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Hamirpur News: घर में घुसकर मारपीट करने के तीन दोषियों को चार-चार साल की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Wed, 21 Jan 2026 11:58 PM IST
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हमीरपुर। जनपद की एससीएसटी एक्ट न्यायालय के विशेष न्यायाधीश रनवीर सिंह ने 15 वर्ष पूर्व घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में फैसला सुनाया।
तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए चार-चार साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसी के साथ 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। और न भरने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास अदालत ने मामले के तीन आरोपियों कैलाश, गोपाल और शिवराम यादव को विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया गया है।
घटनाक्रम में अरतरा गांव निवासी मुलिया पत्नी कामता प्रसाद ने तीन नवंबर 2008 को तहसील दिवस में एक शिकायती पत्र दिया था। इसमें आरोप लगाया था कि जब वह शाम छह बजे घर में खाना बना रही थी,तभी कैलाश, गोपाल और शिवराम यादव हाथों में लाठी डंडे लेकर आ गए। मारपीट करते हुए जाति सूचक गालियां दी और पुराने मामले में राजीनामा न करने पर गांव में न रहने देने की धमकी दी। उक्त प्रकरण की जानकारी मुलिया ने पुलिस को दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
तहसील दिवस में शिकायती की लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर अनुसूचित जाति जनजाति आयोग में शिकायत की इसके बाद पुलिस ने 21 अक्तूबर 2009 को थाना पुलिस ने तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। वर्ष 2009 में ही पुलिस ने शिवराम के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया। कैलाश व गोपाल के विरुद्ध मामले में विवेचना जारी रही।
विवेचना के बाद उक्त दोनों के आरोप पत्र भी दाखिल किए। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने पुख्ता गवाह और साक्ष्य पेश किए।न्यायाधीश ने गवाह और साक्ष्यों के आधार पर और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
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तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए चार-चार साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसी के साथ 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। और न भरने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास अदालत ने मामले के तीन आरोपियों कैलाश, गोपाल और शिवराम यादव को विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया गया है।
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घटनाक्रम में अरतरा गांव निवासी मुलिया पत्नी कामता प्रसाद ने तीन नवंबर 2008 को तहसील दिवस में एक शिकायती पत्र दिया था। इसमें आरोप लगाया था कि जब वह शाम छह बजे घर में खाना बना रही थी,तभी कैलाश, गोपाल और शिवराम यादव हाथों में लाठी डंडे लेकर आ गए। मारपीट करते हुए जाति सूचक गालियां दी और पुराने मामले में राजीनामा न करने पर गांव में न रहने देने की धमकी दी। उक्त प्रकरण की जानकारी मुलिया ने पुलिस को दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
तहसील दिवस में शिकायती की लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर अनुसूचित जाति जनजाति आयोग में शिकायत की इसके बाद पुलिस ने 21 अक्तूबर 2009 को थाना पुलिस ने तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। वर्ष 2009 में ही पुलिस ने शिवराम के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया। कैलाश व गोपाल के विरुद्ध मामले में विवेचना जारी रही।
विवेचना के बाद उक्त दोनों के आरोप पत्र भी दाखिल किए। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने पुख्ता गवाह और साक्ष्य पेश किए।न्यायाधीश ने गवाह और साक्ष्यों के आधार पर और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
