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Gonda News: पंचायत के कार्यों का हिसाब न देने पर 18 सचिवों का वेतन रोका
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Tue, 17 Mar 2026 11:21 PM IST
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गोंडा। पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों का लेखा-जोखा उपलब्ध न कराने पर जिला पंचायतीराज विभाग ने सख्ती दिखाते हुए 18 ग्राम पंचायत सचिवों का मार्च माह का वेतन रोक दिया है। संबंधित सचिवों को तीन दिन के भीतर विशेष लेखा परीक्षा से जुड़े अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। तय समयसीमा में अभिलेख नहीं देने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
जिला पंचायतीराज अधिकारी लालजी दूबे ने बताया कि वर्ष 2016-17 से 2023-24 तक पंचायतों में कराए गए कार्यों की विशेष लेखा परीक्षा कराई जानी है। इसके लिए कई बार नोटिस जारी कर संबंधित सचिवों से अभिलेख मांगे गए। बार-बार निर्देश भी दिए गए, लेकिन अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे लेखा परीक्षा का निस्तारण लंबित है और शासन स्तर पर जवाब देना मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने बताया कि पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर धन खर्च हुआ है। अभिलेख न देने से खर्च की जांच नहीं हो पा रही है, जिससे अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने सचिवों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मार्च का वेतन रोकने के साथ ही जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को तीन दिन के भीतर सभी अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। डीपीआरओ ने बताया कि समयसीमा में अभिलेख न देने वाले सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ ही निलंबन की संस्तुति भी की जा सकती है। इस संबंध में डीडीओ सुशील कुमार को भी वेतन रोकने की संस्तुति भेज दी गई है।
इन सचिवों पर शुरू हुई कार्रवाई
कार्रवाई की जद में आए सचिवों में अवधेश पांडेय, शैलेंद्र कुमार मौर्य, अमित मिश्र, राधेरमण प्रजापति, पुष्पराज सिंह, विनय कुमार, बीना सिंह, उमेश चंद्र द्विवेदी, अजय पांडेय, राजीव यादव, योगेश द्विवेदी, सुनीता रानी, शिशिर कुमार सिंह, राहुल चंद्रा, विमलेश कुमार, दिनेश कुमार, पप्पू सिंह और विंध्यवासिनी भारती शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि सभी को अंतिम नोटिस जारी कर दिया गया है।
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जिला पंचायतीराज अधिकारी लालजी दूबे ने बताया कि वर्ष 2016-17 से 2023-24 तक पंचायतों में कराए गए कार्यों की विशेष लेखा परीक्षा कराई जानी है। इसके लिए कई बार नोटिस जारी कर संबंधित सचिवों से अभिलेख मांगे गए। बार-बार निर्देश भी दिए गए, लेकिन अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे लेखा परीक्षा का निस्तारण लंबित है और शासन स्तर पर जवाब देना मुश्किल हो रहा है।
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उन्होंने बताया कि पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर धन खर्च हुआ है। अभिलेख न देने से खर्च की जांच नहीं हो पा रही है, जिससे अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने सचिवों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मार्च का वेतन रोकने के साथ ही जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को तीन दिन के भीतर सभी अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। डीपीआरओ ने बताया कि समयसीमा में अभिलेख न देने वाले सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ ही निलंबन की संस्तुति भी की जा सकती है। इस संबंध में डीडीओ सुशील कुमार को भी वेतन रोकने की संस्तुति भेज दी गई है।
इन सचिवों पर शुरू हुई कार्रवाई
कार्रवाई की जद में आए सचिवों में अवधेश पांडेय, शैलेंद्र कुमार मौर्य, अमित मिश्र, राधेरमण प्रजापति, पुष्पराज सिंह, विनय कुमार, बीना सिंह, उमेश चंद्र द्विवेदी, अजय पांडेय, राजीव यादव, योगेश द्विवेदी, सुनीता रानी, शिशिर कुमार सिंह, राहुल चंद्रा, विमलेश कुमार, दिनेश कुमार, पप्पू सिंह और विंध्यवासिनी भारती शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि सभी को अंतिम नोटिस जारी कर दिया गया है।