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Hamirpur News: तीसरी जांच में भी गबन की पुष्टि, नियमों को दरकिनार कर हुए भुगतान
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भरुआ सुमेरपुर। क्षेत्र की ग्राम पंचायत बड़ागांव में विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। तीसरी बार कराई गई जांच में भी 6,56,302 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। वहीं हाईकोर्ट ने भी 27 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और धनराशि वसूली के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता रमेश निषाद की शिकायत पर जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच टीमों ने पाया कि कार्यों में निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियमों को दरकिनार कर भुगतान हुए। जांच के दाैरान सामने आया कि फर्जी बिल-वाउचर, हस्ताक्षर रहित मस्टररोल और अपूर्ण माप पुस्तिकाओं के आधार पर भुगतान किया गया। साथ ही ग्राम प्रधान के परिजन के खातों में धनराशि ट्रांसफर होने से मिलीभगत के संकेत मिले हैं। पहले और दूसरी जांच में भी अनियमितताएं मिलने के बावजूद प्रधान के आग्रह पर तीसरी जांच कराई गई जिसमें अनियमितताओं की पुष्टि हुई है।
तीसरी जांच समिति में एडीएम (वित्त/राजस्व) राकेश कुमार, परियोजना निदेशक डीआरडीए नवीन कुमार गुप्ता एवं मौदहा बांध के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार शामिल रहे। इन्होंने भी ग्राम प्रधान हरदौल निषाद, तत्कालीन सचिव ओमप्रकाश प्रजापति, अवर अभियंता महेश चंद्र और कंसल्टिंग इंजीनियर अनूप सोनी सहित अन्य को दोषी ठहराया है। प्रशासन पहले ही प्रधान की शक्तियां सीज कर चुका है और कंसल्टिंग इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी थी। संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।
इधर मामला उच्च न्यायालय पहुंचने पर 27 अप्रैल को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर शीघ्र कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही गबन की गई धनराशि की वसूली के भी आदेश दिए गए हैं।
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शिकायतकर्ता रमेश निषाद की शिकायत पर जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच टीमों ने पाया कि कार्यों में निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियमों को दरकिनार कर भुगतान हुए। जांच के दाैरान सामने आया कि फर्जी बिल-वाउचर, हस्ताक्षर रहित मस्टररोल और अपूर्ण माप पुस्तिकाओं के आधार पर भुगतान किया गया। साथ ही ग्राम प्रधान के परिजन के खातों में धनराशि ट्रांसफर होने से मिलीभगत के संकेत मिले हैं। पहले और दूसरी जांच में भी अनियमितताएं मिलने के बावजूद प्रधान के आग्रह पर तीसरी जांच कराई गई जिसमें अनियमितताओं की पुष्टि हुई है।
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तीसरी जांच समिति में एडीएम (वित्त/राजस्व) राकेश कुमार, परियोजना निदेशक डीआरडीए नवीन कुमार गुप्ता एवं मौदहा बांध के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार शामिल रहे। इन्होंने भी ग्राम प्रधान हरदौल निषाद, तत्कालीन सचिव ओमप्रकाश प्रजापति, अवर अभियंता महेश चंद्र और कंसल्टिंग इंजीनियर अनूप सोनी सहित अन्य को दोषी ठहराया है। प्रशासन पहले ही प्रधान की शक्तियां सीज कर चुका है और कंसल्टिंग इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी थी। संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।
इधर मामला उच्च न्यायालय पहुंचने पर 27 अप्रैल को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर शीघ्र कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही गबन की गई धनराशि की वसूली के भी आदेश दिए गए हैं।

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