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Gonda News: अवैध खनन में सीगल इंडिया पर 79.90 लाख का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 15 Jan 2026 11:41 PM IST
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गोंडा। अयोध्या बाईपास (रिंग रोड) के निर्माण के लिए मिट्टी के खनन की अनुमति लेकर नवाबगंज में नदी तल से बालू का अवैध खनन करने का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि मेसर्स सीगल इंडिया ने 20,460 घन मीटर बालू का अवैध खनन करके इसे निर्माणाधीन बाईपास रोड में इस्तेमाल किया। मामले में फर्म के अधिकृत प्रतिनिधि विकास मणि त्रिपाठी के खिलाफ नवाबगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही फर्म पर 79.90 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
डीएम प्रियंका निरंजन को नवाबगंज में अवैध खनन की शिकायत मिली थी। उन्होंने एसडीएम तरबगंज विश्वमित्र, हल्का लेखपाल संतोष श्रीवास्तव, खान अधिकारी अभय रंजन और पुलिस टीम से माझा क्षेत्र में जांच कराई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि दिल्ली की फर्म मेसर्स सीगल इंडिया को ग्राम दुर्गागंज, तहसील तरबगंज में कुल 2.533 हेक्टेयर क्षेत्रफल से 29,636 घन मीटर साधारण मिट्टी का खनन करने की अनुमति दी गई थी।
एडीएम आलोक कुमार ने बताया कि जांच में पाया गया कि फर्म ने स्वीकृत क्षेत्र से मिट्टी खनन न करके नदी तल से बालू का अवैध खनन किया। मौके पर पैमाइश में कुल 20,460 घन मीटर बालू अवैध खनन करके निकाला गया। इसके पहले भी इस फर्म ने तुलसीपुर माझा में अवैध खनन किया था, जिसमें पुलिस ने सात डंपर को कब्जे में लिया था। खान अधिकारी अभय रंजन ने बताया कि फर्म के पास खनन की चार और परमिशन हैं, जिन्हें निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई है।
डीएम प्रियंका निरंजन ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन हर हाल में लोक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
अवैध खनन से सरयू का कछार खतरे में
नवाबगंज। अयोध्या बाईपास (रिंग रोड) निर्माण के नाम पर सरयू नदी के कछार क्षेत्र में हुए अवैध बालू खनन ने नदी और आसपास के गांवों के लिए गंभीर पर्यावरणीय खतरा पैदा कर दिया है। नदी तल से बड़े पैमाने पर बालू निकालने से न केवल जलधारा की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हुई है, बल्कि अन्य चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
सरयू के किनारे बसे गांवों के लिए अवैध खनन कोई नई बात नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि रात के अंधेरे में अवैध खनन और ढुलाई की जाती है। दुर्गागंज माझा, माझा राठ, तुलसीपुर माझा, साखीपुर और आसपास के गांवों के लोग कहते हैं कि दिन में सन्नाटा रहता है, लेकिन रात होते ही खनन शुरू हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सरयू जैसी संवेदनशील नदी में अवैध खनन से जलधारा बाधित, भूजल स्तर गिरने व तटीय क्षेत्रों में कटान तेज होने की संभावना है। इसका सीधा असर आसपास के खेतों, गांवों और जैव विविधता पर पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि खनन जारी रहा तो आने वाले मानसून में नदी का बहाव अचानक बदल सकता है, जिससे किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा और कृषि भूमि को भारी नुकसान हो सकता है।
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एडीएम आलोक कुमार ने बताया कि जांच में पाया गया कि फर्म ने स्वीकृत क्षेत्र से मिट्टी खनन न करके नदी तल से बालू का अवैध खनन किया। मौके पर पैमाइश में कुल 20,460 घन मीटर बालू अवैध खनन करके निकाला गया। इसके पहले भी इस फर्म ने तुलसीपुर माझा में अवैध खनन किया था, जिसमें पुलिस ने सात डंपर को कब्जे में लिया था। खान अधिकारी अभय रंजन ने बताया कि फर्म के पास खनन की चार और परमिशन हैं, जिन्हें निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई है।
डीएम प्रियंका निरंजन ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन हर हाल में लोक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
अवैध खनन से सरयू का कछार खतरे में
नवाबगंज। अयोध्या बाईपास (रिंग रोड) निर्माण के नाम पर सरयू नदी के कछार क्षेत्र में हुए अवैध बालू खनन ने नदी और आसपास के गांवों के लिए गंभीर पर्यावरणीय खतरा पैदा कर दिया है। नदी तल से बड़े पैमाने पर बालू निकालने से न केवल जलधारा की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हुई है, बल्कि अन्य चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
सरयू के किनारे बसे गांवों के लिए अवैध खनन कोई नई बात नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि रात के अंधेरे में अवैध खनन और ढुलाई की जाती है। दुर्गागंज माझा, माझा राठ, तुलसीपुर माझा, साखीपुर और आसपास के गांवों के लोग कहते हैं कि दिन में सन्नाटा रहता है, लेकिन रात होते ही खनन शुरू हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सरयू जैसी संवेदनशील नदी में अवैध खनन से जलधारा बाधित, भूजल स्तर गिरने व तटीय क्षेत्रों में कटान तेज होने की संभावना है। इसका सीधा असर आसपास के खेतों, गांवों और जैव विविधता पर पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि खनन जारी रहा तो आने वाले मानसून में नदी का बहाव अचानक बदल सकता है, जिससे किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा और कृषि भूमि को भारी नुकसान हो सकता है।
