{"_id":"6a52ad636f25b2c76d09e349","slug":"mohit-lost-his-life-due-to-the-negligence-of-the-hospital-and-the-police-hapur-news-c-135-1-hpr1001-144622-2026-07-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hapur News: अस्पताल और पुलिस की लापरवाही की भेंट चढ़ गया मोहित, चली गई जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hapur News: अस्पताल और पुलिस की लापरवाही की भेंट चढ़ गया मोहित, चली गई जान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हापुड़। अस्पतालों और पुलिस की संवेदनहीन लापरवाही से नगर के मोहल्ला केशव नगर निवासी 38 वर्षीय मोहित शर्मा की जान चली गई। नोएडा से घर लौटते समय लापता हुए मोहित को परिजन दो दिन तक दर दर तलाशते रहे। जब तक परिजन मेरठ मेडिकल पहुंचे, काफी देर हो चुकी थी। परिजनों ने मामले में कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों के अनुसार केशव नगर निवासी मोहित शर्मा पुत्र जितेंद्र शर्मा नोएडा की एक कार कंपनी में सेल्स का काम करते थे। आठ जुलाई की शाम रोज की तरह वे अपनी स्कूटी पर सवार होकर हापुड़ आने के लिए निकले थे। लेकिन वे हापुड़ नहीं पहुंचे और उनका फोन भी बंद हो गया। परिजन पूरी रात उन्हें तलाशते रहे, लेकिन उनका कोई अता पता नहीं चला। अगले दिन नौ जुलाई को परिजन हापुड़ नगर कोतवाली पहुंचे और उनकी गुमशुदगी के संबंध में पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शाम के समय गुमशुदगी भी दर्ज कर ली, लेकिन उनकी तलाश में किसी प्रकार की कार्यवाही शुरू नहीं की।
मोहित के चचेरे भाई योगेश शर्मा ने बताया कि मोहित के न मिलने पर परिजन 10 जुलाई को पिलखुवा के एक निजी अस्पताल में तलाशते हुए पहुंचे तो परिजनों को इमरजेंसी के बाहर मोहित की स्कूटी खड़ी हुई मिली। परिजन अंदर पहुंचे तो अस्पताल के स्टॉफ ने बताया कि मोहित को किसी ने आठ जुलाई की शाम घायल अवस्था में भर्ती कराया था। बड़ी लापरवाही यह है कि मोहित के घायल होने की सूचना बिना पुलिस को दिए अस्पताल ने उन्हें पिलखुवा के दूसरे निजी अस्पताल भेज दिया। दूसरे निजी अस्पताल ने भी उन्हें हापुड़ जिला अस्पताल में भेज दिया। इसके बाद उन्हें बिना शिनाख्त का प्रयास किए मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया गया। परिजन तलाशते हुए 10 जुलाई को मेरठ मेडिकल पहुंचे, लेकिन तब तक मोहित की हालत काफी बिगड़ चुकी थी और उन्होंने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
अब सवाल यह है कि पुलिस में गुमशुदगी दर्ज करने के बाद पुलिस ने आसपास के क्षेत्र के अस्पतालों से संपर्क क्यों नहीं किया। अस्पताल की ओर से भी घायल के भर्ती होने की जानकारी पुलिस को क्यों नहीं दी गई। सबसे बड़ा सवाल स्कूटी के नंबर से भी मोहित की पहचान की जा सकती थी। लेकिन किसी ने ऐसा करने की भी कोशिश नहीं की। दो दिन तक बिना इलाज के घायल मोहित की मौत पर अस्पताल और पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का यह भी आरोप है कि मोहित के पास उसकी पहचान से संबंधी दस्तावेज भी मौजूद थे। परिजनों ने उनकी हत्या का भी आरोप लगाया है।
इस मामले में सीओ अनीता चौहान का कहना है कि ऐसे मामलों में अस्पताल पुलिस को जानकारी देता है, इस मामले में जानकारी क्यों नहीं दी गई, इसकी जांच कराई जाएगी। पुलिस की लापरवाही की भी जांच होगी।
विज्ञापन
परिजनों के अनुसार केशव नगर निवासी मोहित शर्मा पुत्र जितेंद्र शर्मा नोएडा की एक कार कंपनी में सेल्स का काम करते थे। आठ जुलाई की शाम रोज की तरह वे अपनी स्कूटी पर सवार होकर हापुड़ आने के लिए निकले थे। लेकिन वे हापुड़ नहीं पहुंचे और उनका फोन भी बंद हो गया। परिजन पूरी रात उन्हें तलाशते रहे, लेकिन उनका कोई अता पता नहीं चला। अगले दिन नौ जुलाई को परिजन हापुड़ नगर कोतवाली पहुंचे और उनकी गुमशुदगी के संबंध में पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शाम के समय गुमशुदगी भी दर्ज कर ली, लेकिन उनकी तलाश में किसी प्रकार की कार्यवाही शुरू नहीं की।
विज्ञापन
मोहित के चचेरे भाई योगेश शर्मा ने बताया कि मोहित के न मिलने पर परिजन 10 जुलाई को पिलखुवा के एक निजी अस्पताल में तलाशते हुए पहुंचे तो परिजनों को इमरजेंसी के बाहर मोहित की स्कूटी खड़ी हुई मिली। परिजन अंदर पहुंचे तो अस्पताल के स्टॉफ ने बताया कि मोहित को किसी ने आठ जुलाई की शाम घायल अवस्था में भर्ती कराया था। बड़ी लापरवाही यह है कि मोहित के घायल होने की सूचना बिना पुलिस को दिए अस्पताल ने उन्हें पिलखुवा के दूसरे निजी अस्पताल भेज दिया। दूसरे निजी अस्पताल ने भी उन्हें हापुड़ जिला अस्पताल में भेज दिया। इसके बाद उन्हें बिना शिनाख्त का प्रयास किए मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया गया। परिजन तलाशते हुए 10 जुलाई को मेरठ मेडिकल पहुंचे, लेकिन तब तक मोहित की हालत काफी बिगड़ चुकी थी और उन्होंने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
अब सवाल यह है कि पुलिस में गुमशुदगी दर्ज करने के बाद पुलिस ने आसपास के क्षेत्र के अस्पतालों से संपर्क क्यों नहीं किया। अस्पताल की ओर से भी घायल के भर्ती होने की जानकारी पुलिस को क्यों नहीं दी गई। सबसे बड़ा सवाल स्कूटी के नंबर से भी मोहित की पहचान की जा सकती थी। लेकिन किसी ने ऐसा करने की भी कोशिश नहीं की। दो दिन तक बिना इलाज के घायल मोहित की मौत पर अस्पताल और पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का यह भी आरोप है कि मोहित के पास उसकी पहचान से संबंधी दस्तावेज भी मौजूद थे। परिजनों ने उनकी हत्या का भी आरोप लगाया है।
इस मामले में सीओ अनीता चौहान का कहना है कि ऐसे मामलों में अस्पताल पुलिस को जानकारी देता है, इस मामले में जानकारी क्यों नहीं दी गई, इसकी जांच कराई जाएगी। पुलिस की लापरवाही की भी जांच होगी।