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Gonda News: नकहरा गांव में बाढ़ से हर साल बेघर होते हैं ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 21 Jun 2026 10:57 PM IST
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करनैलगंज। नकहरा गांव के ग्रामीण हर साल बाढ़ के कारण दो महीने तक बेघर जिंदगी जीने को मजबूर होते हैं। वर्ष 2011 में एल्गिन-चरसड़ी बांध कटने के बाद गांव की स्थिति बदल गई। वर्ष 2012 में रिंग बांध टूटने से मुख्य बांध गांव के बाहर बना दिया गया और नकहरा गांव बांध के अंदर रह गया। ऐसे में 14 वर्ष से हर साल बाढ़ आने पर ग्रामीणों को घर छोड़ना पड़ता है। उन्हें बांध या अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है। इस दौरान परिवारों को भोजन, पेयजल और रहने की व्यवस्था के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
गांव की मंजू देवी बताती हैं कि बाढ़ आते ही घरों में पानी भर जाता है। मजबूरी में सामान समेटकर परिवार के साथ सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। अस्थायी ठिकानों पर रहना बेहद कठिन होता है। राजू निषाद ने बताया कि बाढ़ के दिनों में रोजगार पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। खुले आसमान के नीचे धूप, गर्मी और बारिश झेलनी पड़ती है। इससे परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है असर
शांति देवी ने बताया कि बाढ़ का सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। स्कूल जाना बंद हो जाता है और उनकी किताबें व अन्य सामग्री भी खराब हो जाती हैं। सूबेदार और लक्ष्मी ने पशुओं के लिए चारा तथा सुरक्षित जगह की व्यवस्था को बड़ी चुनौती बताया। रविंदर ने कहा कि बाढ़ के समय बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है।
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ग्रामीणों की जरूरतों के हिसाब से की गई तैयारी
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान, बाढ़ सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था कराने की मांग की है। इससे उन्हें हर साल विस्थापन से राहत मिल सकेगी। उधर, एसडीएम नेहा मिश्रा ने बताया कि ग्राम नकहरा के नौ मजरों में बाढ़ का पानी भर जाता है। इस बार बाढ़ से निपटने की तैयारियां पहले से पूरी कराई जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों को शासन-प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
गांव की मंजू देवी बताती हैं कि बाढ़ आते ही घरों में पानी भर जाता है। मजबूरी में सामान समेटकर परिवार के साथ सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। अस्थायी ठिकानों पर रहना बेहद कठिन होता है। राजू निषाद ने बताया कि बाढ़ के दिनों में रोजगार पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। खुले आसमान के नीचे धूप, गर्मी और बारिश झेलनी पड़ती है। इससे परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
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बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है असर
शांति देवी ने बताया कि बाढ़ का सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। स्कूल जाना बंद हो जाता है और उनकी किताबें व अन्य सामग्री भी खराब हो जाती हैं। सूबेदार और लक्ष्मी ने पशुओं के लिए चारा तथा सुरक्षित जगह की व्यवस्था को बड़ी चुनौती बताया। रविंदर ने कहा कि बाढ़ के समय बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों की जरूरतों के हिसाब से की गई तैयारी
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान, बाढ़ सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था कराने की मांग की है। इससे उन्हें हर साल विस्थापन से राहत मिल सकेगी। उधर, एसडीएम नेहा मिश्रा ने बताया कि ग्राम नकहरा के नौ मजरों में बाढ़ का पानी भर जाता है। इस बार बाढ़ से निपटने की तैयारियां पहले से पूरी कराई जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों को शासन-प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।