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Hamirpur News: मौसम बदलने के साथ बच्चों में निमोनिया व डायरिया का प्रकोप
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- जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज 15 से 20 बच्चों में सामने आ रहे लक्षण
फोटो25 एचएएमपी 03- जिला अस्पताल में मरीजों की जांच करते डॉक्टर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में बदलते मौसम के कारण बच्चों की सेहत बिगड़ रही है। तापमान में उतार-चढ़ाव और साफ-सफाई की अनदेखी से निमोनिया तथा डायरिया के मामले बढ़ गए हैं। जिला अस्पताल में रोजाना 15 से 20 बच्चे इन बीमारियों के उपचार के लिए आ रहे हैं।
शुक्रवार को जिला अस्पताल में कुल 562 मरीज पहुंचे, जिनमें 100 बालरोगी शामिल थे। इनमें से रोजाना 15 से 20 बच्चों में निमोनिया और डायरिया के लक्षण दिख रहे हैं। बच्चों में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण भी सामने आ रहे हैं। मौसम बदलने पर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इससे वे जल्दी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और दूषित पानी भी बीमारियों का कारण बन रहे हैं। हाथों की सही सफाई न होना और ठंड-गर्मी से बचाव में लापरवाही भी प्रमुख कारण हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष निरंजन ने बताया कि गंभीर बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। शुक्रवार को करीब 100 बच्चों का उपचार किया गया। इनमें एक निमोनिया पीड़ित बच्चे को भर्ती किया गया। तीन निमोनिया पीड़ित बच्चे पहले से ही अस्पताल में भर्ती हैं। इसके अतिरिक्त, तीन बच्चे डायरिया के कारण भी अस्पताल में भर्ती हैं। डॉ. निरंजन आवश्यक जांच के बाद बच्चों को दवाएं देकर घर भेज रहे हैं।
बच्चों के लिए सावधानियां
बच्चों को हमेशा उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिलाना चाहिए। बाहर का तला-भुना और खुले में रखा भोजन उन्हें बिल्कुल न दें। बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और हाथ धोने की आदत डालें। सांस संबंधी परेशानी, तेज बुखार या लगातार दस्त होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाएं।
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फोटो25 एचएएमपी 03- जिला अस्पताल में मरीजों की जांच करते डॉक्टर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में बदलते मौसम के कारण बच्चों की सेहत बिगड़ रही है। तापमान में उतार-चढ़ाव और साफ-सफाई की अनदेखी से निमोनिया तथा डायरिया के मामले बढ़ गए हैं। जिला अस्पताल में रोजाना 15 से 20 बच्चे इन बीमारियों के उपचार के लिए आ रहे हैं।
शुक्रवार को जिला अस्पताल में कुल 562 मरीज पहुंचे, जिनमें 100 बालरोगी शामिल थे। इनमें से रोजाना 15 से 20 बच्चों में निमोनिया और डायरिया के लक्षण दिख रहे हैं। बच्चों में बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण भी सामने आ रहे हैं। मौसम बदलने पर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इससे वे जल्दी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
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खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और दूषित पानी भी बीमारियों का कारण बन रहे हैं। हाथों की सही सफाई न होना और ठंड-गर्मी से बचाव में लापरवाही भी प्रमुख कारण हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष निरंजन ने बताया कि गंभीर बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। शुक्रवार को करीब 100 बच्चों का उपचार किया गया। इनमें एक निमोनिया पीड़ित बच्चे को भर्ती किया गया। तीन निमोनिया पीड़ित बच्चे पहले से ही अस्पताल में भर्ती हैं। इसके अतिरिक्त, तीन बच्चे डायरिया के कारण भी अस्पताल में भर्ती हैं। डॉ. निरंजन आवश्यक जांच के बाद बच्चों को दवाएं देकर घर भेज रहे हैं।
बच्चों के लिए सावधानियां
बच्चों को हमेशा उबला हुआ या शुद्ध पानी ही पिलाना चाहिए। बाहर का तला-भुना और खुले में रखा भोजन उन्हें बिल्कुल न दें। बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं और हाथ धोने की आदत डालें। सांस संबंधी परेशानी, तेज बुखार या लगातार दस्त होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाएं।
