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Gonda News: आंगनबाड़ी केंद्रों पर अब नई रेसिपी वाला पुष्टाहार, ओटीपी से होगी आपूर्ति की निगरानी
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 03 Jun 2026 11:38 PM IST
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गोंडा। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को अब नई रेसिपी पर आधारित पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाएगा। वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पुष्टाहार की आपूर्ति सीधे जिले के वेयरहाउस से आंगनबाड़ी केंद्रों तक कराई जाएगी। पारदर्शिता के लिए वितरण के समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के मोबाइल पर भेजे गए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) का सत्यापन अनिवार्य होगा।
जिले में संचालित 3,085 आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो लाख से अधिक बच्चे तथा करीब 32 हजार गर्भवती और धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। अब तक लाभार्थियों को दाल, तेल, दलिया सहित अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी। इसकी आपूर्ति ब्लॉक स्तर के बाल विकास परियोजना कार्यालयों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से होती थी। इस व्यवस्था को लेकर समय-समय पर शिकायतें और अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) संजय कुमार ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत बाल विकास परियोजना कार्यालयों और स्वयं सहायता समूहों को वितरण प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है। अब पुष्टाहार एजेंसी से सीधे जिले के वेयरहाउस में पहुंचेगा और वहां से मांग के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को पहले की तरह सूखा पुष्टाहार ही मिलेगा, लेकिन इसकी रेसिपी पोषण मानकों के अनुरूप बदली गई है, जिससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्रियों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
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डीपीओ के अनुसार राशन वितरण के समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाएगा। ओटीपी सत्यापन के बाद ही वितरण प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सामग्री की शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित होगी।
सात श्रेणियों के लिए अलग-अलग उत्पाद
सरकार ने विभिन्न आयु वर्ग और जरूरतों के अनुसार सात प्रकार के रेसिपी आधारित उत्पाद निर्धारित किए हैं। इनमें शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण शामिल हैं। इनमें आटा-बेसन हलवा, आटा-बेसन बर्फी, दलिया-मूंग सोया खिचड़ी, दलिया-मूंग दाल खिचड़ी, ऊर्जा युक्त हलवा और पौष्टिक दलिया जैसी रेसिपियां शामिल की गई हैं।
जिले में संचालित 3,085 आंगनबाड़ी केंद्रों पर दो लाख से अधिक बच्चे तथा करीब 32 हजार गर्भवती और धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं। अब तक लाभार्थियों को दाल, तेल, दलिया सहित अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी। इसकी आपूर्ति ब्लॉक स्तर के बाल विकास परियोजना कार्यालयों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से होती थी। इस व्यवस्था को लेकर समय-समय पर शिकायतें और अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) संजय कुमार ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत बाल विकास परियोजना कार्यालयों और स्वयं सहायता समूहों को वितरण प्रक्रिया से अलग कर दिया गया है। अब पुष्टाहार एजेंसी से सीधे जिले के वेयरहाउस में पहुंचेगा और वहां से मांग के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को पहले की तरह सूखा पुष्टाहार ही मिलेगा, लेकिन इसकी रेसिपी पोषण मानकों के अनुरूप बदली गई है, जिससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्रियों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
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डीपीओ के अनुसार राशन वितरण के समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाएगा। ओटीपी सत्यापन के बाद ही वितरण प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सामग्री की शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित होगी।
सात श्रेणियों के लिए अलग-अलग उत्पाद
सरकार ने विभिन्न आयु वर्ग और जरूरतों के अनुसार सात प्रकार के रेसिपी आधारित उत्पाद निर्धारित किए हैं। इनमें शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण शामिल हैं। इनमें आटा-बेसन हलवा, आटा-बेसन बर्फी, दलिया-मूंग सोया खिचड़ी, दलिया-मूंग दाल खिचड़ी, ऊर्जा युक्त हलवा और पौष्टिक दलिया जैसी रेसिपियां शामिल की गई हैं।