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Hamirpur News: पहली बारिश में ही जवाब दे गया रपटा, हो गया क्षतिग्रस्त
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फोटो 09 एचएएमपी- 21 क्षतिग्रस्त रपटा को देखते ग्रामीण। संवाद
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मौदहा (हमीरपुर)। विकासखंड क्षेत्र के मदारपुर गांव में चंद्रावल नदी पर करीब एक साल पहले बना रपटा पहली बारिश में ही जवाब दे गया। रपटा क्षतिग्रस्त होकर टूटने से ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर काम मानकों के मुताबिक हुआ होता तो रपटा इतनी जल्दी नदी की धार के आगे घुटने नहीं टेकता।
ग्रामीण आयद अहमद का आरोप है कि रपटा निर्माण में मानकों की अनदेखी के साथ घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। नतीजा रहा कि एक साल पूरा होने से पहले ही निर्माण बारिश में ध्वस्त हो गया। ग्रामीणों का दावा है कि रपटा बनने के बाद अब तक पांच भैंसों की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग घायल हो चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निर्माण के समय जिम्मेदारों ने गुणवत्ता की जांच कितनी गंभीरता से की थी।
ग्रामीणों ने जिलास्तरीय अधिकारियों से रपटे के निर्माण की जांच कराने, दोषियों की जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षित तरीके से दोबारा निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि टूटे रपटे की अनदेखी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
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झाड़ियां बनीं मुसीबत की दीवार
ग्रामीण रामहेत, शिवप्रसाद और रामपाल ने बताया कि रपटे के आसपास विलायती बबूल और झाड़ियां फंसने से रास्ता और ज्यादा खतरनाक हो गया है। नदी का पानी और झाड़ियों के बीच आवागमन करना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा है। ग्रामीणों ने तत्काल झाड़ियां हटवाने और रपटे की मरम्मत कराने की मांग की है।
मजार पर भी मंडरा रहा कटान का खतरा
रपटे के पास स्थित प्राचीन धन शहीद बाबा की मजार पर भी नदी की कटान का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए तो नदी की धार कभी भी मजार को अपनी चपेट में ले सकती है।
मामले की जानकारी नहीं है। संबंधित अधिकारियों को भेजकर जांच कराई जाएगी। जो भी समस्या होगी, उसे सही कराया जाएगा। - मृत्युंजय कुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई विभाग।
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ग्रामीण आयद अहमद का आरोप है कि रपटा निर्माण में मानकों की अनदेखी के साथ घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। नतीजा रहा कि एक साल पूरा होने से पहले ही निर्माण बारिश में ध्वस्त हो गया। ग्रामीणों का दावा है कि रपटा बनने के बाद अब तक पांच भैंसों की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग घायल हो चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निर्माण के समय जिम्मेदारों ने गुणवत्ता की जांच कितनी गंभीरता से की थी।
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ग्रामीणों ने जिलास्तरीय अधिकारियों से रपटे के निर्माण की जांच कराने, दोषियों की जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षित तरीके से दोबारा निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि टूटे रपटे की अनदेखी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
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झाड़ियां बनीं मुसीबत की दीवार
ग्रामीण रामहेत, शिवप्रसाद और रामपाल ने बताया कि रपटे के आसपास विलायती बबूल और झाड़ियां फंसने से रास्ता और ज्यादा खतरनाक हो गया है। नदी का पानी और झाड़ियों के बीच आवागमन करना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा है। ग्रामीणों ने तत्काल झाड़ियां हटवाने और रपटे की मरम्मत कराने की मांग की है।
मजार पर भी मंडरा रहा कटान का खतरा
रपटे के पास स्थित प्राचीन धन शहीद बाबा की मजार पर भी नदी की कटान का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए तो नदी की धार कभी भी मजार को अपनी चपेट में ले सकती है।
मामले की जानकारी नहीं है। संबंधित अधिकारियों को भेजकर जांच कराई जाएगी। जो भी समस्या होगी, उसे सही कराया जाएगा। - मृत्युंजय कुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई विभाग।