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Hamirpur News: ढाबा कारोबार प्रभावित, पांच से 50 रुपये तक बढ़े थाली के दाम
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Wed, 01 Apr 2026 12:47 AM IST
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भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। कानपुर-सागर हाईवे (एनएच 34) में मुख्यालय से लेकर मौदहा तक लगभग 40 ढाबे संचालित हैं, जो इन दिनों कमर्शियल गैस सिलिंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं। गैस न मिलने के कारण ढाबा संचालकों को मजबूरन लकड़ी और चूल्हा-भट्टी का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल लागत बढ़ गई बल्कि खाना बनाने में भी अधिक समय लग रहा है। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। ढाबा संचालकों ने 5-50 रुपये तक थाली के दाम बढ़ा दिए हैं।
गैस की कमी के चलते लकड़ी महंगी हो गई है। 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल वाली लकड़ी अब 800 रुपये में बिक रही है। ढाबा संचालकों का कहना है कि गैस से खाना बनाना आसान था। जब ग्राहक आता तुरंत गैस चूल्हा जलाकर खाना बन जाता था, लेकिन अब ग्राहक हो न हो लकड़ी भट्ठी को जलाकर रखना पड़ता है। इससे खर्च व मेहनत अधिक पड़ रही है।
समय के साथ लकड़ी के भी बढ़े दाम
पहले गैस सिलिंडर से खाना जल्दी और सस्ते में तैयार हो जाता था। इससे ग्राहक भी संतुष्ट रहते थे। अब लकड़ी में खाना बनाने से खर्च के साथ समय भी ज्यादा लग रहा है। मजबूरन थाली के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। ग्राहक भी कम हो गए हैं।
राकेश शिवहरे, ढाबा संचालक सुमेरपुर।
चौपट हुआ पूरा धंधा
हाईवे पर चलने वाले वाहन पहले समय बचाने के लिए ढाबों पर रुकते थे, लेकिन अब देर से खाना बनने के कारण कई वाहन बिना रुके ही निकल जाते हैं। धंधा पूरी तरह चौपट होने की कगार पर है। जल्द सिलिंडर की आपूर्ति सुचारु नहीं हुई तो ढाबा चलाना मुश्किल हो जाएगा।
हरिशंकर कुशवाहा, ढाबा के संचालक, नरायनपुर।
ऐसे बढ़े थाली के दाम
सामान - पहले - अब
दाल - 60 - 65
रोटी - छह - सात
सब्जी - 90 - 100
चावल - 40 - 45
थाली - 150 - 180
पनीर सब्जी - 140 - 160
स्पेशल थाली - 200 - 250
व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कोई कमी नहीं है। सभी को सिलिंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पहले और अब के नियमों में थोड़ा परिवर्तन होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
बृजेश शुक्ला, जिला पूर्ति अधिकारी।
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गैस की कमी के चलते लकड़ी महंगी हो गई है। 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल वाली लकड़ी अब 800 रुपये में बिक रही है। ढाबा संचालकों का कहना है कि गैस से खाना बनाना आसान था। जब ग्राहक आता तुरंत गैस चूल्हा जलाकर खाना बन जाता था, लेकिन अब ग्राहक हो न हो लकड़ी भट्ठी को जलाकर रखना पड़ता है। इससे खर्च व मेहनत अधिक पड़ रही है।
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समय के साथ लकड़ी के भी बढ़े दाम
पहले गैस सिलिंडर से खाना जल्दी और सस्ते में तैयार हो जाता था। इससे ग्राहक भी संतुष्ट रहते थे। अब लकड़ी में खाना बनाने से खर्च के साथ समय भी ज्यादा लग रहा है। मजबूरन थाली के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। ग्राहक भी कम हो गए हैं।
राकेश शिवहरे, ढाबा संचालक सुमेरपुर।
चौपट हुआ पूरा धंधा
हाईवे पर चलने वाले वाहन पहले समय बचाने के लिए ढाबों पर रुकते थे, लेकिन अब देर से खाना बनने के कारण कई वाहन बिना रुके ही निकल जाते हैं। धंधा पूरी तरह चौपट होने की कगार पर है। जल्द सिलिंडर की आपूर्ति सुचारु नहीं हुई तो ढाबा चलाना मुश्किल हो जाएगा।
हरिशंकर कुशवाहा, ढाबा के संचालक, नरायनपुर।
ऐसे बढ़े थाली के दाम
सामान - पहले - अब
दाल - 60 - 65
रोटी - छह - सात
सब्जी - 90 - 100
चावल - 40 - 45
थाली - 150 - 180
पनीर सब्जी - 140 - 160
स्पेशल थाली - 200 - 250
व्यावसायिक गैस सिलिंडर की कोई कमी नहीं है। सभी को सिलिंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पहले और अब के नियमों में थोड़ा परिवर्तन होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
बृजेश शुक्ला, जिला पूर्ति अधिकारी।