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UP: राष्ट्रकथा के जरिए बड़े राजनीतिक लक्ष्य की जमीन तैयार कर रहे बृजभूषण शरण सिंह, अयोध्या सीट पर लग रहे कयास

अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा Published by: ishwar ashish Updated Wed, 07 Jan 2026 05:13 PM IST
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सार

बृजभूषण शरण सिंह 2024 का लोकसभा चुनाव न लड़ पाने का मलाल कई बार सार्वजनिक रूप से जता चुके हैं। हाल ही में एक समाचार चैनल से बातचीत में उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगला चुनाव वे हर हाल में लड़ेंगे—चाहे भाजपा टिकट दे या नहीं।

UP: Brijbhushan is preparing the ground for a bigger political goal through national storytelling
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नंदिनी नगर महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रकथा केवल धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ भी दूर तक जाते दिख रहे हैं। देवीपाटन मंडल की तीन सीटों से छह बार सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह इस मंच के जरिए एक बड़े राजनीतिक लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाते नजर आ रहे हैं। यह आयोजन उनके लिए आगामी लोकसभा राजनीति की पृष्ठभूमि तैयार करने का माध्यम बन सकता है। हालांकि कथा में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिंहा, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी, पूर्व सांसद धनंजय सिंह के अतिरिक्त प्रदेश सरकार के मंत्री सूर्य प्रताप शाही, एके शर्मा, दिनेश सिंह सहित अन्य नेता पहुंच चुके हैँ। 

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देवीपाटन मंडल में ‘नेताजी’ के नाम से पहचाने जाने वाले बृजभूषण शरण सिंह 2024 का लोकसभा चुनाव न लड़ पाने का मलाल कई बार सार्वजनिक रूप से जता चुके हैं। हाल ही में एक समाचार चैनल से बातचीत में उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अगला चुनाव वे हर हाल में लड़ेंगे चाहे भाजपा टिकट दे या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वे जीवित रहे तो कोई ताकत उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोक पाएगी।
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इससे पहले उनके सांसद पुत्र करण भूषण सिंह भी यह बयान दे चुके हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव में वे और उनके पिता दोनों भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे और एक साथ संसद पहुंचेंगे। पिता-पुत्र के इन बयानों ने स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि राष्ट्रकथा के माध्यम से बृजभूषण सिंह लोकसभा चुनाव के लिए सामाजिक और वैचारिक आधार मजबूत कर रहे हैं। उनका फोकस अयोध्या सीट पर माना जा रहा है। यही कारण है कि कथा में अयोध्या सहित विभिन्न क्षेत्रों के मठ-मंदिरों के महंतों के साथ-साथ क्षत्रिय, यादव, गुर्जर, निषाद, पासी, कोरी, मौर्य, लोधी, राजभर समेत 52 समाजों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। साथ ही जनसहयोग के माध्यम से समाज के कमजोर और वंचित वर्ग को भी आयोजन से जोड़ने की रणनीति अपनाई गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में अयोध्या सीट सपा के पास है और भाजपा को वहां एक मजबूत चेहरे की तलाश होगी। यदि बृजभूषण सिंह को पार्टी से टिकट नहीं मिलता है तो वे निर्दल चुनाव लड़कर जीत दर्ज कर सकते हैं और बाद में वैचारिक धरातल वाली पार्टी में वापसी कर सकते हैं। इससे भाजपा को भी सीट का लाभ मिल सकता है।

बृजभूषण सिंह के लिए अयोध्या सीट इसलिए भी अनुकूल मानी जाती है क्योंकि उन्होंने छात्र राजनीति की शुरुआत साकेत कॉलेज अयोध्या से की थी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े होने के कारण संत-महंतों में उनकी गहरी पैठ रही है। हालांकि, सपा नेतृत्व से उनके मधुर संबंध भविष्य के निर्णय को लेकर कुछ असमंजस भी पैदा कर सकते हैं।

नंदिनी नगर बना सामाजिक समरसता का जीवंत केंद्र

नंदिनी नगर इन दिनों केवल कथास्थल नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के मिलन का केंद्र बन गया है। राष्ट्रकथा शुरू होने से पहले शंख-घंटों की गूंज, साधु-संतों की उपस्थिति और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की भीड़ एक सामूहिक चेतना के निर्माण का संकेत देती है।

ऋतेश्वर जी महाराज की कथा सुनने के लिए संत-महंतों के साथ किसान, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मंच के इतर यदि नजर दौड़ाई जाए तो आयोजन की व्यवस्था में जुटा एक अलग संसार दिखाई देता है। कोई जल व्यवस्था संभाल रहा है तो कोई पार्किंग, महिलाएं भंडारे की तैयारी में जुटी हैं और युवा स्वयं सेवक आगंतुकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

कैसरगंज संसदीय क्षेत्र के साथ-साथ गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती से भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी वफादार कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है। विभिन्न जिलों से बसों के जरिए श्रद्धालुओं को कथास्थल तक लाया जा रहा है। कई स्कूलों की बसों से छात्र-छात्राएं भी कथा में पहुंचे।

एनसीसी कैडेट्स संभाल रहे व्यवस्था

नंदिनी नगर, डीएवी इंटर कॉलेज, सरयू डिग्री कॉलेज और रघुकुल महाविद्यालय के 100 से अधिक एनसीसी कैडेट्स व्यवस्था संचालन में लगे हैं। कैडेट्स को टुकड़ियों में बांटकर प्रवेश, अनुशासन और भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है।

जनसहयोग से बन रहा आयोजन
पूर्व सांसद के आह्वान पर लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार अनाज, सब्जी, फल और सामग्री का सहयोग कर रहे हैं। बच्चों द्वारा गुल्लक भेंट करना और ग्रामीणों का घर से उपज लाकर देना आयोजन को भावनात्मक मजबूती दे रहा है।

रोजगार का भी बन रहा माध्यम
कथा स्थल के आसपास अस्थायी दुकानों से लोगों को रोजगार मिला है। कोई कॉटन कैंडी बेच रहा है तो कोई चश्मा, खिलौने या खाद्य सामग्री। कई विक्रेताओं की दैनिक आय हजारों रुपये तक पहुंच रही है।

धर्म-संप्रदाय से ऊपर उठता मंच
राष्ट्रकथा में धर्म और संप्रदाय की दीवारें टूटती दिख रही हैं। विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ आयोजन में भागीदारी कर रहे हैं। आयोजन ने सामाजिक समरसता और सहभागिता की एक नई मिसाल पेश की है।

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