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Gonda News: सावन के झूलों और कजरी की रौनक घटी

Sun, 02 Aug 2026 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 02 Aug 2026 12:07 AM IST
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The vibrancy of the Sawan swings and Kajri festivities has diminished
मधईपुर खांडेराय राजाहाता में झूला झूलते बच्चे। - संवाद 
पसका। गांवों में सावन के झूलों और कजरी गीतों की रौनक अब काफी घट गई है। सावन का महीना कभी गांवों में हरियाली, पेड़ों पर पड़े झूलों और मधुर कजरी गीतों के लिए जाना जाता था। आम, नीम और पीपल के पेड़ों पर बच्चे, युवतियां और महिलाएं घंटों झूला झूलती थीं। विवाह के बाद पहली बार मायके आई नवविवाहिताओं के लिए तो सावन किसी उत्सव से कम नहीं होता था। उनकी हंसी-ठिठोली से पूरा गांव गूंज उठता था।
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बदलती जीवनशैली, स्मार्ट फोन और सोशल मीडिया ने गांवों की इस लोक परंपरा को काफी हद तक पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, क्षेत्र के कुछ गांवों में आज भी यह परंपरा पूरी तरह टूटी नहीं है। कहीं-कहीं पेड़ों पर बच्चे और महिलाएं झूला झूलते व कजरी गीत गाती नजर आती हैं। यह दृश्य बीते दौर की मधुर यादों को ताजा कर देता है। प्योली निवासी श्रीराम सिंह, लोहंगपुर के राधेश्याम पाठक, जगन्नाथ और परमेश्वर आदि ग्रामीणों का कहना है कि यदि पारंपरिक आयोजनों को प्रोत्साहन नहीं मिला, तो आने वाले वर्षों में सावन के झूले और कजरी केवल तस्वीरों तक ही सीमित रह जाएंगे।
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