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Gonda News: पशुपालन से सफल उद्यमी बनीं नीलम
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 02 May 2026 11:20 PM IST
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गोंडा। मनकापुर के बक्सरा आज्ञाराम गांव की नीलम देवी ने पशुपालन के जरिए सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। कभी घर की जिम्मेदारियों तक ही सीमित नीलम आज आत्मनिर्भर बनकर न सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन गई हैं।
नीलम बताती हैं कि शिक्षित नहीं होने के कारण शादी के बाद वह पूरी तरह गृहिणी बनकर रह गई थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। वर्ष 2022 में उन्होंने गांव के स्वयं सहायता समूह से जुड़कर नई शुरुआत की। समूह के माध्यम से बैंक से ऋण लेकर उन्होंने 40 हजार रुपये में एक भैंस खरीदी और पशुपालन शुरू किया। शुरुआत में भैंस के दूध के साथ-साथ गोबर से बनी खाद बेचकर उन्होंने आमदनी बढ़ाई। गोबर की खाद दो हजार रुपये प्रति ट्रॉली की दर से बिकने लगी। धीरे-धीरे बचत करके उन्होंने हर साल दो से तीन भैंस खरीदीं। उनकी मेहनत रंग लाई और अब उनके पास 14 भैंस और चार गाय हैं।
नीलम पशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान देती हैं। वे हरा चारा, भूसा, चोकर और संतुलित पशु आहार देती हैं। साथ ही नियमित रूप से पशु चिकित्सक से जांच और टीकाकरण भी कराती हैं। उनके डेयरी कार्य से गांव की आठ महिलाओं को भी रोजगार मिला है।
सालाना सात से आठ लाख रुपये तक हो रही कमाई
नीलम के अनुसार उनके यहां प्रतिदिन करीब 45 से 50 लीटर दूध का उत्पादन होता है। कुछ दूध की गांव में ही खपत हो जाती है। बाकी दूध मनकापुर बाजार में बिक जाता है। दूध और गोबर से होने वाली आय को मिलाकर वह सालाना सात से आठ लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं।
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नीलम बताती हैं कि शिक्षित नहीं होने के कारण शादी के बाद वह पूरी तरह गृहिणी बनकर रह गई थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। वर्ष 2022 में उन्होंने गांव के स्वयं सहायता समूह से जुड़कर नई शुरुआत की। समूह के माध्यम से बैंक से ऋण लेकर उन्होंने 40 हजार रुपये में एक भैंस खरीदी और पशुपालन शुरू किया। शुरुआत में भैंस के दूध के साथ-साथ गोबर से बनी खाद बेचकर उन्होंने आमदनी बढ़ाई। गोबर की खाद दो हजार रुपये प्रति ट्रॉली की दर से बिकने लगी। धीरे-धीरे बचत करके उन्होंने हर साल दो से तीन भैंस खरीदीं। उनकी मेहनत रंग लाई और अब उनके पास 14 भैंस और चार गाय हैं।
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नीलम पशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान देती हैं। वे हरा चारा, भूसा, चोकर और संतुलित पशु आहार देती हैं। साथ ही नियमित रूप से पशु चिकित्सक से जांच और टीकाकरण भी कराती हैं। उनके डेयरी कार्य से गांव की आठ महिलाओं को भी रोजगार मिला है।
सालाना सात से आठ लाख रुपये तक हो रही कमाई
नीलम के अनुसार उनके यहां प्रतिदिन करीब 45 से 50 लीटर दूध का उत्पादन होता है। कुछ दूध की गांव में ही खपत हो जाती है। बाकी दूध मनकापुर बाजार में बिक जाता है। दूध और गोबर से होने वाली आय को मिलाकर वह सालाना सात से आठ लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं।
