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Hapur News: पुलिस की लापरवाही ने छीन लिया आखिरी दीदार, बिना शिनाख्त कर दिया अंतिम संस्कार
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सिंभावली। क्षेत्र में सामने आई पुलिस की लापरवाही ने एक परिवार को ऐसा जख्म दे दिया है, जो शायद ही कभी भर पाए। गांव माधापुर निवासी प्रशांत की मौत सड़क हादसे में हुई, लेकिन परिजनों का आरोप है कि असली वजह पुलिस की लापरवाही बनी। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि परिवार को अपने बेटे का चेहरा तक आखिरी बार देखने को भी नहीं मिल सका।
मृतक के पिता ऋषिपाल सिंह का दर्द शब्दों में बयां नहीं हो पा रहा। रोते हुए उन्होंने कहा कि उनका बेटा सड़क हादसे में नहीं, बल्कि पुलिस की अनदेखी के कारण इस दुनिया से चला गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुलिस उन्हें सूचना देती, तो वह बेटे को बेहतर अस्पताल में भर्ती कराकर उसकी जान बचाने की कोशिश कर सकते थे। परिवार के अन्य सदस्यों का भी यही कहना है कि आधुनिक समय में जब पहचान के कई साधन उपलब्ध हैं, तब भी पुलिस मृतक की शिनाख्त नहीं कर सकी। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि बेटे के जिंदा होने की उम्मीद में परिवार इधर-उधर भटकता रहा और उधर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
मां का विलाप पूरे गांव को झकझोर देने वाला है। आंसुओं के बीच उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे का चेहरा तक देखने को नहीं मिला। यह पीड़ा केवल एक मां ही समझ सकती है, जिसने अपने जिगर के टुकड़े को बिना अंतिम विदाई दिए खो दिया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारी निभाई जाती, तो न केवल इलाज संभव होता बल्कि परिवार को अंतिम संस्कार का हक भी मिल पाता। अब यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुका है। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
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मृतक के पिता ऋषिपाल सिंह का दर्द शब्दों में बयां नहीं हो पा रहा। रोते हुए उन्होंने कहा कि उनका बेटा सड़क हादसे में नहीं, बल्कि पुलिस की अनदेखी के कारण इस दुनिया से चला गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुलिस उन्हें सूचना देती, तो वह बेटे को बेहतर अस्पताल में भर्ती कराकर उसकी जान बचाने की कोशिश कर सकते थे। परिवार के अन्य सदस्यों का भी यही कहना है कि आधुनिक समय में जब पहचान के कई साधन उपलब्ध हैं, तब भी पुलिस मृतक की शिनाख्त नहीं कर सकी। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि बेटे के जिंदा होने की उम्मीद में परिवार इधर-उधर भटकता रहा और उधर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
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मां का विलाप पूरे गांव को झकझोर देने वाला है। आंसुओं के बीच उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे का चेहरा तक देखने को नहीं मिला। यह पीड़ा केवल एक मां ही समझ सकती है, जिसने अपने जिगर के टुकड़े को बिना अंतिम विदाई दिए खो दिया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारी निभाई जाती, तो न केवल इलाज संभव होता बल्कि परिवार को अंतिम संस्कार का हक भी मिल पाता। अब यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुका है। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।