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Gonda News: मेडिकल कॉलेज की रसोई में बची दो दिन की गैस
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 11 Mar 2026 11:29 PM IST
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गैस के लिए एजेंसी के बाहर लग गई कतार।
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गोंडा। कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोक लगने से होटल, ढाबा और खाद्य कारोबार से जुड़े हजारों लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है। मेडिकल कॉलेज की रसोई में सिर्फ दो दिन की गैस ही बची है। यहां पर भर्ती करीब 150 से अधिक मरीजों के लिए सुबह व शाम खाना पकाया जाता है। उधर, सहालग के सीजन में गैस न मिलने से खोवा और पनीर बनाने वाले व्यापारी परेशान हैं। मजबूरी में कई कारोबारियों ने फिर से कोयले की भट्ठियां तैयार कर ली हैं।
जिले में करीब 10 हजार से अधिक होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट वेंडर हैं। ये लोग रोजाना कॉमर्शियल सिलिंडर का उपयोग करते थे। गैस की आपूर्ति रुकने के बाद अब इन कारोबारियों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। रोडवेज बस अड्डे के पास स्थित उत्तम होटल के संचालक शुभम खत्री ने बताया कि गैस सिलिंडर न मिलने से काफी परेशानी हो रही है। अब कोयले की भट्ठियों पर ही खाना बनाकर ग्राहकों को परोसना पड़ रहा है।
चौक बाजार की खोवा गली के दुकानदार रोशन लाल ने बताया कि सहालग के सीजन में लोग चार-चार महीने पहले से खोवा और पनीर का ऑर्डर बुक करा लेते हैं। अब गैस न मिलने से समय पर आपूर्ति करना मुश्किल हो रहा है। होटल व्यवसायी अमित ने बताया कि 17 रुपये किलो के हिसाब से कोयला खरीदकर काम चलाया जा रहा है, लेकिन इससे लागत भी बढ़ रही है। काम भी धीमा हो गया है।
शादियों के लिए ब्लैक में खरीदने पड़ रहे सिलिंडर
सिलिंडर की किल्लत का असर शादियों और बड़े आयोजनों पर भी दिखाई दे रहा है। शहर स्थित आरके कैटर्स के संचालक राकेश ने बताया कि आयोजकों से पर्याप्त सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। छोटे कार्यक्रम में जहां चार से पांच कॉमर्शियल सिलिंडर की जरूरत होती है, वहीं शादियों में 12 से 14 सिलिंडर तक की खपत होती है। गैस सिलिंडर उपलब्ध न होने के कारण लोग बिचौलियों से ब्लैक में सिलिंडर खरीदने को मजबूर हैं। एक कॉमर्शियल सिलिंडर के लिए 2400 से 2500 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। कई आयोजकों ने खर्च बढ़ने के कारण खाने के मेन्यू से कुछ आइटम कम कर दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज की रसोई में रोजाना एक सिलिंडर की खपत
कॉमर्शियल गैस की किल्लत का असर मेडिकल कॉलेज की रसोई पर भी पड़ सकता है। यहां भर्ती मरीजों के लिए रोजाना भोजन और नाश्ता तैयार किया जाता है। करीब 150 मरीजों के लिए दो समय का भोजन बनाने में प्रतिदिन एक कॉमर्शियल सिलिंडर की खपत होती है। भोजन की आपूर्ति करने वाले दुर्गेश सिंह ने बताया कि अब स्टॉक लगभग खत्म होने को है। यदि जल्द गैस सिलिंडर की आपूर्ति नहीं हुई तो दो दिन बाद कोई दूसरा विकल्प खोजना पड़ेगा, नहीं तो मरीजों के लिए भोजन बनाना मुश्किल हो जाएगा। कारोबारियों ने प्रशासन से जल्द कॉमर्शियल गैस की नियमित आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है।
सेल्स प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर निकाला जाएगा विकल्प
कॉमर्शियल सिलिंडर की समस्या का समाधान निकालने के लिए गैस कंपनियों के सेल्स प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विकल्प निकाला जाएगा। गोदामों में जो सिलिंडर हैं, उनकी आपूर्ति की जा रही है।
कुंवर दिनेश प्रताप सिंह, डीएसओ
गैस संकट एक नजर में
जिले में करीब 10 हजार होटल, ढाबा व फूड कारोबारी
ब्लैक में कॉमर्शियल सिलिंडर 2400 से 2500 रुपये तक
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जिले में करीब 10 हजार से अधिक होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट वेंडर हैं। ये लोग रोजाना कॉमर्शियल सिलिंडर का उपयोग करते थे। गैस की आपूर्ति रुकने के बाद अब इन कारोबारियों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। रोडवेज बस अड्डे के पास स्थित उत्तम होटल के संचालक शुभम खत्री ने बताया कि गैस सिलिंडर न मिलने से काफी परेशानी हो रही है। अब कोयले की भट्ठियों पर ही खाना बनाकर ग्राहकों को परोसना पड़ रहा है।
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चौक बाजार की खोवा गली के दुकानदार रोशन लाल ने बताया कि सहालग के सीजन में लोग चार-चार महीने पहले से खोवा और पनीर का ऑर्डर बुक करा लेते हैं। अब गैस न मिलने से समय पर आपूर्ति करना मुश्किल हो रहा है। होटल व्यवसायी अमित ने बताया कि 17 रुपये किलो के हिसाब से कोयला खरीदकर काम चलाया जा रहा है, लेकिन इससे लागत भी बढ़ रही है। काम भी धीमा हो गया है।
शादियों के लिए ब्लैक में खरीदने पड़ रहे सिलिंडर
सिलिंडर की किल्लत का असर शादियों और बड़े आयोजनों पर भी दिखाई दे रहा है। शहर स्थित आरके कैटर्स के संचालक राकेश ने बताया कि आयोजकों से पर्याप्त सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। छोटे कार्यक्रम में जहां चार से पांच कॉमर्शियल सिलिंडर की जरूरत होती है, वहीं शादियों में 12 से 14 सिलिंडर तक की खपत होती है। गैस सिलिंडर उपलब्ध न होने के कारण लोग बिचौलियों से ब्लैक में सिलिंडर खरीदने को मजबूर हैं। एक कॉमर्शियल सिलिंडर के लिए 2400 से 2500 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। कई आयोजकों ने खर्च बढ़ने के कारण खाने के मेन्यू से कुछ आइटम कम कर दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज की रसोई में रोजाना एक सिलिंडर की खपत
कॉमर्शियल गैस की किल्लत का असर मेडिकल कॉलेज की रसोई पर भी पड़ सकता है। यहां भर्ती मरीजों के लिए रोजाना भोजन और नाश्ता तैयार किया जाता है। करीब 150 मरीजों के लिए दो समय का भोजन बनाने में प्रतिदिन एक कॉमर्शियल सिलिंडर की खपत होती है। भोजन की आपूर्ति करने वाले दुर्गेश सिंह ने बताया कि अब स्टॉक लगभग खत्म होने को है। यदि जल्द गैस सिलिंडर की आपूर्ति नहीं हुई तो दो दिन बाद कोई दूसरा विकल्प खोजना पड़ेगा, नहीं तो मरीजों के लिए भोजन बनाना मुश्किल हो जाएगा। कारोबारियों ने प्रशासन से जल्द कॉमर्शियल गैस की नियमित आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है।
सेल्स प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर निकाला जाएगा विकल्प
कॉमर्शियल सिलिंडर की समस्या का समाधान निकालने के लिए गैस कंपनियों के सेल्स प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विकल्प निकाला जाएगा। गोदामों में जो सिलिंडर हैं, उनकी आपूर्ति की जा रही है।
कुंवर दिनेश प्रताप सिंह, डीएसओ
गैस संकट एक नजर में
जिले में करीब 10 हजार होटल, ढाबा व फूड कारोबारी
ब्लैक में कॉमर्शियल सिलिंडर 2400 से 2500 रुपये तक