दौड़ पड़े। खेत के बीचोंबीच चारों बच्चे बैठे थे। थके, लेकिन सुरक्षित। अगले ही पल ग्रामीणों की आंखें भर आईं। किसी ने रितेश को गोद में उठा लिया, कोई विश्व प्रताप को सीने से चिपकाए रो पड़ा। कृष्णा उर्फ गोलू और रिवांशु उर्फ शिवशांत की मां ने उन्हें गले से लगा लिया। सरसों के खेत में उस पल सिर्फ दहशत का अंत और राहत की शुरुआत दिख रही थी।
विश्व प्रताप की दादी सुंदरी की आवाज कांप रही थी। कहा कि खाना खाकर बाहर निकला था। बिजली चली गई… फिर वह नहीं दिखा। पूरी रात गांव-गांव खोजते रहे। आज मिला तो लगा भगवान ने सुन ली। रितेश के पिता अजय शर्मा की आंखें भीगी हैं, कहा कि सोचा नहीं था, घर से दो सौ मीटर दूर होगा हमारा लाल। बस भगवान का शुक्र है। रिवांशु की मां मोनी की आंखें भर आईं, कहा कि भगवान ने हमारी सुन ली।
पांच किलोमीटर के दायरे में सब कुछ खंगाला
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पांच किलोमीटर के दायरे में सब कुछ खंगाला। सीसीटीवी कैमरा खंगाला गया। हरेक बिंदु पर जांच की गई। एसपी विनीत जायसवाल खुद निगरानी करते रहे। गांव के हर घर से लेकर हरेक स्थल को खंगाला गया। इसके बाद दोपहर में खेतों में सर्च अभियान के दौरान बच्चे मिल गए। बच्चों को एसपी ने उपहार दिए।

ढडुवा कुतुबजोत गांव में बच्चों के मिलने से खुश ग्रामीण व पुलिस, बच्चों को गोद में लिए पुलिसकर्म

ढडुवा कुतुबजोत गांव में बच्चों के मिलने से खुश ग्रामीण व पुलिस, बच्चों को गोद में लिए पुलिसकर्म

ढडुवा कुतुबजोत गांव में बच्चों के मिलने से खुश ग्रामीण व पुलिस, बच्चों को गोद में लिए पुलिसकर्म