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Hamirpur News: नौ सेगमेंट बजा रहे खतरे की घंटी, बंद कराया पुल की ओर जाने वाला रास्ता
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हमीरपुर। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे के बाद भी खतरा बना हुआ है। हादसे वाली साइट पर लोहे के विशाल फ्रेम और पिलर नंबर-4 पर रखे नौ सेगमेंट लोगों के लिए दहशत का कारण बने हैं। तकनीकी विशेषज्ञों ने इन सेगमेंटों की स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना है। इसी के चलते जिला प्रशासन ने एहतियातन पुल निर्माण स्थल की ओर जाने वाले अस्थायी रास्ते पर आवागमन रोक दिया है।
बेतवा नदी पुल निर्माण स्थल पर लोहे के फ्रेम पर आठ सेगमेंट और पिलर नंबर-4 पर एक सेगमेंट रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि इनका स्थायी जुड़ाव और प्री-स्ट्रेसिंग प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ऐसे में तेज हवा या आंधी की स्थिति में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। कंडोर और मोराकांदर परसनी गांव के बीच बेतवा नदी पर बनाया गया अस्थायी रास्ता अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसी मार्ग से पुल निर्माण सामग्री पहुंचाई जा रही थी और ग्रामीण भी आवाजाही कर रहे थे, जिससे उनका लंबा चक्कर बच रहा था।
सोमवार को जब सेतु निगम और तकनीकी जांच समिति के विशेषज्ञ घटनास्थल पर निरीक्षण कर रहे थे, तभी तेज आंधी आ गई। आंधी के दौरान लोहे के फ्रेम पर टिके सेगमेंटों में हलचल और अस्थिरता महसूस होने पर विशेषज्ञों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद जिला प्रशासन से मार्ग बंद कराने की सिफारिश की गई।
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जिलाधिकारी के निर्देश पर मंगलवार को दोनों ओर से रास्ता बंद करा दिया गया। बैरिकेडिंग के साथ टीन शेड और चेतावनी पट्टियां लगाई गई हैं। मौके पर तैनात कर्मचारी लोगों को रोककर बता रहे हैं कि ऊपर रखे सेगमेंट अभी सुरक्षित स्थिति में नहीं हैं और उनका अंतिम जुड़ाव बाकी है, ऐसे में यहां से निकलना सुरक्षित नहीं है।
हादसे के बाद से क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि हवा का तेज झोंका आते ही नजरें पुल साइट की ओर उठ जाती हैं। उन्हें डर है कि यदि दोबारा मौसम बिगड़ा तो कोई और बड़ा नुकसान हो सकता है।
कर्मचारी बोले, जब तक रखेंगे तब तक रहेंगे
बेतवा नदी पुल हादसे के बाद से कंपनी के तमाम कर्मचारी घटना वाली रात ही भाग लिए थे। कुछ कर्मचारी अभी भी डेरा डाले हैं। उनके ठेकेदार ने उन्हें काम से हटाया नहीं किया है। बताया गया कि यहां पर अभी तमाम सामान पड़ा हुआ है, इसकी सुरक्षा भी अहम मुद्दा है। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों के जो दिशा निर्देश मिल रहे हैं, उन पर भी काम किया जा रहा है। यही वजह है कि करीब 15 कर्मचारी अभी घटना स्थल पर हैं। इसमें से कुछ ठेकेदार के भी बताए जा रहे हैं। जो कर्मचारी हैं वे अपना नाम तक नहीं बता रहे है, बस यही कहते हैं कि हम तो नौकर हैं, जब तक रखा जाएगा रहेंगे नहीं तो अपने घर लौट जाएंगे। इसमें ज्यादातर दूसरे प्रदेशों के हैं।
बेतवा नदी पुल निर्माण स्थल पर लोहे के फ्रेम पर आठ सेगमेंट और पिलर नंबर-4 पर एक सेगमेंट रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि इनका स्थायी जुड़ाव और प्री-स्ट्रेसिंग प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ऐसे में तेज हवा या आंधी की स्थिति में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। कंडोर और मोराकांदर परसनी गांव के बीच बेतवा नदी पर बनाया गया अस्थायी रास्ता अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसी मार्ग से पुल निर्माण सामग्री पहुंचाई जा रही थी और ग्रामीण भी आवाजाही कर रहे थे, जिससे उनका लंबा चक्कर बच रहा था।
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सोमवार को जब सेतु निगम और तकनीकी जांच समिति के विशेषज्ञ घटनास्थल पर निरीक्षण कर रहे थे, तभी तेज आंधी आ गई। आंधी के दौरान लोहे के फ्रेम पर टिके सेगमेंटों में हलचल और अस्थिरता महसूस होने पर विशेषज्ञों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद जिला प्रशासन से मार्ग बंद कराने की सिफारिश की गई।
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हादसे के बाद से क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि हवा का तेज झोंका आते ही नजरें पुल साइट की ओर उठ जाती हैं। उन्हें डर है कि यदि दोबारा मौसम बिगड़ा तो कोई और बड़ा नुकसान हो सकता है।
कर्मचारी बोले, जब तक रखेंगे तब तक रहेंगे
बेतवा नदी पुल हादसे के बाद से कंपनी के तमाम कर्मचारी घटना वाली रात ही भाग लिए थे। कुछ कर्मचारी अभी भी डेरा डाले हैं। उनके ठेकेदार ने उन्हें काम से हटाया नहीं किया है। बताया गया कि यहां पर अभी तमाम सामान पड़ा हुआ है, इसकी सुरक्षा भी अहम मुद्दा है। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों के जो दिशा निर्देश मिल रहे हैं, उन पर भी काम किया जा रहा है। यही वजह है कि करीब 15 कर्मचारी अभी घटना स्थल पर हैं। इसमें से कुछ ठेकेदार के भी बताए जा रहे हैं। जो कर्मचारी हैं वे अपना नाम तक नहीं बता रहे है, बस यही कहते हैं कि हम तो नौकर हैं, जब तक रखा जाएगा रहेंगे नहीं तो अपने घर लौट जाएंगे। इसमें ज्यादातर दूसरे प्रदेशों के हैं।