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Hamirpur News: बैंक के कर्ज से मिली निजात, जमीन होगी बंधन मुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sat, 14 Mar 2026 11:44 PM IST
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हमीरपुर। पिता की मौत के बाद उनके नाम से बैंक में चल रहे कर्ज को चुकाने के लिए बेटे और परिवार के सदस्य राष्ट्रीय लोक अदालत पहुंचे। बैंकर्स ने समाधान करते हुए ब्याज पूरा माफ कर दिया और मूलधन में भी छूट दे दी तो लोगों ने राहत महसूस की। इस दौरान कहा कि लंबे समय बाद कर्ज से निजात मिली है, अब तो जमीन भी बंधन मुक्त हो जाएगी। बैंकों के लंबित 19,852 मामलों में 265 का निस्तारण हो पाया।
जिले के कुसमरा गांव निवासी रामप्रकाश द्विवेदी ने स्टेट बैंक से वर्ष 2012-13 किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण लिया था। इसके बाद कुछ पैसा जमा किया और वर्ष 2019 में उनकी मौत हो गई। इसके बाद बैंक द्वारा नोटिस भेजे जाते रहे। मृतक के बेटे रविप्रकाश व राहुल अपने पिता के कर्ज को चुकाने के लिए लोक अदालत पहुंचे। यहां पर 2,71,000 रुपये की बकायेदारी सामने आई। इस पर एक लाख रुपये एकमुश्त जमा कर दिए। बैंक प्रबंधन ने कहा कि अनुमोदन मिल गया तो ठीक है नहीं तो 21 हजार रुपये और जमा करने होंगे।इसी तरह मवई निवासी विशाल का मामला 21 हजार में निपटा। शहर के मोहल्ला रमेड़ी निवासी दिव्यांग मनोज वर्मा के पिता ने स्टेट बैंक से 58 हजार से अधिक का ऋण लिया था जो ब्याज सहित एक लाख 60 हजार के लगभग हो गया था। वर्ष 2020 में पिता की मौत के बाद से ही कर्ज का बोझ दिव्यांग को परेशान किए है। हालांकि एक और भाई है लेकिन उसका साथ नहीं मिल पाया। बैंक से उसका मामला महज 28 हजार में निस्तारित किया। हालांकि वह रुपये नहीं लिए था, लिहाजा उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका।
बैंक में समाधान से यहां तीन हजार रुपये अधिक बताए
चंडौत डांडा निवासी बाबूराम का उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक का 2 लाख 30 हजार के लगभग कर्ज था। बाबूराम ने बताया कि जब वह बैंक गए तो वहां पर एक लाख में समाधान करने के लिए कहा गया था, यहां आया तो तीन हजार अधिक बता दिए। इससे अच्छा तो वहीं निपटा लेते तो ठीक रहता। बैंकर्स का कहना है कि ब्याज की रकम बढ़ गई इसलिए पैसा बढ़ा होगा। बाबूराम कहते है कि एक सप्ताह में तीन हजार कैसे बढ़ जाएंगे।
बिजली विभाग ने किया परेशान तो पहुंचे लोक अदालत
विधिक शिविर की हेल्प डेस्क पर दो मामले बिजली विभाग के पहुंचे। गोहांड ब्लॉक के रहट गांव निवासी लक्ष्मी प्रसाद ने बताया कि उन्होंने सरकार की समाधान योजना के तहत बिजली विभाग में रजिस्ट्रेशन कराया था। एक लाख से अधिक का बिल था, जो समाधान के बाद 49501 रुपये रह गया। इसे किस्तों में देना था। अब वहां पर कहा जा रहा कि एक मुश्त पैसा जमा करो। लोक अदालत के कैंप से भी लौटा दिया। इस पर प्रार्थना पत्र लिखकर मांगा गया। इसी तरह भरुआ निवासी नीलम परेशान दिखी। उसका कहना है कि मुझे भी परेशान किया जा रहा। जो किस्त बनी थी अब उसके पहले चार हजार जमा करने के लिए कहा जा रहा।
15791 मामले निस्तारित, 09 करोड़ से अधिक की हुई वसूली
शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश मनोज कुमार राय द्वारा ने किया गया।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को त्वरित, सुलभ एवं किफायती न्याय उपलब्ध कराया जाता है। सचिव डॉ. महेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि एक हेल्प डेस्क बनाई गई, वहां पर कोई समस्या आ रही है तो सहयोग ले सकते है।
जिले की विभिन्न अदालतों में आपसी सुलह-समझौते के आधार पर वादों का निस्तारण किया गया। न्यायालयों द्वारा कुल 3,752 वादों का निस्तारण किया गया, जबकि राजस्व विभाग द्वारा 12,039 वादों का निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त जनपद के विभिन्न बैंकों में लंबित 19,852 प्रीलिटिगेशन मामलों में से 265 मामलों का निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर 15,791 वादों का निस्तारण किया गया। राजस्व व बैंक से चार करोड़ 22 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई, जबकि न्यायालयों में निस्तारित मामलों में लगभग 5 करोड़ 58 लाख की धनराशि समझौते के रूप में प्राप्त हुई।
13 वर्ष पुराने मामले में हुआ सुलह
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम अभिषेक त्रिपाठी ने 13 वर्षों से लंबित मामले में सुलह समझौता कराया है। अपराध संख्या 109/2012 में बिवांर के भूरेलाल का एक प्राचीन शमनीय वाद सरकार बनाम चल रहा था। दोनों पक्षों के मध्य सुलह कराकर मामले का निस्तारण कराया गया।
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जिले के कुसमरा गांव निवासी रामप्रकाश द्विवेदी ने स्टेट बैंक से वर्ष 2012-13 किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण लिया था। इसके बाद कुछ पैसा जमा किया और वर्ष 2019 में उनकी मौत हो गई। इसके बाद बैंक द्वारा नोटिस भेजे जाते रहे। मृतक के बेटे रविप्रकाश व राहुल अपने पिता के कर्ज को चुकाने के लिए लोक अदालत पहुंचे। यहां पर 2,71,000 रुपये की बकायेदारी सामने आई। इस पर एक लाख रुपये एकमुश्त जमा कर दिए। बैंक प्रबंधन ने कहा कि अनुमोदन मिल गया तो ठीक है नहीं तो 21 हजार रुपये और जमा करने होंगे।इसी तरह मवई निवासी विशाल का मामला 21 हजार में निपटा। शहर के मोहल्ला रमेड़ी निवासी दिव्यांग मनोज वर्मा के पिता ने स्टेट बैंक से 58 हजार से अधिक का ऋण लिया था जो ब्याज सहित एक लाख 60 हजार के लगभग हो गया था। वर्ष 2020 में पिता की मौत के बाद से ही कर्ज का बोझ दिव्यांग को परेशान किए है। हालांकि एक और भाई है लेकिन उसका साथ नहीं मिल पाया। बैंक से उसका मामला महज 28 हजार में निस्तारित किया। हालांकि वह रुपये नहीं लिए था, लिहाजा उसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका।
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बैंक में समाधान से यहां तीन हजार रुपये अधिक बताए
चंडौत डांडा निवासी बाबूराम का उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक का 2 लाख 30 हजार के लगभग कर्ज था। बाबूराम ने बताया कि जब वह बैंक गए तो वहां पर एक लाख में समाधान करने के लिए कहा गया था, यहां आया तो तीन हजार अधिक बता दिए। इससे अच्छा तो वहीं निपटा लेते तो ठीक रहता। बैंकर्स का कहना है कि ब्याज की रकम बढ़ गई इसलिए पैसा बढ़ा होगा। बाबूराम कहते है कि एक सप्ताह में तीन हजार कैसे बढ़ जाएंगे।
बिजली विभाग ने किया परेशान तो पहुंचे लोक अदालत
विधिक शिविर की हेल्प डेस्क पर दो मामले बिजली विभाग के पहुंचे। गोहांड ब्लॉक के रहट गांव निवासी लक्ष्मी प्रसाद ने बताया कि उन्होंने सरकार की समाधान योजना के तहत बिजली विभाग में रजिस्ट्रेशन कराया था। एक लाख से अधिक का बिल था, जो समाधान के बाद 49501 रुपये रह गया। इसे किस्तों में देना था। अब वहां पर कहा जा रहा कि एक मुश्त पैसा जमा करो। लोक अदालत के कैंप से भी लौटा दिया। इस पर प्रार्थना पत्र लिखकर मांगा गया। इसी तरह भरुआ निवासी नीलम परेशान दिखी। उसका कहना है कि मुझे भी परेशान किया जा रहा। जो किस्त बनी थी अब उसके पहले चार हजार जमा करने के लिए कहा जा रहा।
15791 मामले निस्तारित, 09 करोड़ से अधिक की हुई वसूली
शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश मनोज कुमार राय द्वारा ने किया गया।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को त्वरित, सुलभ एवं किफायती न्याय उपलब्ध कराया जाता है। सचिव डॉ. महेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि एक हेल्प डेस्क बनाई गई, वहां पर कोई समस्या आ रही है तो सहयोग ले सकते है।
जिले की विभिन्न अदालतों में आपसी सुलह-समझौते के आधार पर वादों का निस्तारण किया गया। न्यायालयों द्वारा कुल 3,752 वादों का निस्तारण किया गया, जबकि राजस्व विभाग द्वारा 12,039 वादों का निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त जनपद के विभिन्न बैंकों में लंबित 19,852 प्रीलिटिगेशन मामलों में से 265 मामलों का निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर 15,791 वादों का निस्तारण किया गया। राजस्व व बैंक से चार करोड़ 22 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई, जबकि न्यायालयों में निस्तारित मामलों में लगभग 5 करोड़ 58 लाख की धनराशि समझौते के रूप में प्राप्त हुई।
13 वर्ष पुराने मामले में हुआ सुलह
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम अभिषेक त्रिपाठी ने 13 वर्षों से लंबित मामले में सुलह समझौता कराया है। अपराध संख्या 109/2012 में बिवांर के भूरेलाल का एक प्राचीन शमनीय वाद सरकार बनाम चल रहा था। दोनों पक्षों के मध्य सुलह कराकर मामले का निस्तारण कराया गया।