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Hamirpur News: बैंक पर पांच हजार जुर्माना, अदेयता प्रमाणपत्र देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Tue, 31 Mar 2026 12:29 AM IST
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हमीरपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष महेश कुमार कुशवाहा व सदस्य राम प्रताप के पैनल ने ऋण चुकता करने के बावजूद बैंक की ओर से बकाया दर्शाने के मामले में फैसला सुनाया है। सेवा में कमी मानते हुए बैंक को अदेयता प्रमाणपत्र जारी करने और पांच हजार क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं।
मुस्करा थाना क्षेत्र के मोहाल छह थोक निवासी गयाप्रसाद ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में भारतीय स्टेट बैंक शाखा मुस्करा के खिलाफ 20 जून 2025 को परिवाद दायर किया था। बताया था कि वर्ष 2014 में उसने बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड से ऋण लिया था। केसीसी ऋण को उन्होंने समय-समय पर जमा किया। बैंक की ओर से 25 जुलाई 2022 को 1.97 लाख रुपये बकाया का नोटिस दे दिया। बैंक कर्मियों ने 1.15 लाख रुपये जमा करने पर पूरा भुगतान मानने की बात कही।
परिवादी के अनुसार, एक नवंबर 2022 को तीन किश्तों में कुल 1.15 लाख रुपये जमा कर दिए, लेकिन बैंक ने यह रकम उनके खाते में 20 अप्रैल 2023 को दर्शाते हुए उस पर ब्याज भी जोड़ दिया। इसके चलते खाते में दोबारा बकाया दिखाया गया। आयोग के पैनल ने अभिलेखों और शपथपत्रों के आधार पर पाया कि परिवादी एक नवंबर 2022 को जमा की गई रकम को देर से खाते में दर्शाना विधि विरुद्ध है। बैंक द्वारा 1.15 लाख रुपये प्राप्त कर ऋण पूर्ण होने पर सहमति जताने के तथ्य का खंडन भी नहीं किया। साक्ष्यों के आधार पर परिवादी पर कोई बकाया देय नहीं है और बैंक द्वारा की गई कार्रवाई सेवा में कमी की श्रेणी में आती है।
आयोग ने बैंक को निर्देश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर परिवादी को अदेयता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए। साथ ही मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 2,000 रुपये का भुगतान भी करें।
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परिवादी के अनुसार, एक नवंबर 2022 को तीन किश्तों में कुल 1.15 लाख रुपये जमा कर दिए, लेकिन बैंक ने यह रकम उनके खाते में 20 अप्रैल 2023 को दर्शाते हुए उस पर ब्याज भी जोड़ दिया। इसके चलते खाते में दोबारा बकाया दिखाया गया। आयोग के पैनल ने अभिलेखों और शपथपत्रों के आधार पर पाया कि परिवादी एक नवंबर 2022 को जमा की गई रकम को देर से खाते में दर्शाना विधि विरुद्ध है। बैंक द्वारा 1.15 लाख रुपये प्राप्त कर ऋण पूर्ण होने पर सहमति जताने के तथ्य का खंडन भी नहीं किया। साक्ष्यों के आधार पर परिवादी पर कोई बकाया देय नहीं है और बैंक द्वारा की गई कार्रवाई सेवा में कमी की श्रेणी में आती है।
आयोग ने बैंक को निर्देश दिया कि वह 30 दिनों के भीतर परिवादी को अदेयता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए। साथ ही मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 2,000 रुपये का भुगतान भी करें।