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अब हाईटेक पंचायत सचिवालयों में बुलंद होगी जनता की आवाज
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गोंडा के कटरा ब्लाक की पंचायत भगहरिया मित्तई में बना पंचायत भवन
- फोटो : GONDA
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गोंडा। गांव पंचायतों की पहचान वहां के सचिवालयों से होगी। मनरेगा को जोड़कर जिले में 401 पंचायत सचिवालयों का निर्माण इस तरह कराया गया है कि देखने में सुंदर तो लगेगा, वहां बैठने की व्यवस्था और बैठकों का संचालन हाईटेक होगा।
गांवों में मिनी विकास भवन की तर्ज पर सचिवालयों का निर्माण कराया गया है, अधिकतर भवन बनकर तैयार हैं। सरकारी दफ्तर एक छत के नीचे लाने ओर जनता को अपने हक की बात कहने का एक बेहतर देने के लिए डीएम मार्कंडेय शाही और सीडीओ शशांक त्रिपाठी की पहल इनका निर्माण पूरा हो रहा है। इससे पूरे प्रदेश में धूम मची है।
जिले में बीते साल गांवों में पंचायत भवन के निर्माण का खाका खींचा गया था। इसके लिए 60 करोड़ रुपये से 427 पंचायतों में सचिवालयों का निर्माण कराने की हुई। सचिवालयों के निर्माण में पंचायतों के बजट के साथ ही मनरेगा का बजट भी शामिल किया गया है।
इससे 10 हजार से अधिक श्रमिकों को गांवों में ही रोजगार भी हासिल होंगे। पंचायतों में दो तरह के सचिवालय बन रहे हैं, जिसमें 359 पंचायतों में प्रत्येक पर 14 लाख पांच हजार रुपये बजट से दो कमरे का सचिवालय बन रहा है।
इसी तरह 42 पंचायतों में 22. 28 लाख रुपये का खर्च चार कमरों के प्रत्येक सचिवालय बनाया गया। इसमें कटरा बाजार के भगहरिया गांव का पंचायत सचिवालय पूरे प्रदेश में मिसाल बन गया है। जिले की 1054 पंचायतों में 401 ऐसी पंचायतें हैं जहां पर अभी तक सचिवालय ही नहीं था।
सचिवालय निर्माण में बजट की कमी थी। मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने शासन से अतिरिक्त बजट भी नहीं मांगा और पंचायतों में उपलब्ध बजट के आधार पर योजना तैयार की।
15वें वित्त से उपलब्ध बजट और मनरेगा के उपलब्ध बजट को जोड़कर योजना तैयार की। दो कमरों के सचिवालय पर 50 करोड़ 43 हजार 95 हजार रुपये का बजट तय किया। वहीं चार कमरों के सचिवालयों पर नौ करोड़ रुपये से अधिक का बजट खर्च तय हुआ।
जिसमें मनरेगा से 50 फीसदी धनराशि दी गयी है, जिसमें 14 लाख पांच हजार रुपये की लागत से बनने वाले दो कमरों प्रत्येक सचिवालय के निर्माण पर दो लाख 34 हजार 724 रुपए का बजट श्रमिकों पर खर्च खर्च होगा। इसी तरह 22.28 लाख रुपये के बजट से चार कमरों के सचिवालय निर्माण में तीन लाख 71 हजार 795 रुपये का बजट श्रमिकों पर खर्च होगा। बाकी का बजट सामग्री पर खर्च होना है।
401 पंचायतों में नए सचिवालयों में निर्माण हो जाने और 653 में पहले से ही सचिवालय होने से उनका कायाकल्प करा कर शुरू किया जा रहा है। सचिवालयों में रोस्टर से सचिव बैठेंगे, और साथ में ही लेखपाल और अन्य पंचायत के कर्मचारी बैठेंगे। गांव के लोगों को रोजगार उपलब्ध होने के साथ राशन कार्ड की समस्या दूर होगी।
पंचायतों में विकास की समस्याओं की सुनवाई हो सकेगी। लोगों को आसानी से पंचायत के सचिव मिल सकेंगे, जिससे वह अपनी स्थानीय समस्या बताकर समाधान करा सकेंगे। अभी पंचायत सचिवों को उनके घर या हफ्ते में ब्लाक पर होने वाली बैठकों में खोजना पड़ता है।
जिले की पंचायतों में ग्राम प्रधान के साथ ही पंचायत सदस्यों को कोई स्थान बैठने के लिए नहीं है। 1204 पंचायतों में प्रधान व सचिव के साथ ही 15,136 पंचायत सदस्य भी हैं। प्रधान तो घर पर अपना दरबार सजा लेते हैं, लेकिन पंचायत सदस्यों के लिए कोई स्थान नहीं है।
अधिकतर बैठकें स्कूलों में होती हैं। हर पंचायत के सचिवालय के शुरू होने से सदस्य भी बैठकर विकास के मुद्दे पर अपनी सलाह दे सकेंगे। अभी वह सिर्फ बैठकों में ही बुलाए जाते हैं जो साल में एक या दो बार ही होते हैं। हर पंचायत में 10 से 15 सदस्य चुने जाते हैं, लेकिन वह सिर्फ पंचायत के कोरम को पूरा करने तक सीमित हैं।
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गांवों में मिनी विकास भवन की तर्ज पर सचिवालयों का निर्माण कराया गया है, अधिकतर भवन बनकर तैयार हैं। सरकारी दफ्तर एक छत के नीचे लाने ओर जनता को अपने हक की बात कहने का एक बेहतर देने के लिए डीएम मार्कंडेय शाही और सीडीओ शशांक त्रिपाठी की पहल इनका निर्माण पूरा हो रहा है। इससे पूरे प्रदेश में धूम मची है।
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जिले में बीते साल गांवों में पंचायत भवन के निर्माण का खाका खींचा गया था। इसके लिए 60 करोड़ रुपये से 427 पंचायतों में सचिवालयों का निर्माण कराने की हुई। सचिवालयों के निर्माण में पंचायतों के बजट के साथ ही मनरेगा का बजट भी शामिल किया गया है।
इससे 10 हजार से अधिक श्रमिकों को गांवों में ही रोजगार भी हासिल होंगे। पंचायतों में दो तरह के सचिवालय बन रहे हैं, जिसमें 359 पंचायतों में प्रत्येक पर 14 लाख पांच हजार रुपये बजट से दो कमरे का सचिवालय बन रहा है।
इसी तरह 42 पंचायतों में 22. 28 लाख रुपये का खर्च चार कमरों के प्रत्येक सचिवालय बनाया गया। इसमें कटरा बाजार के भगहरिया गांव का पंचायत सचिवालय पूरे प्रदेश में मिसाल बन गया है। जिले की 1054 पंचायतों में 401 ऐसी पंचायतें हैं जहां पर अभी तक सचिवालय ही नहीं था।
सचिवालय निर्माण में बजट की कमी थी। मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने शासन से अतिरिक्त बजट भी नहीं मांगा और पंचायतों में उपलब्ध बजट के आधार पर योजना तैयार की।
15वें वित्त से उपलब्ध बजट और मनरेगा के उपलब्ध बजट को जोड़कर योजना तैयार की। दो कमरों के सचिवालय पर 50 करोड़ 43 हजार 95 हजार रुपये का बजट तय किया। वहीं चार कमरों के सचिवालयों पर नौ करोड़ रुपये से अधिक का बजट खर्च तय हुआ।
जिसमें मनरेगा से 50 फीसदी धनराशि दी गयी है, जिसमें 14 लाख पांच हजार रुपये की लागत से बनने वाले दो कमरों प्रत्येक सचिवालय के निर्माण पर दो लाख 34 हजार 724 रुपए का बजट श्रमिकों पर खर्च खर्च होगा। इसी तरह 22.28 लाख रुपये के बजट से चार कमरों के सचिवालय निर्माण में तीन लाख 71 हजार 795 रुपये का बजट श्रमिकों पर खर्च होगा। बाकी का बजट सामग्री पर खर्च होना है।
401 पंचायतों में नए सचिवालयों में निर्माण हो जाने और 653 में पहले से ही सचिवालय होने से उनका कायाकल्प करा कर शुरू किया जा रहा है। सचिवालयों में रोस्टर से सचिव बैठेंगे, और साथ में ही लेखपाल और अन्य पंचायत के कर्मचारी बैठेंगे। गांव के लोगों को रोजगार उपलब्ध होने के साथ राशन कार्ड की समस्या दूर होगी।
पंचायतों में विकास की समस्याओं की सुनवाई हो सकेगी। लोगों को आसानी से पंचायत के सचिव मिल सकेंगे, जिससे वह अपनी स्थानीय समस्या बताकर समाधान करा सकेंगे। अभी पंचायत सचिवों को उनके घर या हफ्ते में ब्लाक पर होने वाली बैठकों में खोजना पड़ता है।
जिले की पंचायतों में ग्राम प्रधान के साथ ही पंचायत सदस्यों को कोई स्थान बैठने के लिए नहीं है। 1204 पंचायतों में प्रधान व सचिव के साथ ही 15,136 पंचायत सदस्य भी हैं। प्रधान तो घर पर अपना दरबार सजा लेते हैं, लेकिन पंचायत सदस्यों के लिए कोई स्थान नहीं है।
अधिकतर बैठकें स्कूलों में होती हैं। हर पंचायत के सचिवालय के शुरू होने से सदस्य भी बैठकर विकास के मुद्दे पर अपनी सलाह दे सकेंगे। अभी वह सिर्फ बैठकों में ही बुलाए जाते हैं जो साल में एक या दो बार ही होते हैं। हर पंचायत में 10 से 15 सदस्य चुने जाते हैं, लेकिन वह सिर्फ पंचायत के कोरम को पूरा करने तक सीमित हैं।