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Hamirpur News: कम पढ़े-लिखे किसान ने बदली खेती की तस्वीर, मौसमी से दोगुनी हुई आय
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Wed, 25 Mar 2026 01:12 AM IST
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फोटो24एचएएमपी 02 बिवांर क्षेत्र में किसान के खेत में लगे मौसमी का बाग। संवाद
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हमीरपुर। काम करने का जज्बा हो तो हर राह आसान हो जाती है। गांव बिवांर के किसान रामरतन प्रजापति ने अपने काम से यह साबित भी किया है। कम पढ़े लिखे होने के बावजूद आधुनिक खेती को अपनाया तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने वर्ष 1996 में मौसमी फल की खेती शुरू की, इससे उनकी पहचान जागरूक किसान के रूप में तो बनी ही आमदनी भी दो गुनी हो गई।
बिवांर गांव के किसान रामरतन प्रजापति बताते हैं कि वह कक्षा पांच तक ही पढ़े हैं। वर्ष 1996 के पहले पुराने ढर्रे पर ही खेती करते थे। इसके बाद कुछ नया करने का मन बनाया तो मौसमी की खेती शुरू की। दो हेक्टेयर में 200 पौधे लगाए। उस वक्त मेरा किसानों ने मजाक भी उड़ाया और कहा कि यहां की मिट्टी में यह मौसमी होगी ही नहीं। मैंने किसी की भी बात को नहीं सुना। मौसमी के पौधों की दिन-रात परवरिश की तो वह पेड़ बनकर फल देने लगे। इस खेती से पहला फायदा तो यह हुआ है कि खेत में वह गेहूं की खेती करते रहे। आज भी पेड़ के बीच में गेहूं, मटर की खेती करते हैं। मौसमी की खेती के बारे में बताया और कहा कि एक बीघा में 40 पेड़ लगाए जाते हैं। एक पेड़ से 50 से 150 किलो तक मौसमी फल की पैदावार होती है। तीन से चार हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल ही जाता है।
खूब मिले पुरस्कार
वर्ष 1996 में जब रामरतन ने मौसमी की खेती शुरू की तो वह कृषि विभाग, उद्यान विभाग की नजरों में आ गए। उन्होंने उद्यान विभाग की योजनाओं का भी लाभ लिया। वह कहते हैं कि मौसमी फल की खेती के लिए सबसे पहले उन्हें जिला स्तर पर सम्मान व पुरस्कार मिला। इसके बाद मंडल स्तर पर दो बार, बांदा विश्वविद्यालय, कानपुर समेत अन्य शहरों से भी उन्हें पुरस्कार मिला है। पुरस्कार तो खूब मिले और अब गर्व होता है कि वह जागरूक किसान हैं।
खेत से भी पैसा और मेड़ से भी पैसा
किसान की आय दो गुनी किसी मंत्र से नहीं होगी, इसके लिए उसे नई सोच के साथ खेती करनी होगी, यह कहना है किसान रामरतन प्रजापति का है। वह कहते हैं कि मेरा मानना है कि खेत से भी पैसा आए और मेड़ से भी पैसा आए तब किसान समृद्ध होगा। इसके लिए किसान को चाहिए कि वह मेड़ पर फलदार वृक्ष होने चाहिए। बबूल से अच्छा बेरी का पेड़ होता है जिससे लाभ मिलेगा।
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बिवांर गांव के किसान रामरतन प्रजापति बताते हैं कि वह कक्षा पांच तक ही पढ़े हैं। वर्ष 1996 के पहले पुराने ढर्रे पर ही खेती करते थे। इसके बाद कुछ नया करने का मन बनाया तो मौसमी की खेती शुरू की। दो हेक्टेयर में 200 पौधे लगाए। उस वक्त मेरा किसानों ने मजाक भी उड़ाया और कहा कि यहां की मिट्टी में यह मौसमी होगी ही नहीं। मैंने किसी की भी बात को नहीं सुना। मौसमी के पौधों की दिन-रात परवरिश की तो वह पेड़ बनकर फल देने लगे। इस खेती से पहला फायदा तो यह हुआ है कि खेत में वह गेहूं की खेती करते रहे। आज भी पेड़ के बीच में गेहूं, मटर की खेती करते हैं। मौसमी की खेती के बारे में बताया और कहा कि एक बीघा में 40 पेड़ लगाए जाते हैं। एक पेड़ से 50 से 150 किलो तक मौसमी फल की पैदावार होती है। तीन से चार हजार रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल ही जाता है।
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खूब मिले पुरस्कार
वर्ष 1996 में जब रामरतन ने मौसमी की खेती शुरू की तो वह कृषि विभाग, उद्यान विभाग की नजरों में आ गए। उन्होंने उद्यान विभाग की योजनाओं का भी लाभ लिया। वह कहते हैं कि मौसमी फल की खेती के लिए सबसे पहले उन्हें जिला स्तर पर सम्मान व पुरस्कार मिला। इसके बाद मंडल स्तर पर दो बार, बांदा विश्वविद्यालय, कानपुर समेत अन्य शहरों से भी उन्हें पुरस्कार मिला है। पुरस्कार तो खूब मिले और अब गर्व होता है कि वह जागरूक किसान हैं।
खेत से भी पैसा और मेड़ से भी पैसा
किसान की आय दो गुनी किसी मंत्र से नहीं होगी, इसके लिए उसे नई सोच के साथ खेती करनी होगी, यह कहना है किसान रामरतन प्रजापति का है। वह कहते हैं कि मेरा मानना है कि खेत से भी पैसा आए और मेड़ से भी पैसा आए तब किसान समृद्ध होगा। इसके लिए किसान को चाहिए कि वह मेड़ पर फलदार वृक्ष होने चाहिए। बबूल से अच्छा बेरी का पेड़ होता है जिससे लाभ मिलेगा।