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Hardoi News: फॉरेंसिक रिपोर्ट से साफ होगा एक करोड़ की जमीन के मालिकाना हक का विवाद
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हरदोई। एक करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की जमीन पाने का विवाद विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति तक पहुंच गया है। मृत्यु प्रमाण पत्र के फर्जीवाड़े को लेकर पूरे मामले में विवाद हुआ है। अब फॉरेंसिक लैब से मृत्यु प्रमाण पत्रों पर दर्ज हस्ताक्षरों की जांच के आदेश समिति ने दिए हैं।
बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के नगवां कोथावां निवासी फूल कुंवरि उर्फ फूलमती की शादी बावन विकास खंड के मिरकापुर निवासी गुरुबख्श के साथ हुई थी। गुरुबख्श और फूलमती के काेई संतान नहीं थी। फूलमती को मायके में 40 बीघा भूमि मिली थी। इसलिए फूलमती और गुरुबख्श नगवां भी आते-जाते रहते थे। वर्ष 2007 में फूलमती की मौत नगवां में ही हो गई थी। उनकी मौत से पहले गुरुबख्श भी दुनिया छोड़ गए थे। फूलमती के नाम दर्ज 40 बीघा जमीन की कीमत मौजूदा समय में एक करोड़ से ज्यादा है। इस जमीन को हासिल करने का खेल शुरू हुआ तो फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का भी खेल शुरू हो गया। गुरुबख्श के परिवार के लोग इस 40 बीघा जमीन को लेकर आमने-सामने आ गए।
परिवार के अनिल सिंह का दावा है कि फूलमती उनकी चचेरी दादी थीं और मौत से पहले उन्होंने जमीन का बैनामा कर दिया था। इसी परिवार के वीरेश सिंह का दावा है कि फूलमती ने उनके पुत्र शिवेंद्र सिंह का गोदनामा लिखा था और इस आधार पर उनकी भूमि का वारिस शिवेंद्र है। मामला अटका मृत्यु प्रमाण पत्र पर।
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एक मृत्यु प्रमाण पत्र 14 जून 2007 को मृत्यु बताते हुए जारी किया गया तो दूसरा 14 जुलाई 2007 को जारी हुआ। मामले में एक पक्ष ने विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति में पूरा प्रकरण रख दिया। इसके बाद जांच और सुनवाई का सिलसिला चलता रहा। अब पूरे मामले में समिति के सभापति ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट से मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच कराने का निर्देश पंचायत राज विभाग को दिया है। इसको लेकर विस्तृत आख्या भी मांगी गई है।
14 जुलाई 2007 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने का दावा
मिरकापुर निवासी अनिल कुमार सिंह की शिकायत पर पंचायत राज विभाग ने जून में फूलमती के मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच कराई थी। 14 जुलाई 2007 को जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए 14 जून 2007 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को सही बताया गया। 14 जुलाई 2007 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को इसी क्रम में निरस्त किए जाने का आदेश भी तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी ने जारी किया है।
17 सितंबर 2012 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर की फॉरेंसिक जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ से पत्राचार किया गया है। रिपोर्ट आते ही विधान परिषद की समिति को भेजी जाएगी। -अनुनय झा, डीएम
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बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के नगवां कोथावां निवासी फूल कुंवरि उर्फ फूलमती की शादी बावन विकास खंड के मिरकापुर निवासी गुरुबख्श के साथ हुई थी। गुरुबख्श और फूलमती के काेई संतान नहीं थी। फूलमती को मायके में 40 बीघा भूमि मिली थी। इसलिए फूलमती और गुरुबख्श नगवां भी आते-जाते रहते थे। वर्ष 2007 में फूलमती की मौत नगवां में ही हो गई थी। उनकी मौत से पहले गुरुबख्श भी दुनिया छोड़ गए थे। फूलमती के नाम दर्ज 40 बीघा जमीन की कीमत मौजूदा समय में एक करोड़ से ज्यादा है। इस जमीन को हासिल करने का खेल शुरू हुआ तो फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का भी खेल शुरू हो गया। गुरुबख्श के परिवार के लोग इस 40 बीघा जमीन को लेकर आमने-सामने आ गए।
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परिवार के अनिल सिंह का दावा है कि फूलमती उनकी चचेरी दादी थीं और मौत से पहले उन्होंने जमीन का बैनामा कर दिया था। इसी परिवार के वीरेश सिंह का दावा है कि फूलमती ने उनके पुत्र शिवेंद्र सिंह का गोदनामा लिखा था और इस आधार पर उनकी भूमि का वारिस शिवेंद्र है। मामला अटका मृत्यु प्रमाण पत्र पर।
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एक मृत्यु प्रमाण पत्र 14 जून 2007 को मृत्यु बताते हुए जारी किया गया तो दूसरा 14 जुलाई 2007 को जारी हुआ। मामले में एक पक्ष ने विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति में पूरा प्रकरण रख दिया। इसके बाद जांच और सुनवाई का सिलसिला चलता रहा। अब पूरे मामले में समिति के सभापति ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट से मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच कराने का निर्देश पंचायत राज विभाग को दिया है। इसको लेकर विस्तृत आख्या भी मांगी गई है।
14 जुलाई 2007 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने का दावा
मिरकापुर निवासी अनिल कुमार सिंह की शिकायत पर पंचायत राज विभाग ने जून में फूलमती के मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच कराई थी। 14 जुलाई 2007 को जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए 14 जून 2007 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को सही बताया गया। 14 जुलाई 2007 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को इसी क्रम में निरस्त किए जाने का आदेश भी तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी ने जारी किया है।
17 सितंबर 2012 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर की फॉरेंसिक जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ से पत्राचार किया गया है। रिपोर्ट आते ही विधान परिषद की समिति को भेजी जाएगी। -अनुनय झा, डीएम