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Hardoi News: 239 ग्राम पंचायतों ने 50 दिन में कर दिया दो करोड़ से अधिक का भुगतान
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हरदोई। ग्राम पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त किए जाने के बाद भुगतान का बड़ा मामला सामने आया है। एक लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने वाली 239 ग्राम पंचायतों को चिह्निति किया गया है। इन ग्राम पंचायतों ने 50 दिनों के दौरान दो करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया।
पंचायतीराज विभाग की ओर से 27 मई से ग्राम पंचायतों में प्रशासक की व्यवस्था दी गई है। निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को पूरा हो गया था। ऐसे में अब निवर्तमान प्रधान और एडीओ पंचायत प्रशासक का काम देख रहे हैं। प्रशासक नियुक्त किए जाने के साथ ही शासन ने व्यवस्था दी है कि इस अवधि में ग्राम पंचायतों में कोई नीतिगत निर्णय या नया कार्य जिलाधिकारी की अनुमति के बिना नहीं कराया जाएगा। केवल नियमित और पहले से संचालित कार्यों को ही पूरा कराया जाएगा।
सभी 19 विकास खंडों की 239 ग्राम पंचायतों में एक लाख रुपये से अधिक के भुगतान किए गए हैं। यह भुगतान राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग की मदों से किए गए हैं। शासन के निर्देशों के पालन को लेकर प्रशासन ने इन भुगतान के कामों से जुड़ी पत्रावलियों को तलब कर लिया है। बताया गया कि पंचायत सचिवों से 27 मई से अब तक कराए काम और किए गए भुगतान की सभी पत्रावलियों को तलब किया गया है। इसमें कार्य का एस्टीमेट, कार्य की आईडी, काम की स्वीकृति, मेजरमेंट बुक, मस्टर रोल, प्रमाणित बिल वाउचर और काम की थ्री लेयर फोटोग्राफ उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
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ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक पद की जिम्मेदारी मिली हैं, जहां पर निर्वाचित प्रधान नहीं हैं उन ग्राम पंचायतों में एडीओ पंचायत को यह दायित्व सौंपे गए हैं। प्रशासकों को पंचायत के सामान्य कामकाज निपटाने के लिए अधिकृत किया गया है। साथ ही पहले से चल रहे कामों को पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है। प्राथमिकता की श्रेणी में आने वाले नवीन काम और नीतिगत निर्णय के लिए डीपीआरओ के माध्यम से प्रस्ताव उन्हें प्राप्त कराएंगे। ऐसे में भुगतान और आईडी से नवीन कामों की जानकारी हो जाएगी। -अनुनय झा, जिलाधिकारी
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काम और भुगतान की पत्रावलियों को तलब किया गया है। पत्रावलियों के परीक्षण के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं पत्रावलियों को उपलब्ध न कराने वाले पंचायत सचिवों की ग्राम पंचायत में किए गए भुगतान को प्रथम दृष्टया गबन की श्रेणी में माना जाएगा। अनाधिकृत रूप से किए गए भुगतान को गबन मानते हुए संबंधित के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। -श्रेया उपाध्याय, डीपीआरओ
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पंचायतीराज विभाग की ओर से 27 मई से ग्राम पंचायतों में प्रशासक की व्यवस्था दी गई है। निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को पूरा हो गया था। ऐसे में अब निवर्तमान प्रधान और एडीओ पंचायत प्रशासक का काम देख रहे हैं। प्रशासक नियुक्त किए जाने के साथ ही शासन ने व्यवस्था दी है कि इस अवधि में ग्राम पंचायतों में कोई नीतिगत निर्णय या नया कार्य जिलाधिकारी की अनुमति के बिना नहीं कराया जाएगा। केवल नियमित और पहले से संचालित कार्यों को ही पूरा कराया जाएगा।
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सभी 19 विकास खंडों की 239 ग्राम पंचायतों में एक लाख रुपये से अधिक के भुगतान किए गए हैं। यह भुगतान राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग की मदों से किए गए हैं। शासन के निर्देशों के पालन को लेकर प्रशासन ने इन भुगतान के कामों से जुड़ी पत्रावलियों को तलब कर लिया है। बताया गया कि पंचायत सचिवों से 27 मई से अब तक कराए काम और किए गए भुगतान की सभी पत्रावलियों को तलब किया गया है। इसमें कार्य का एस्टीमेट, कार्य की आईडी, काम की स्वीकृति, मेजरमेंट बुक, मस्टर रोल, प्रमाणित बिल वाउचर और काम की थ्री लेयर फोटोग्राफ उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
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ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक पद की जिम्मेदारी मिली हैं, जहां पर निर्वाचित प्रधान नहीं हैं उन ग्राम पंचायतों में एडीओ पंचायत को यह दायित्व सौंपे गए हैं। प्रशासकों को पंचायत के सामान्य कामकाज निपटाने के लिए अधिकृत किया गया है। साथ ही पहले से चल रहे कामों को पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है। प्राथमिकता की श्रेणी में आने वाले नवीन काम और नीतिगत निर्णय के लिए डीपीआरओ के माध्यम से प्रस्ताव उन्हें प्राप्त कराएंगे। ऐसे में भुगतान और आईडी से नवीन कामों की जानकारी हो जाएगी। -अनुनय झा, जिलाधिकारी
काम और भुगतान की पत्रावलियों को तलब किया गया है। पत्रावलियों के परीक्षण के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं पत्रावलियों को उपलब्ध न कराने वाले पंचायत सचिवों की ग्राम पंचायत में किए गए भुगतान को प्रथम दृष्टया गबन की श्रेणी में माना जाएगा। अनाधिकृत रूप से किए गए भुगतान को गबन मानते हुए संबंधित के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। -श्रेया उपाध्याय, डीपीआरओ