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Hamirpur News: एनएच-34 चौड़ीकरण के लिए घेरा डीएम दफ्तर, महिलाओं ने दफ्तर के सामने फेंकी चूड़ियां

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 12:26 AM IST
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The DM's office was surrounded for the widening of NH-34, and women threw bangles in front of the office.
फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद - फोटो : जिला चिकित्सालय में डीडीआरसी के सामने प्याऊ का उद्घाटन करती डीएम।
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हमीरपुर। कानपुर-सागर हाईवे पर आए दिन हो रहे हादसों के बीच बृहस्पतिवार को डिवाइडर निर्माण व सड़क चौड़ीकरण की मांग कर कलक्ट्रेट परिसर में बड़ी संख्या में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने धरना प्रदर्शन किया। जब जिलाधिकारी स्वयं ज्ञापन लेने बाहर नहीं आए तो आंदोलनकारी उग्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने खूनी सड़क नहीं चलेगी और डीएम साहब बाहर आओ के नारे लगाए। महिलाओं ने चूड़ियां दिखाकर विरोध जताया।





बृहस्पतिवार को नगर पालिका परिषद के पार्क में नेशनल हाईवे-34 के चौड़ीकरण की मांग को लेकर सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इसमें पहले सड़क सुरक्षा को लेकर जन आंदोलन की रणनीति तय की गई। दोपहर करीब 11:40 बजे सभी लोग जुलूस के रूप में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। इसमें भाजपा, कांग्रेस, सपा, भीमआर्मी, बजरंगदल, ब्राह्मण एकता परिषद से लेकर अन्य संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कहा कि एनएच-34 अब खूनी हाईवे बन चुका है। आए दिन हो रहे हादसों में लोगों की जान जा रही है लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकाला गया।
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लोगों ने हाईवे को फोरलेन करने, बीच में डिवाइडर बनाने, ब्लैक स्पॉट सुधारने, रिफ्लेक्टर, संकेतक, हाईमास्ट लाइट और सुरक्षा बैरियर लगाने की मांग उठाई। कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी ने अतिरिक्त एसडीएम को ज्ञापन लेने भेजा तो प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन देने से मना कर दिया। इसके बाद एडीएम राकेश कुमार को भी ज्ञापन नहीं दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने डीएम से पांच लोगों के मिलने की बात भी ठुकरा दी। सभी ने डीएम को बाहर आकर ज्ञापन लेने और उनसे बात करने की आवाज उठाई। जब काफी देर तक डीएम अभिषेक कुमार बाहर नहीं निकले तो आंदोलनकारी उग्र हो गए और दफ्तर के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
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करीब एक घंटे से अधिक समय तक प्रदर्शनकारी डीएम कार्यालय के बाहर बैठे रहे। इससे नाराज लोगों ने भविष्य में बड़े जन आंदोलन की चेतावनी दी। इस दौरान ब्राह्मण एकता परिषद महिला विंग की जिलाध्यक्ष दीपा तिवारी, दीपक मिश्रा, रविंद्र भारतवंशी, बजरंग दल के पूर्व संयोजक आशीष सिंह, अभय प्रताप सिंह, बउवा ठाकुर, भाकियू के शहबाज अली समेत अन्य लोग मौजूद रहे।




धूप में बेहोश हुईं दो महिलाएं



धरने के दौरान गर्मी और चिलचिलाती धूप से प्रदर्शनकारी महिला लक्ष्मी देवी व प्रीति अवस्थी की हालत बिगड़ गई। वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। इस पर महिलाओं ने पानी के छींटे मारे। इसके बाद प्रदर्शनकारी और अधिक आक्रोशित हो गए। प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महिलाओं ने प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए चूड़ियां दिखाकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो वहीं दफ्तर परिसर में चूड़ियां फोड़ दीं। वहीं डीएम दफ्तर के बाहर तेज धूप में प्रदर्शनकारी पानी के लिए भी परेशान हुए। हालांकि कुछ साथियों ने पानी की बोतलें लाकर दी तब जाकर कुछ राहत मिली।







जारी रहेगा आंदोलन



यह आंदोलन जनहित में है। कलक्ट्रेट में जनता की आवाज नहीं सुनी गई। अब लोग जागरूक हुए हैं। आए दिन हादसे होते हैं और लोगों की जान चली जाती है। अब और बर्दाश्त नहीं होगा। सड़क के चौड़ीकरण, डिवाइडर बनने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। - अशोक निषाद, अध्यक्ष, बुंदेलखंड रक्तदान समिति







आश्वासन नहीं समाधान चाहिए



एनएच-34 को फोरलेन बनाए जाने के बहुत से आश्वासन मिले हैं लेकिन अब समाधान चाहिए। यह खूनी हाईवे बन चुका है। आज डीएम को हम सभी की बात सुननी चाहिए थी। - हसन खान गोलू, आजाद समाज पार्टी







करेंगे अनिश्चितकालीन धरना

राठ, मुस्करा, सरीला, भरुआ सुमेरपुर और मौदहा सहित दूर-दराज क्षेत्रों से लोग आंदोलन में आए हैं। यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन धरना और जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। - अंकित पंडित, समाजसेवी







सड़क का चौड़ीकरण जरूरी



यह आंदोलन सर्वदलीय है। उद्देश्य मात्र इतना है कि हाईवे पर अब और जानें न जाएं। इसलिए इसका चौड़ीकरण और डिवाइडर बनाना जरूरी है इसी मांग के लिए प्रदर्शन किया है। हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने आए थे लेकिन डीएम बाहर नहीं निकले। - युगांक मिश्रा, सपा नेता





हादसे अब और बर्दाश्त नहीं



पूर्व में भाजपा सांसद, विधायक सदन में फोरलेन का मुद्दा उठा चुके हैं लेकिन धरातल पर सिर्फ मौतें ही देखने को मिली हैं। आए दिन के हादसे अब और बर्दाश्त नहीं। डीएम जनता की समस्या सुनने के लिए हैं और हम सभी समस्या सुनाने ही गए थे। - शिवेंद्र सिंह शिवा, भाजपा जिलाउपाध्यक्ष




शांत नहीं होने वाला जनआंदोलन



प्रशासन की हिटलरशाही नहीं चलेगी। हाईवे पर रोज हादसे हो रहे हैं। हम सभी उन मौतों को रोके जाने की मांग और समाधान के लिए पहुंचे थे लेकिन हमारी बात सुनी ही नहीं गई। यह जनआंदोलन है अब शांत होने वाला नहीं। - साधना, ब्राह्मण एकता परिषद





नहीं सुनी गई हमारी पीड़ा


एनएच 34 पर आए दिन किसी के घर का चिराग बुझता है तो किसी की मांग का सिंदूर उजड़ता है। अब यह और बर्दाश्त नहीं है। चार दिन से आंदोलन चल रहा है। डीएम को ज्ञापन देकर अपनी बात शासन तक पहुंचाना चाहते थे लेकिन उन्होंने हमारी पीड़ा सुनना जरूरी नहीं समझा। - नीलम निषाद, पूर्व जिलाध्यक्ष, कांग्रेस


पुलिस छावनी में तब्दील हुआ डीएम दफ्तर



प्रदर्शन को उग्र होते देख प्रशासन अलर्ट हो गया। अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार वर्मा, एसडीएम अभिषेक कुमार, अतिरिक्त एसडीएम केडी शर्मा, सीओ सदर राजेश कमल, कोतवाली प्रभारी रामआसरे सरोज मौके पर पहुंचे। इसके अलावा भारी पुलिस बल तैनात हो गया। महिला थाना प्रभारी से लेकर महिला फोर्स भी मौजूद रहा। इस दौरान अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का भरसक प्रयास किया पर लोग शांत नहीं हुए।




ज्ञापन लेने को तैयार थे प्रतिनिधिमंडल नहीं आया



एडीएम राकेश कुमार ने कहा कि प्रशासन ज्ञापन लेने के लिए पूरी तरह तैयार था। सामान्य प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया था लेकिन प्रदर्शनकारियों की ओर से कोई प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन देने नहीं आया। उन्होंने कहा कि जनपद में धारा 144 लागू है और बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से पहले अनुमति लेना आवश्यक होता है।




ब्लैक स्पॉट चिह्नित सुरक्षा इंतजाम अधूरे



एनएच-34, एसएच-42 और अन्य प्रमुख मार्गों पर कई ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। मौदहा चौराहा, राठ तिराहा, मंगरौठ मोड़, आंबेडकर चौराहा राठ और रोहन नाला जैसे स्थान संवेदनशील माने गए हैं। कई जगह संकेतक, रिफ्लेक्टर, स्पीड लिमिट बोर्ड और सुरक्षा इंतजाम अधूरे पड़े हैं। कहीं सड़क क्षतिग्रस्त है तो कहीं भूमि विवाद और न्यायालय मामलों के कारण कार्य प्रभावित है।




हादसों के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता



जिले में वर्ष 2025 में 389 सड़क दुर्घटनाओं में 224 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 349 लोग घायल हुए थे। वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 111 हादसे हो चुके हैं जिसमें 61 लोगों की मौत और 101 लोग घायल हो चुके हैं। यह आंकड़े तो सिर्फ डेढ़ वर्ष के हैं इसके पहले हर साल बड़ी संख्या में लोगों ने कानपुर-सागर हाईवे पर जान गंवाई हैं। एनएच-34 पर पिछले तीन वर्षों में कई भीषण हादसे सामने आए हैं। जुलाई 2024 में राठ तिराहे पर ट्रक और डंपर की भिड़ंत के बाद दोनों वाहनों में आग लगने से दो चालक जिंदा जल गए थे। फरवरी 2025 में छिरका के पास दो डंपरों की भिड़ंत में तीन लोगों की मौत हुई थी। 27 अप्रैल 2026 को बरातियों की वैन हादसे का शिकार हुई थी जबकि 17 मई 2026 को श्रद्धालुओं की कार ट्रक से भिड़ने पर चार लोगों की जान चली गई थी।

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद- फोटो : जिला चिकित्सालय में डीडीआरसी के सामने प्याऊ का उद्घाटन करती डीएम।

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद- फोटो : जिला चिकित्सालय में डीडीआरसी के सामने प्याऊ का उद्घाटन करती डीएम।

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद- फोटो : जिला चिकित्सालय में डीडीआरसी के सामने प्याऊ का उद्घाटन करती डीएम।

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद- फोटो : जिला चिकित्सालय में डीडीआरसी के सामने प्याऊ का उद्घाटन करती डीएम।

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फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद- फोटो : जिला चिकित्सालय में डीडीआरसी के सामने प्याऊ का उद्घाटन करती डीएम।

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद

फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद- फोटो : जिला चिकित्सालय में डीडीआरसी के सामने प्याऊ का उद्घाटन करती डीएम।

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फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद- फोटो : जिला चिकित्सालय में डीडीआरसी के सामने प्याऊ का उद्घाटन करती डीएम।

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फोटो21एचएएमपी 22- ज्ञापन देने जाते एनएच-34 के आंदोलनकारी। संवाद- फोटो : जिला चिकित्सालय में डीडीआरसी के सामने प्याऊ का उद्घाटन करती डीएम।

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