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Gonda News: पंचमुखी महादेव धाम में जलाभिषेक की तैयारियां पूरी
Sun, 26 Jul 2026 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 26 Jul 2026 11:36 PM IST
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जयप्रभाग्राम स्थित भक्तिधाम मंदिर व परिसर में विराजमान पंचमुखी महादेव। - संवाद
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जयप्रभाग्राम। सावन माह 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसे लेकर मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर जयप्रभा ग्राम स्थित पंचमुखी महादेव भक्ति धाम में तैयारियां तेज हो गई हैं। संस्थान सचिव रामकृष्ण तिवारी ने बताया कि सावन में प्रतिदिन करीब पांच हजार श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। इसे लेकर कार्यकर्ताओं संग बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी तैनात रहेगा।
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस धाम में पंचमुखी शिवलिंग के साथ 51 देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां बद्रीनाथ, जगन्नाथ व रामेश्वरम सहित चारों धाम और प्रयागराज से अवधपुरी तक के तीर्थस्थलों की प्रतिकृतियां हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन से चारों धाम की यात्रा के समान पुण्य मिलता है। मंदिर का निर्माण 1982 में शुरू होकर 2001 में पूरा हुआ था। करीब 60 लाख रुपये की लागत से बने इस मंदिर में राजस्थान के भरतपुर के पत्थर लगे हैं। शिल्पकार रामेश्वर भारद्वाज के निर्देशन में इसे जयपुर की स्थापत्य शैली में तराशा गया है। मंदिर का मंडप विशेष ध्वनि प्रणाली पर बना है, जहां बिना माइक के भी आवाज स्पष्ट सुनाई देती है।
सावन में यहां बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, सिद्धार्थनगर और बस्ती से बड़ी संख्या में शिवभक्त पहुंचते हैं। सालभर में यहां करीब तीन से चार लाख श्रद्धालु आते हैं। परिसर के समीप नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान, प्रशिक्षण केंद्र, इंटर कॉलेज, कुटिया और नौका विहार भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं।
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प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस धाम में पंचमुखी शिवलिंग के साथ 51 देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां बद्रीनाथ, जगन्नाथ व रामेश्वरम सहित चारों धाम और प्रयागराज से अवधपुरी तक के तीर्थस्थलों की प्रतिकृतियां हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन से चारों धाम की यात्रा के समान पुण्य मिलता है। मंदिर का निर्माण 1982 में शुरू होकर 2001 में पूरा हुआ था। करीब 60 लाख रुपये की लागत से बने इस मंदिर में राजस्थान के भरतपुर के पत्थर लगे हैं। शिल्पकार रामेश्वर भारद्वाज के निर्देशन में इसे जयपुर की स्थापत्य शैली में तराशा गया है। मंदिर का मंडप विशेष ध्वनि प्रणाली पर बना है, जहां बिना माइक के भी आवाज स्पष्ट सुनाई देती है।
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सावन में यहां बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, सिद्धार्थनगर और बस्ती से बड़ी संख्या में शिवभक्त पहुंचते हैं। सालभर में यहां करीब तीन से चार लाख श्रद्धालु आते हैं। परिसर के समीप नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान, प्रशिक्षण केंद्र, इंटर कॉलेज, कुटिया और नौका विहार भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं।

जयप्रभाग्राम स्थित भक्तिधाम मंदिर व परिसर में विराजमान पंचमुखी महादेव। - संवाद
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