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चिरपुरातन है सनातन, जीसस से पहले नहीं था कोई ईसाई : अनिल
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फोटो-22-हिंदू सम्मेलन में बोलते राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला प्रचारक अनिल। संवाद
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शाहाबाद। जीसस से पहले कोई इसाई नहीं थी। पैगंबर से पहले कोई मुस्लिम नहीं था लेकिन सनातन चिरपुरातन है। शास्वत रहने वाला धर्म है। सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक परंपराओं में इसके प्रमाण हैं।
पिछले दो हजार वर्षों के कालखंड में होने वाले प्रयोग मानवता के लिए खतरा बने। यह प्रयोग मानव मूल्यों के लिए असफल रहे। सनातन धर्म ही विश्व शांति का मार्ग है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला प्रचारक अनिल ने व्यक्त किए। वह रविवार शाम शाहाबाद के राम वाटिका चौक में आयोजित हिंदू सम्मेलन में बोल रहे थे।
हिंदू सम्मेलन में जिला प्रचारक ने कहा कि सनातन धर्म में प्रभु स्वयं अवतार लेकर मानव मूल्यों की रक्षा करते हैं। धर्म की स्थापना करते हैं। किसी डाकिये को नहीं भेजते। सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण हुए, श्रीराम हुए, उनसे पहले बामन थे, उससे भी पहले नरसिंह अवतार हुए और इसकी लंबी शृंखला है। कहा कि आज भारत आत्मनिर्भर और मजबूत स्थिति में विश्व पटल पर हिमालय की तरह अडिग है।
ब्रह्मकुमारी लवली ने कहा कि सनातन सिर्फ पूजा पद्धति नहीं है। जीवन जीवने की एक पूर्ण व्यवस्था है। कात्यायनी शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर स्वामी आत्मानंद गिरी ने जल संरक्षण को राष्ट्र धर्म बताया। कहा कि आज जल को नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढि़यों के साथ अन्याय होगा। सम्मेलन को सुधीर श्रीवास्तव, विशाल द्विवेदी, अमितेश मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस दौरान सतेंद्र श्रीवास्तव श्यामजी गुप्ता, शरद, रामजी वर्मा आदि मौजूद रहे।
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पिछले दो हजार वर्षों के कालखंड में होने वाले प्रयोग मानवता के लिए खतरा बने। यह प्रयोग मानव मूल्यों के लिए असफल रहे। सनातन धर्म ही विश्व शांति का मार्ग है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला प्रचारक अनिल ने व्यक्त किए। वह रविवार शाम शाहाबाद के राम वाटिका चौक में आयोजित हिंदू सम्मेलन में बोल रहे थे।
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हिंदू सम्मेलन में जिला प्रचारक ने कहा कि सनातन धर्म में प्रभु स्वयं अवतार लेकर मानव मूल्यों की रक्षा करते हैं। धर्म की स्थापना करते हैं। किसी डाकिये को नहीं भेजते। सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण हुए, श्रीराम हुए, उनसे पहले बामन थे, उससे भी पहले नरसिंह अवतार हुए और इसकी लंबी शृंखला है। कहा कि आज भारत आत्मनिर्भर और मजबूत स्थिति में विश्व पटल पर हिमालय की तरह अडिग है।
ब्रह्मकुमारी लवली ने कहा कि सनातन सिर्फ पूजा पद्धति नहीं है। जीवन जीवने की एक पूर्ण व्यवस्था है। कात्यायनी शक्तिपीठ के पीठाधीश्वर स्वामी आत्मानंद गिरी ने जल संरक्षण को राष्ट्र धर्म बताया। कहा कि आज जल को नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढि़यों के साथ अन्याय होगा। सम्मेलन को सुधीर श्रीवास्तव, विशाल द्विवेदी, अमितेश मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस दौरान सतेंद्र श्रीवास्तव श्यामजी गुप्ता, शरद, रामजी वर्मा आदि मौजूद रहे।
