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Hapur News: सीएनजी प्लांट में कामगार की संदिग्ध मौत, परिजनों ने किया हंगामा
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मृतक महेश चौहान। फाइल फोटो
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बहादुरगढ़। थाना क्षेत्र के गांव सालारपुर पलवाड़ा रोड स्थित सीएनजी प्लांट में कार्यरत एक कामगार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से बुधवार को हंगामा खड़ा हो गया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि कर्मचारी की मौत के बाद उसका शव पूरी रात प्लांट परिसर में ही रखा गया और घटना की सही जानकारी परिवार को समय पर नहीं दी गई। मामले की सूचना पर पूर्व मंत्री मदन चौहान मौके पर पहुंचे और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद परिजनों को मुआवजे और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया।
गांव सालारपुर निवासी राजवीर चौहान के बेटे महेश चौहान 45 वर्ष करीब 3-4 वर्षों से एक कंपनी के माध्यम से सीएनजी प्लांट में मजदूरी का काम कर रहे थे। उनके परिवार में पत्नी रिंकी चौहान, दो बेटे अंकित, रचित और बेटी काजल हैं।
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परिजनों के अनुसार मंगलवार देर रात करीब 12 बजे कंपनी के दो कर्मचारी उनके घर पहुंचे और बताया कि महेश की तबीयत अचानक खराब हो गई है। उन्हें डेहरा कुटी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
परिजन अस्पताल पहुंचने की तैयारी कर ही रहे थे कि कुछ ही देर बाद कंपनी के कर्मचारी महेश का शव घर लेकर पहुंच गए। शव देखते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों का आरोप: लापरवाही और सूचना में देरी
बुधवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन सीएनजी प्लांट पहुंच गए। उन्होंने प्लांट प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना था कि मौत किन परिस्थितियों में हुई इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। उनका आरोप है कि शव को पूरी रात प्लांट में रखा गया और समय रहते परिवार को सूचना नहीं दी गई।
परिजनों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आए तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतक के परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा दिलाया जाए।
पूर्व मंत्री और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
मामले की जानकारी मिलने पर पूर्व मंत्री मदन चौहान समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ तहसीलदार पवन कुमार और थानाध्यक्ष इंद्रकांत यादव भी पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से लंबी बातचीत की और उन्हें निष्पक्ष जांच कराने और नियमानुसार आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।
पूर्व मंत्री मदन चौहान ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी ओर से 1 लाख रुपये नकद की आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने प्रशासन से भी पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा और हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की।
प्लांट प्रबंधन ने भी दिया आश्वासन
घटना के बाद प्लांट संचालक की ओर से भी मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया गया। इस दौरान पूर्व मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में दिए गए आश्वासन के बाद सहायता नहीं मिलती है तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे और परिवार के साथ खड़े रहेंगे।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजनों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया। हालांकि परिजनों ने महेश का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। उनकी मांग थी कि बिना कानूनी पचड़े के शव का अंतिम संस्कार किया जाए। इसके बाद शाम को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पुलिस का बयान
सीओ राहुल यादव ने कहा मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाता, लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। प्लांट संचालक ने पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया है। मामले में प्रथम दृष्टया कोई संदिग्ध बात सामने नहीं आई है, फिर भी जांच की जा रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश
घटना के बाद गांव में मातम का माहौल है। ग्रामीणों ने प्लांट में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी को कर्मचारियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच और आपात स्थिति में तत्काल इलाज की व्यवस्था करनी चाहिए।
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परिजनों ने आरोप लगाया कि कर्मचारी की मौत के बाद उसका शव पूरी रात प्लांट परिसर में ही रखा गया और घटना की सही जानकारी परिवार को समय पर नहीं दी गई। मामले की सूचना पर पूर्व मंत्री मदन चौहान मौके पर पहुंचे और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद परिजनों को मुआवजे और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया।
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गांव सालारपुर निवासी राजवीर चौहान के बेटे महेश चौहान 45 वर्ष करीब 3-4 वर्षों से एक कंपनी के माध्यम से सीएनजी प्लांट में मजदूरी का काम कर रहे थे। उनके परिवार में पत्नी रिंकी चौहान, दो बेटे अंकित, रचित और बेटी काजल हैं।
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परिजनों के अनुसार मंगलवार देर रात करीब 12 बजे कंपनी के दो कर्मचारी उनके घर पहुंचे और बताया कि महेश की तबीयत अचानक खराब हो गई है। उन्हें डेहरा कुटी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
परिजन अस्पताल पहुंचने की तैयारी कर ही रहे थे कि कुछ ही देर बाद कंपनी के कर्मचारी महेश का शव घर लेकर पहुंच गए। शव देखते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों का आरोप: लापरवाही और सूचना में देरी
बुधवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन सीएनजी प्लांट पहुंच गए। उन्होंने प्लांट प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना था कि मौत किन परिस्थितियों में हुई इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। उनका आरोप है कि शव को पूरी रात प्लांट में रखा गया और समय रहते परिवार को सूचना नहीं दी गई।
परिजनों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आए तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतक के परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा दिलाया जाए।
पूर्व मंत्री और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
मामले की जानकारी मिलने पर पूर्व मंत्री मदन चौहान समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ तहसीलदार पवन कुमार और थानाध्यक्ष इंद्रकांत यादव भी पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से लंबी बातचीत की और उन्हें निष्पक्ष जांच कराने और नियमानुसार आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।
पूर्व मंत्री मदन चौहान ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी ओर से 1 लाख रुपये नकद की आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने प्रशासन से भी पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा और हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की।
प्लांट प्रबंधन ने भी दिया आश्वासन
घटना के बाद प्लांट संचालक की ओर से भी मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया गया। इस दौरान पूर्व मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में दिए गए आश्वासन के बाद सहायता नहीं मिलती है तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे और परिवार के साथ खड़े रहेंगे।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजनों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया। हालांकि परिजनों ने महेश का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। उनकी मांग थी कि बिना कानूनी पचड़े के शव का अंतिम संस्कार किया जाए। इसके बाद शाम को बिना किसी कानूनी कार्रवाई के अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पुलिस का बयान
सीओ राहुल यादव ने कहा मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाता, लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। प्लांट संचालक ने पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया है। मामले में प्रथम दृष्टया कोई संदिग्ध बात सामने नहीं आई है, फिर भी जांच की जा रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश
घटना के बाद गांव में मातम का माहौल है। ग्रामीणों ने प्लांट में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी को कर्मचारियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच और आपात स्थिति में तत्काल इलाज की व्यवस्था करनी चाहिए।

मृतक महेश चौहान। फाइल फोटो