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Hardoi News: संपत्ति के लिए मामा की हत्या करने वाले भांजे को आजीवन कारावास की सजा
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हरदोई। संपत्ति के लिए मामा की हत्या करने वाले भांजे को जिला जज रीता कौशिक ने दोषी करार दिया है। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भी काटनी होगी।
लोनार कोतवाली क्षेत्र के नस्यौली गोपाल निवासी श्रवण ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि घटना से तीन साल पहले से अपने मामा नस्यौली निवासी रामेश्वर के साथ परिवार सहित रहता था। 29 अप्रैल 2019 की रात उसके मामा गांव के बाहर अधबने मकान में सो रहे थे। सुबह देर तक घर न आने पर वह मकान में उनको देखने गया था। वहां उनका शव पड़ा मिला था और शरीर पर चोट के निशान थे। पुलिस ने अज्ञात पर खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
विवेचना में पता चला था कि रामेश्वर के इकलौते पुत्र शैलेंद्र की घटना के करीब पांच साल पहले मार्ग दुर्घटना में मौत हो गई थी और पत्नी की करीब 20 साल पहले मौत हो गई थी। घर में अकेले होने के कारण रामेश्वर ने श्रवण को अपने पास देखभाल करने के लिए रख लिया था इसके बाद रामेश्वर ने श्रवण की पत्नी के हक में चल चल संपत्ति की वसीयत कर दी थी। श्रवण को शक था कि वह किसी और को बैनामा कर देना चाहते हैं। इसी शक के कारण घटना वाले दिन गला दबाकर हत्या कर दी थी।
अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाहों को पेश किया गया इसके साथ ही 11 अभिलेखीय साक्ष्य को भी पेश किया गये। आरोपी के अधिवक्ता ने निर्दोष बताते हुए दोष मुक्त किए जाने का तर्क दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे। जिला शासकीय अधिवक्ता व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर जिला जज ने सजा सुनाई है।
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लोनार कोतवाली क्षेत्र के नस्यौली गोपाल निवासी श्रवण ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि घटना से तीन साल पहले से अपने मामा नस्यौली निवासी रामेश्वर के साथ परिवार सहित रहता था। 29 अप्रैल 2019 की रात उसके मामा गांव के बाहर अधबने मकान में सो रहे थे। सुबह देर तक घर न आने पर वह मकान में उनको देखने गया था। वहां उनका शव पड़ा मिला था और शरीर पर चोट के निशान थे। पुलिस ने अज्ञात पर खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
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विवेचना में पता चला था कि रामेश्वर के इकलौते पुत्र शैलेंद्र की घटना के करीब पांच साल पहले मार्ग दुर्घटना में मौत हो गई थी और पत्नी की करीब 20 साल पहले मौत हो गई थी। घर में अकेले होने के कारण रामेश्वर ने श्रवण को अपने पास देखभाल करने के लिए रख लिया था इसके बाद रामेश्वर ने श्रवण की पत्नी के हक में चल चल संपत्ति की वसीयत कर दी थी। श्रवण को शक था कि वह किसी और को बैनामा कर देना चाहते हैं। इसी शक के कारण घटना वाले दिन गला दबाकर हत्या कर दी थी।
अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाहों को पेश किया गया इसके साथ ही 11 अभिलेखीय साक्ष्य को भी पेश किया गये। आरोपी के अधिवक्ता ने निर्दोष बताते हुए दोष मुक्त किए जाने का तर्क दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे। जिला शासकीय अधिवक्ता व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क दिया। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर जिला जज ने सजा सुनाई है।
