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Hardoi News: कांवड़ियों के जत्थों के साथ श्रद्धालु शिवालयों में करेंगे शिवार्चन
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फोटो 18: सूर्य कमल गोस्वामी। स्रोत : स्वयं
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हरदोई। आज सावन का पहला सोमवार है। भगवान श्रीहरि विष्णु के शयन में जाने और संसार की जिम्मेदारी संभालने के लिए पृथ्वी पर आए भगवान श्रीशिव की विशेष पूजा-अर्चना पूरे माह होती है। वहीं सोमवार को जिलेभर के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ता है। कांवड़ियों के जत्थों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन करते हैं। घरों से लेकर शिव मंदिरों तक पूरे दिन हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंजते हैं।
सावन में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना होती है। आचार्य सनत्कुमार मिश्रा और शास्त्री उमाकांत अवस्थी, आचार्य श्याम सुंदर शुक्ल ने बताया कि पौराणिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है और मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान श्रीहरि विष्णु शयन में चले जाते हैं। ऐसे में संसार के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं। इसके लिए वह कैलाश से पृथ्वी पर आते हैं। भगवान श्रीशिव देवों के देव महादेव हैं। भगवान महादेव को मां भगवती सहित प्रसन्न करने के लिए सावन माह में विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। मंदिरों और शिवालयों में सुबह चार बजे से ही कपाट खुल जाते हैं।
श्रद्धालु सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही शिवालयों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक करते हैं। बेलपत्र, धतूरा, भांग और फल-फूल और अक्षत अर्पित करते हैं। शिव भक्तों के जत्थे गंगाजल लेकर मंदिरों में कांवड़ अर्पित करते हैं। पहले सोमवार को लेकर रविवार को शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में पूरे दिन तैयारियां चलती रहीं। मंदिर परिसरों की साफ-सफाई, सजवाट की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, बैरिकेडिंग और प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों के इंतजाम किए गए।
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शहर से 18 किलोमीटर की दूरी पर ब्लॉक बावन के सकाहा गांव में पौराणिक श्रीशिव संकटहरण मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि श्रीशिव संकटहरण शिवलिंग स्वयंभू है। सावन माह में यहां पर कांवड़ अर्पित किए जाने के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन-अर्चन और भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए आते हैं। मंदिर की व्यवस्था देख रहे सूर्य कमल गोस्वामी ने बताया कि सावन भर यहां श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना के लिए भीड़ रहती है। श्रद्धालुओं की संख्या और देर रात तक पूजन-अर्चन के चलते सावन के सोमवार को यहां पर रूद्राभिषेक नहीं कराए जाते हैं। वहीं अन्य दिनों में रूद्राभिषेक होते हैं और शाम को भगवान शिव का शृंगार होता है। बताया कि रूद्राभिषेक कराने वाले श्रद्धालुओं को सिर्फ नैवेद्य और फल आदि लाने होते हैं। बाकी की व्यवस्था मंदिर प्रबंधन की तरफ से की जाती है और पूजन व सामग्री सहित 11 हजार रुपये दक्षिणा तय की गई है।
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सावन में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना होती है। आचार्य सनत्कुमार मिश्रा और शास्त्री उमाकांत अवस्थी, आचार्य श्याम सुंदर शुक्ल ने बताया कि पौराणिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है और मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर भगवान श्रीहरि विष्णु शयन में चले जाते हैं। ऐसे में संसार के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं। इसके लिए वह कैलाश से पृथ्वी पर आते हैं। भगवान श्रीशिव देवों के देव महादेव हैं। भगवान महादेव को मां भगवती सहित प्रसन्न करने के लिए सावन माह में विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। मंदिरों और शिवालयों में सुबह चार बजे से ही कपाट खुल जाते हैं।
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श्रद्धालु सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही शिवालयों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक करते हैं। बेलपत्र, धतूरा, भांग और फल-फूल और अक्षत अर्पित करते हैं। शिव भक्तों के जत्थे गंगाजल लेकर मंदिरों में कांवड़ अर्पित करते हैं। पहले सोमवार को लेकर रविवार को शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में पूरे दिन तैयारियां चलती रहीं। मंदिर परिसरों की साफ-सफाई, सजवाट की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, बैरिकेडिंग और प्रकाश व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों के इंतजाम किए गए।
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शहर से 18 किलोमीटर की दूरी पर ब्लॉक बावन के सकाहा गांव में पौराणिक श्रीशिव संकटहरण मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि श्रीशिव संकटहरण शिवलिंग स्वयंभू है। सावन माह में यहां पर कांवड़ अर्पित किए जाने के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन-अर्चन और भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए आते हैं। मंदिर की व्यवस्था देख रहे सूर्य कमल गोस्वामी ने बताया कि सावन भर यहां श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना के लिए भीड़ रहती है। श्रद्धालुओं की संख्या और देर रात तक पूजन-अर्चन के चलते सावन के सोमवार को यहां पर रूद्राभिषेक नहीं कराए जाते हैं। वहीं अन्य दिनों में रूद्राभिषेक होते हैं और शाम को भगवान शिव का शृंगार होता है। बताया कि रूद्राभिषेक कराने वाले श्रद्धालुओं को सिर्फ नैवेद्य और फल आदि लाने होते हैं। बाकी की व्यवस्था मंदिर प्रबंधन की तरफ से की जाती है और पूजन व सामग्री सहित 11 हजार रुपये दक्षिणा तय की गई है।

फोटो 18: सूर्य कमल गोस्वामी। स्रोत : स्वयं

फोटो 18: सूर्य कमल गोस्वामी। स्रोत : स्वयं

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