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Hamirpur News: समय से पहले गर्मी से पतला पड़ा गेहूं का दाना
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-छह दिन पहले हुई बारिश ने शेष उम्मीदों पर भी फेर दिया पानी, पैदावार प्रभावित
-जनपद में 2.32 लाख हेक्टेयर पर बोई गई है रबी सीजन की फसल
फोटो 26 एमएएचपी 01 परिचय-मौजा खरेला में मौसम खुलने पर गेहूं की फसल की कटाई में जुटे किसान। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। बुंदेलखंड की पठारी धरती पर मौसम की बेरुखी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। समय से पहले गर्मी व पछुआ हवाओं के चलने से गेहूं का दाना पतला पड़ गया। रही-सही कसर छह दिन पहले हुई बारिश ने पूरी कर दी। इस बार किसानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद थी लेकिन उस पर पानी फिर गया। किसानों का कहना है कि जो फसल 15 दिन बाद पकनी चाहिए वह समय से पहले की पक गई। ऐसे में पैदावार कम होने से लागत निकलना भी मुश्किल नजर आ रहा है।
जनपद में 2.32 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर रबी सीजन की फसल बोई गई है। जिसमें एक लाख दो हजार हेक्टेयर में गेहूं, 40 हजार हेक्टेयर में सरसों, 70 हजार हेक्टेयर में मटर व 20 हजार हेक्टेयर पर चना की फसल पककर तैयार है। 10 दिन पहले तक मौसम का अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया था जबकि इतना तापमान अप्रैल माह में देखने को मिलता था। समय से पहले गर्मी पड़ने से फसलें प्रभावित हुईं। एक तो मौसम की बेरुखी से किसान पहले से ही परेशान थे। वहीं 20 मार्च की देर शाम दो घंटे तक बारिश हुई थी। इससे फसलें गीली हो गईं थीं। इससे किसानों को नुकसान हुआ था।
किसान प्रीतम, रामदयाल, प्रमोद, देवीदीन आदि ने बताया कि इस बार तापमान समय से पहले बढ़ने से फसलों को नुकसान हुआ। फसलें समय से पहले पक गईं। इससे दाना कमजोर पड़ा। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है। उधर, जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह का कहना है कि जनपद में राजस्व विभाग की ओर से रबी फसल का सर्वे कराया जा रहा है। हालांकि, बारिश से फसलों में नुकसान सामने नहीं आया है।
किसान बोले, पैदावार कम होने से लागत निकलना मुश्किल
फोटो 26 एमएएचपी 02 परिचय-वीर सिंह। संवाद
खरेला के किसान वीर सिंह का कहना है कि इस बार फरवरी में ही तापमान बढ़ गया। जिन फसलों को तीन पानी देना थे, उनकी चार बार सिंचाई करनी पड़ी। इसके बाद भी समय से पहले गेहूं की फसल पक गई। दाना पतला पड़ने से पैदावार पर असर पड़ा है। इसके बाद बारिश से फसलें भींग गई। इससे 50 फीसदी तक नुकसान हुआ। ऐसे में खाद-बीज की लागत व मेहनत निकलना मुश्किल है।
फोटो 26 एमएएचपी 03 परिचय-अरविंद सिंह। संवाद
किसान अरविंद सिंह कहते हैं कि बुंदेले किसानों पर कुदरत का कहर हर साल पड़ता है। कभी अतिवर्षा तो कभी अतिवृष्टि से फसलें प्रभावित होती हैं। इस बार समय से पहले तापमान बढ़ जाने से गेहूं और मसूर की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। चार दिन पहले मौसम बदलने और बारिश होने से फसलें गीली हो गईं। इससे दाना काला पड़ गया है। पिछले वर्ष ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद हुई थीं।
वर्जन
समय से पहले फसलें पकने का कारण तापमान बढ़ना है। इस बार मार्च माह की शुरुआत में ही तापमान सामान्य से चार से पांच डिग्री अधिक रहा। इसका असर फसलों की पैदावार में पड़ा है। मसूर की फसल में जहां दाना बेहद कमजोर हो गया। वहीं गेहूं की फसल भी प्रभावित हुई है। अचानक मौसम में बदलाव से बारिश हुई। इससे भी किसानों को नुकसान हुआ। -डॉ. रजनीश मिश्रा, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल, महोबा।
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-जनपद में 2.32 लाख हेक्टेयर पर बोई गई है रबी सीजन की फसल
फोटो 26 एमएएचपी 01 परिचय-मौजा खरेला में मौसम खुलने पर गेहूं की फसल की कटाई में जुटे किसान। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। बुंदेलखंड की पठारी धरती पर मौसम की बेरुखी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। समय से पहले गर्मी व पछुआ हवाओं के चलने से गेहूं का दाना पतला पड़ गया। रही-सही कसर छह दिन पहले हुई बारिश ने पूरी कर दी। इस बार किसानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद थी लेकिन उस पर पानी फिर गया। किसानों का कहना है कि जो फसल 15 दिन बाद पकनी चाहिए वह समय से पहले की पक गई। ऐसे में पैदावार कम होने से लागत निकलना भी मुश्किल नजर आ रहा है।
जनपद में 2.32 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर रबी सीजन की फसल बोई गई है। जिसमें एक लाख दो हजार हेक्टेयर में गेहूं, 40 हजार हेक्टेयर में सरसों, 70 हजार हेक्टेयर में मटर व 20 हजार हेक्टेयर पर चना की फसल पककर तैयार है। 10 दिन पहले तक मौसम का अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया था जबकि इतना तापमान अप्रैल माह में देखने को मिलता था। समय से पहले गर्मी पड़ने से फसलें प्रभावित हुईं। एक तो मौसम की बेरुखी से किसान पहले से ही परेशान थे। वहीं 20 मार्च की देर शाम दो घंटे तक बारिश हुई थी। इससे फसलें गीली हो गईं थीं। इससे किसानों को नुकसान हुआ था।
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किसान प्रीतम, रामदयाल, प्रमोद, देवीदीन आदि ने बताया कि इस बार तापमान समय से पहले बढ़ने से फसलों को नुकसान हुआ। फसलें समय से पहले पक गईं। इससे दाना कमजोर पड़ा। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है। उधर, जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह का कहना है कि जनपद में राजस्व विभाग की ओर से रबी फसल का सर्वे कराया जा रहा है। हालांकि, बारिश से फसलों में नुकसान सामने नहीं आया है।
किसान बोले, पैदावार कम होने से लागत निकलना मुश्किल
फोटो 26 एमएएचपी 02 परिचय-वीर सिंह। संवाद
खरेला के किसान वीर सिंह का कहना है कि इस बार फरवरी में ही तापमान बढ़ गया। जिन फसलों को तीन पानी देना थे, उनकी चार बार सिंचाई करनी पड़ी। इसके बाद भी समय से पहले गेहूं की फसल पक गई। दाना पतला पड़ने से पैदावार पर असर पड़ा है। इसके बाद बारिश से फसलें भींग गई। इससे 50 फीसदी तक नुकसान हुआ। ऐसे में खाद-बीज की लागत व मेहनत निकलना मुश्किल है।
फोटो 26 एमएएचपी 03 परिचय-अरविंद सिंह। संवाद
किसान अरविंद सिंह कहते हैं कि बुंदेले किसानों पर कुदरत का कहर हर साल पड़ता है। कभी अतिवर्षा तो कभी अतिवृष्टि से फसलें प्रभावित होती हैं। इस बार समय से पहले तापमान बढ़ जाने से गेहूं और मसूर की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। चार दिन पहले मौसम बदलने और बारिश होने से फसलें गीली हो गईं। इससे दाना काला पड़ गया है। पिछले वर्ष ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद हुई थीं।
वर्जन
समय से पहले फसलें पकने का कारण तापमान बढ़ना है। इस बार मार्च माह की शुरुआत में ही तापमान सामान्य से चार से पांच डिग्री अधिक रहा। इसका असर फसलों की पैदावार में पड़ा है। मसूर की फसल में जहां दाना बेहद कमजोर हो गया। वहीं गेहूं की फसल भी प्रभावित हुई है। अचानक मौसम में बदलाव से बारिश हुई। इससे भी किसानों को नुकसान हुआ। -डॉ. रजनीश मिश्रा, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र बेलाताल, महोबा।