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Hardoi News: डीजल भट्ठी की आंच से कारोबार को दे रहे ऑक्सीजन, सामग्री लागत बढ़ी
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फोटो-06- डीजल भट्टी पर समोसे बनाता कारीगर। संवाद
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हरदोई। खाड़ी देशों में युद्ध के हालात से करीब एक माह से व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में संचालकों ने डीजल भट्ठी की आंच से ऑक्सीजन देकर कारोबार को प्रभावित होने से बचाने के प्रयास शुरू किए हैं। दुकानदार व कारोबार संचालक आसपास के जनपदों से डीजल भट्ठी खरीदकर ला रहे हैं ताकि उपभोक्ताओं को कारोबार से जोड़े रखा जा सके। हालांकि डीजल भट्ठी के उपयोग से भी सामग्री की लागत में बढ़ोतरी हुई है।
खाड़ी देशों में युद्ध के हालात से पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति और परिवहन की समस्या का असर कारोबार और आमजन पर पड़ने लगा है। घरेलू एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति की प्राथमिकता से व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर की होली के बाद से आपूर्ति और डिलीवरी ठप है। इससे दुकानदारों, रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा संचालकों के पास होली पर जुटाए गए सिलिंडर के खत्म होने के बाद कारोबार को जीवित रखने के लिए कोयला और लकड़ी की भट्ठियों का विकल्प बचा था। कुछ दिन बाद व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति की आस में कोयला और लकड़ी की भट्ठी का उपयोग शुरू किया गया लेकिन काफी महंगी, धुआं और समय अधिक लगने से अब दुकानदारों ने डीजल भट्ठी को वरीयता देनी शुरू की है।
डीजल भट्ठी के उपयोग से धुआं और समय की बचत हुई है। सामग्री कम समय में तैयार होने और भट्ठी के उपयोग से गंदगी आदि से भी बचाव हुआ है। बताया गया कि औसतन डीजल भट्ठी की कीमत करीब 25,000 रुपये आ रही है। वहीं, इस भट्ठी में 25 लीटर डीजल का टैंक लगा है। पूरी क्षमता से उपयोग किए जाने पर एक घंटे में करीब 2.50 लीटर डीजल की खपत हो जाती है।
कोयला, लकड़ी की भट्ठी पर काम से कतरा रहे कारीगर
एलपीजी सिलिंडर की भट्ठियों पर काम की आदत से अब कारीगरों को लकड़ी और कोयला भट्ठी भा नहीं रही हैं। लकड़ी और कोयला भट्ठी के उपयोग से समय लगता है साथ ही धुएं से भी कारीगरों को परेशानी होती है। इससे मिठाई की दुकान, रेस्टोरेंट आदि पर काम करने वाले कारीगर न केवल कतरा रहे हैं बल्कि छुट्टी लेकर घर जाने लगे हैं। इससे दुकान और रेस्टोरेंट का काम भी प्रभावित होने लगा है।
व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर के उपयोग के लिए दुकानदारों, होटल, ढाबा संचालकों से प्रपत्र भरवाए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया सत्यापन और आवश्यकता के आकलन के लिए सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों की तरफ से पूरी की जा रही है। अभी व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर का जिले को न तो आवंटन हुआ है और न ही आपूर्ति मिली है। ऐसे में व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर मिलने में अभी समय लगने की संभावना है। -दिलीप कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी
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डीजल भट्ठी के उपयोग से धुआं और समय की बचत हुई है। सामग्री कम समय में तैयार होने और भट्ठी के उपयोग से गंदगी आदि से भी बचाव हुआ है। बताया गया कि औसतन डीजल भट्ठी की कीमत करीब 25,000 रुपये आ रही है। वहीं, इस भट्ठी में 25 लीटर डीजल का टैंक लगा है। पूरी क्षमता से उपयोग किए जाने पर एक घंटे में करीब 2.50 लीटर डीजल की खपत हो जाती है।
कोयला, लकड़ी की भट्ठी पर काम से कतरा रहे कारीगर
एलपीजी सिलिंडर की भट्ठियों पर काम की आदत से अब कारीगरों को लकड़ी और कोयला भट्ठी भा नहीं रही हैं। लकड़ी और कोयला भट्ठी के उपयोग से समय लगता है साथ ही धुएं से भी कारीगरों को परेशानी होती है। इससे मिठाई की दुकान, रेस्टोरेंट आदि पर काम करने वाले कारीगर न केवल कतरा रहे हैं बल्कि छुट्टी लेकर घर जाने लगे हैं। इससे दुकान और रेस्टोरेंट का काम भी प्रभावित होने लगा है।
व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर के उपयोग के लिए दुकानदारों, होटल, ढाबा संचालकों से प्रपत्र भरवाए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया सत्यापन और आवश्यकता के आकलन के लिए सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों की तरफ से पूरी की जा रही है। अभी व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर का जिले को न तो आवंटन हुआ है और न ही आपूर्ति मिली है। ऐसे में व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर मिलने में अभी समय लगने की संभावना है। -दिलीप कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी