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Gonda News: 3.60 करोड़ के गबन के मामले में बैंक पहुंची पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:21 PM IST
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गोंडा। इंडियन बैंक (पूर्व में इलाहाबाद बैंक) की मुख्य शाखा से जुड़ी कर्मचारियों की सहकारी ऋण समिति में करीब 3.60 करोड़ रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। विवेचक सोनू कुमार ने बैंक पहुंचकर मामले से संबंधित अभिलेखों की जांच की और अधिकारियों से आवश्यक जानकारी जुटाई।
न्यायालय के आदेश पर दर्ज एफआईआर में तत्कालीन बैंक प्रबंधकों, अधिकारियों और कर्मचारियों समेत 69 लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस न केवल धन के कथित गबन की जांच कर रही है, बल्कि विभागीय स्तर पर हुई लापरवाही और कार्रवाई में हुई देरी के कारणों की भी पड़ताल कर रही है।
इंडियन बैंक इम्प्लाइज क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के सचिव रविंद्र कुमार श्रीवास्तव की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 1997 से 2020 के बीच ऋण वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। नियमों की अनदेखी कर ऋण स्वीकृत किए गए और अभिलेखों में हेराफेरी कर संस्था को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित गड़बड़ियों की जानकारी मिलने के बाद भी कार्रवाई में वर्षों की देरी क्यों हुई।
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साथ ही उस दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और उनके खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई का भी परीक्षण किया जा रहा है। नगर कोतवाल विंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि विवेचना जारी है। संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है और जल्द ही आरोपितों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
न्यायालय के आदेश पर दर्ज एफआईआर में तत्कालीन बैंक प्रबंधकों, अधिकारियों और कर्मचारियों समेत 69 लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस न केवल धन के कथित गबन की जांच कर रही है, बल्कि विभागीय स्तर पर हुई लापरवाही और कार्रवाई में हुई देरी के कारणों की भी पड़ताल कर रही है।
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इंडियन बैंक इम्प्लाइज क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के सचिव रविंद्र कुमार श्रीवास्तव की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 1997 से 2020 के बीच ऋण वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। नियमों की अनदेखी कर ऋण स्वीकृत किए गए और अभिलेखों में हेराफेरी कर संस्था को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित गड़बड़ियों की जानकारी मिलने के बाद भी कार्रवाई में वर्षों की देरी क्यों हुई।
साथ ही उस दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और उनके खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई का भी परीक्षण किया जा रहा है। नगर कोतवाल विंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि विवेचना जारी है। संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है और जल्द ही आरोपितों के बयान दर्ज किए जाएंगे।