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Hardoi News: मेडिकल कालेज में अव्यवस्थाओं की आग में झुलस रहे मरीज

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2026 10:54 PM IST
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Patients are suffering due to mismanagement in the medical college.
फोटो-07- मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड में भर्ती वर्न का मरीज। संवाद
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज में बेहतर इलाज और आधुनिक सुविधाओं के दावे जमीनी स्तर पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता के चलते झुलसे मरीजों के लिए बुनियादी संसाधन तक मुहैया नहीं कराए गए हैं। बर्न यूनिट है नहीं, अलग से कोई वार्ड भी नहीं बनाया गया। सर्जिकल वार्ड में झुलसे मरीजों के लिए न तो जरूरी चिकित्सीय उपकरण हैं और न ही संक्रमण से बचाने के लिए उचित साफ-सफाई। संक्रमण का बढ़ता खतरा उनकी जान पर जोखिम बना हुआ है।
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आग से झुलसे मरीजों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी जीवाणु रहित वातावरण होता है जबकि मेडिकल कॉलेज में झुलसे हुए मरीजों को सामान्य सर्जिकल वार्ड में रखा जा रहा है। यहां न तो एयर कंडीशन की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त साफ-सफाई। झुलसे मरीजों के लिए सबसे बड़ा खतरा संक्रमण होता है लेकिन सामान्य मरीजों के साथ भर्ती होने पर उनकी जान पर हर पल जोखिम बना रहता है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से भी समुचित संसाधन नहीं दिए जा रहे हैं। मरीजों के लिए सूती कपड़ा और मच्छरदानी की व्यवस्था भी तीमारदारों को करनी पड़ती है। वहीं, अब गर्मी में हवा की जरूरत के लिए लोगों को अपने घर से पंखा लाकर लगाना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिले पांच साल होने के बावजूद अलग बर्न यूनिट का न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
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संक्रमण का बना रहता खतरा

आग से झुलसे मरीजों की त्वचा जल जाने के कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसे में उन्हें आइसोलेशन यानी सबसे अलग और स्वच्छ वातावरण में रखने की जरूरत होती है। इसके उलट मेडिकल कॉलेज में झुलसे मरीजों को सर्जिकल वार्ड में रखा जाता है। यहां अन्य मरीजों के संपर्क में आने से घावों में सेप्टिक होने का डर बना रहता है। आने वाले दिनों में पारा बढ़ने के साथ ही झुलसे मरीजों की तकलीफ और संक्रमण की आशंका कई गुना बढ़ सकती है।


केस-1- तीमारदार रामू ने बताया कि उनके भाई का शरीर 40 प्रतिशत झुलस गया है। डॉक्टर ने यहां भर्ती तो कर लिया लेकिन यहां इतनी गर्मी और मक्खियां हैं कि जख्मों में खुजली और जलन से वह कराह रहा है। यहांं न एसी है और न ही कूलर लगा है।



केस-2- तीमारदार सुनीता ने बताया कि पंखे भी ठीक से काम नहीं कर रहे। झुलसे मरीज को गर्मी और जलन से राहत चाहिए लेकिन यहां कूलर तक की व्यवस्था नहीं है। आने-जाने वालों की दिन भर भीड़ लगी रहती है। ऐसे में घाव में संक्रमण का डर भी रहता है।





बर्न यूनिट तो फिलहाल प्रस्तावित नहीं है लेकिन नवीन आईपीडी भवन में बर्न वार्ड बनाया गया है। विद्युत कनेक्शन मिलते ही आईपीडी भवन चालू हो जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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