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Hardoi News: राजनीति ही नहीं रूठों को मनाने में भी माहिर हैं नरेश, यही उनका स्टाइल

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2026 10:57 PM IST
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Naresh is not only an expert in politics but also in pacifying the upset, this is his style.
फोटो-45-पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल। आर्काइव
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हरदोई। सदर सांसद जय प्रकाश और आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल के रिश्तों पर लोकसभा चुनाव के बाद से जमी बर्फ पिघलने लगी है। गतिरोध के बीच एक चर्चा बेहद सामान्य थी और वही चर्चा हकीकत में भी बदली। चर्चा में कहा जा रहा था कि जिस दिन दिग्गज नेता पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल चाह लेंगे उस दिन सारा गतिरोध खत्म हो जाएगा। दरअसल पिछले पांच दशक के राजनीतिक सफर में नरेश अग्रवाल अपनी स्टाइल में राजनीति करते रहे हैंं। रूठों को मनाना और अपनों को फटकारने का उनका अंदाज बेहद चर्चित रहा है।
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आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल और सांसद जय प्रकाश के बीच सियासी रिश्ते लोकसभा चुनाव के मतदान के बाद से ही बिगड़ने लगे थे। न तो सांसद इसकी वजह सार्वजनिक कर रहे थे और न ही मंत्री। लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद रिश्ते और खराब हुए। आम तौर पर परिणाम घोषित होते ही जय प्रकाश बधाई देने और लेने नरेश अग्रवाल के पास जाते थे। इस बार ऐसा नहीं हुआ तो चर्चाओं का बाजार गर्म हो चला। इस सबके बीच नरेश अग्रवाल से व्यक्तिगत विरोध मानने वाले लोगों की नजदीकियां सदर सांसद से बढ़ने लगीं।
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ऐसे लोगों ने आबकारी मंत्री और सांसद के बीच की खाई को और गहरा कर दिया। दोनों के बीच हुए मनमुटाव का नुकसान न सिर्फ दोनों नेताओं बल्कि जिले की जनता को भी होता नजर आ रहा था। विकास कार्याें से लेकर छोटे छोटे मामलों तक में खींचतान होने लगी थी। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से दोनों नेताओं के बीच आपस में संवाद तक नहीं हुआ। बहरहाल नरेश अग्रवाल ने अपने कद की तरह मन भी बड़ा दिखाया और गतिरोध खत्म करने की पहल सार्वजनिक मंच से कर दी। उनकी इस पहल को आबकारी मंत्री ने आगे बढ़ाया, तो सांसद की तरफ से भी सकारात्मक जवाब ही आया।


जिस रूठे के घर चला जाऊंगा वो मान जाएगा....
नरेश अग्रवाल सार्वजनिक मंचाें से अक्सर एक बात कहते हैंं। वह दावा करते हैं कि कोई कितना भी नाराज होगा, अगर उसके घर चले जाएंगे तो वह मान जाएगा। यह दावा नरेश अग्रवाल यूं ही नहीं करते। पांच दशक के राजनीतिक जीवन में नरेश अग्रवाल ने बड़ी संख्या में व्यक्तिगत कार्यकर्ता भी तैयार किए हैं। हकीकत यह भी है कि उनके विरोध में लामबंदी करने वाले अधिकांश लोग उन्हीं के करीबी रहे हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले तक उनके करीबी रहे इटौली निवासी एक शख्स ने सार्वजनिक रूप से काफी कुछ कहा था। इसी बीच नरेश अग्रवाल ने उनसे बात की तो रिश्ते फिर से पहले जैसे हो गए थे। ऐसे उदाहरण बड़ी संख्या में हैं।


... और अब बीच के लोग निशाने पर
सांसद जय प्रकाश ने रविवार को दिए बयान में कहा है कि नरेश अग्रवाल और नितिन अग्रवाल से कोई मतभेद नहीं है। बीच के लोगों ने गलत फहमियां पैदा कीं। सांसद के इस बयान के बाद बीच के लोग न सिर्फ निशाने पर आ गए हैं बल्कि इनको लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो चला है। दोनों ही पक्षों से बीच के लोग में चार नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इनमें एक ब्लाक प्रमुख, एक सभासद प्रतिनिधि, एक करोबारी और एक सामाजिक कार्यकर्ता का नाम लिया जा रहा है।
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