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Hamirpur News: बंजर जमीन को बनाया उपजाऊ, फलों का बाग तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Tue, 31 Mar 2026 12:32 AM IST
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फोटो 30 एचएएमपी 05-महिला किसान रेखा प्रजापति। स्रोत: स्वयं
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हमीरपुर। कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों..दुष्यंत कुमार की इन पंक्तियों को मुंबई छोड़कर आईं रेखा ने साकार किया है। जहां घास नहीं उगती थी, वहां अपनी मेहनत से पेड़-पौधों व फल-फूलों की हरियाली ला दी। गांव गुढ़ा की बंजर जमीन पर फलों का बाग तैयार कर किया।
मौदहा विकास खंड क्षेत्र के ग्राम गुढ़ा निवासी रेखा प्रजापति के पति भारतीय नौसेना में गोताखोर रहे। मुंबई में ही मकान खरीद कर परिवार को शिफ्ट कर दिया। गांव की माटी में पली बढ़ी रेखा को मुंबई रास नहीं आई और वह अपनी ससुराल लौट आईं। यहां पर पानी की भारी कमी थी। खेत में चार बार बोरिंग कराई और चारों बार पानी नहीं निकला तो यहां पर पति ओमप्रकाश की तरकीब काम आई। उन्होंने बरसात के पानी को संरक्षित करने के लिए हार्वेस्टिंग सिस्टम पर काम किया।
पति संग रेखा ने बरसात के पानी के सहारे ढाई बीघा जमीन में आम, अमरूद, जामुन, बेर, संतरा, मौसमी, करौंदा, आंवला, अनार समेत अन्य फलों के पौधे लगाए। निरंतर मेहनत से पौधे पेड़ का रूप लेकर उस जमीन में लहलहा उठे जहां कभी घास तक नहीं उगती थी। खेत तालाब योजना का लाभ लिया और पानी का भरपूर संरक्षण किया। दूसरों को प्रेरित किया तो गुढ़ा क्षेत्र में एक दो नहीं 31 तालाब लोगों ने खुदवाए। रेखा आज सफल महिला किसान हैं। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए जुनून जरूरी है।
खेत तालाब योजना बनी आमदनी का सहारा
रेखा का कहना है कि खेत तालाब योजना से दोहरा लाभ मिला है। खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिला तो वहीं इसमें मछली पालन कर आमदनी का नया स्रोत खोला। अब वह मछली पालन हाईटेक तरीके से कर रही हैं। मछली के बीज के लिए टैंकर अलग बनवाया है। पशु और पक्षी पालन भी कर रही हैं।
गांव के लोगों के ताने भी सुने
रेखा बताती हैं कि मेरे पति फौजी थे, रिटायर होकर आए तो गांव में जमीन खरीदी। उस वक्त लोग ताने देते थे कि जहां जमीन खरीदी है, वहां पर तीतर का भी पेट नहीं भरेगा। कुछ लोग तो यह भी कहते थे कि पत्नी अनपढ़ है और फौजी का दिमाग घुटनों में होता है। नौकरी की पूरी कमाई गँवा दी, आज वही लोग शाबाशी दे रहे हैं। पति को भी दूसरी सरकारी नौकरी मिल गई है। वह अपना काम कर रहे और हम अपना।
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मौदहा विकास खंड क्षेत्र के ग्राम गुढ़ा निवासी रेखा प्रजापति के पति भारतीय नौसेना में गोताखोर रहे। मुंबई में ही मकान खरीद कर परिवार को शिफ्ट कर दिया। गांव की माटी में पली बढ़ी रेखा को मुंबई रास नहीं आई और वह अपनी ससुराल लौट आईं। यहां पर पानी की भारी कमी थी। खेत में चार बार बोरिंग कराई और चारों बार पानी नहीं निकला तो यहां पर पति ओमप्रकाश की तरकीब काम आई। उन्होंने बरसात के पानी को संरक्षित करने के लिए हार्वेस्टिंग सिस्टम पर काम किया।
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पति संग रेखा ने बरसात के पानी के सहारे ढाई बीघा जमीन में आम, अमरूद, जामुन, बेर, संतरा, मौसमी, करौंदा, आंवला, अनार समेत अन्य फलों के पौधे लगाए। निरंतर मेहनत से पौधे पेड़ का रूप लेकर उस जमीन में लहलहा उठे जहां कभी घास तक नहीं उगती थी। खेत तालाब योजना का लाभ लिया और पानी का भरपूर संरक्षण किया। दूसरों को प्रेरित किया तो गुढ़ा क्षेत्र में एक दो नहीं 31 तालाब लोगों ने खुदवाए। रेखा आज सफल महिला किसान हैं। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए जुनून जरूरी है।
खेत तालाब योजना बनी आमदनी का सहारा
रेखा का कहना है कि खेत तालाब योजना से दोहरा लाभ मिला है। खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिला तो वहीं इसमें मछली पालन कर आमदनी का नया स्रोत खोला। अब वह मछली पालन हाईटेक तरीके से कर रही हैं। मछली के बीज के लिए टैंकर अलग बनवाया है। पशु और पक्षी पालन भी कर रही हैं।
गांव के लोगों के ताने भी सुने
रेखा बताती हैं कि मेरे पति फौजी थे, रिटायर होकर आए तो गांव में जमीन खरीदी। उस वक्त लोग ताने देते थे कि जहां जमीन खरीदी है, वहां पर तीतर का भी पेट नहीं भरेगा। कुछ लोग तो यह भी कहते थे कि पत्नी अनपढ़ है और फौजी का दिमाग घुटनों में होता है। नौकरी की पूरी कमाई गँवा दी, आज वही लोग शाबाशी दे रहे हैं। पति को भी दूसरी सरकारी नौकरी मिल गई है। वह अपना काम कर रहे और हम अपना।

फोटो 30 एचएएमपी 05-महिला किसान रेखा प्रजापति। स्रोत: स्वयं

फोटो 30 एचएएमपी 05-महिला किसान रेखा प्रजापति। स्रोत: स्वयं